नोट बंदी किस सरकार में पहली बार हुई थी?

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| Updated on February 1, 2024 | Education

नोट बंदी किस सरकार में पहली बार हुई थी?

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@abhishekgaur6728 | Posted on February 1, 2024

नोटबंदी क्या है?

नोटबंदी जिसको विमुद्रीकरण से नाम भी जानते है एक आर्थिक गतिविधि है जिसमें सरकार पुरानी चल रही करेंसी को बंद करके नए मुद्रा को चालू कर सकती है। ऐसा अक्सर जब किया जाता है जब किसी देश में काला धन बढ़ जाता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है। जिन लोगो के पास काला धन इक्ठा रहता है वे सरकार के पास काला धन जमा करने से बचते है इसके बदले नए मुद्रा लेने का साहस जुटा नही पाते है इससे ये होता है काला धन अपने आप ही नष्ट हो जाता है।

नोटबंदी के फायदे:

  • काला धन को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  • इससे पारदर्शिता बढ़ जाती है जो वित्तिय प्रणाली को मजबूत करती है
  • नकदी की मात्रा कम हो जाती है जिससे महंगाई को नियंत्रण करने में सहायता मिलती है
  • नोटबंदी से डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है।

नोटबंदी के नुकसान:

  • नोट बंदी से आर्थिक अस्थिरता का संकट पैदा होने की संभावना बन सकती है।
  • नोट बंदी से उन लोगो को कठिनाई का सामना करना पड़ता है जिनके पास काला धन नही है
  • काले धन को लोग विदेश में भेजने की कोशिश करने में लग जाते है।

नोटबंदी किस सरकार में पहली बार हुई थी?

  • नोटबंदी पहली बार साल 26 जनवरी 1946 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने 500,1000 तथा 10000 रूपये को चलन से बाहर करके की थी।
  • दूसरी बार नोटबंदी में आजाद भारत में साल 1978,16 जनवरी को मोरारजी देसाई की सरकार ने की थी। जिसमें 1000 तथा 5000 रूपयों को चलन से बाहर कर दिया था।
  • तीसरी बार नोटबंदी मोदी सरकार ने साल 2016 में 8 नवंबर को की थी जिसमेंं 500 तथा 1000 रूपये के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था।

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