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Himani Saini· 2 years ago
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सोवियत संघ का विघटन किस वर्ष हुआ था?

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सोवियत संघ का विघटन, जो 1991 में हुआ, 20वीं सदी के अंत का एक ऐतिहासिक और राजनीतिक मील का पत्थर था। यह घटना न केवल सोवियत संघ के इतिहास के लिए, बल्कि पूरे विश्व के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ था। सोवियत संघ का विघटन, एक ऐसी प्रक्रिया थी, जिसमें विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक कारकों ने मिलकर इसे अपरिहार्य बना दिया। इस लेख में, हम सोवियत संघ के विघटन के विभिन्न कारणों, घटनाओं, और इसके परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

 

सोवियत संघ का विघटन किस वर्ष हुआ था ? - Letsdiskuss

 

सोवियत संघ का गठन

सोवियत संघ का गठन 1922 में हुआ था। यह संघ साम्यवादी विचारधारा पर आधारित था और इसका नेतृत्व बोल्शेविक पार्टी ने किया, जिसकी स्थापना व्लादिमीर लेनिन ने की थी। सोवियत संघ में कुल 15 गणराज्य थे, जिनमें रूस, यूक्रेन, बेलारूस, कज़ाखस्तान, अज़रबैजान, और अन्य कई देश शामिल थे। संघ का उद्देश्य था कि वह एक साम्यवादी समाज की स्थापना करेगा, जहाँ सरकारी नियंत्रण में संसाधनों का वितरण होगा और वर्गों के बीच का भेद मिट जाएगा।

 

सोवियत संघ की आर्थ‍िक और राजनीतिक संरचना

सोवियत संघ की आर्थ‍िक संरचना योजना आधारित थी, जिसका मतलब था कि केंद्र सरकार ने समस्त आर्थ‍िक गतिविधियों का नियमन किया था। प्रमुख उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया गया था और निजी संपत्ति पर प्रतिबंध था। राजनीतिक संरचना में कम्युनिस्ट पार्टी का वर्चस्व था, और यह पार्टी ही देश की सर्वोच्च सत्ता थी। इस संरचना के तहत, पूरे देश में एक पार्टी शासन था और किसी भी प्रकार की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की अनुमति नहीं थी।

 

सोवियत संघ में सुधारों की आवश्यकता

1970 और 1980 के दशकों में सोवियत संघ के सामने अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुईं। आर्थ‍िक मंदी, बढ़ती महंगाई, और सरकारी भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ जनता के लिए गंभीर मुद्दे बन गई थीं। इसके साथ ही, अफगानिस्तान में 1979 में सोवियत संघ के हस्तक्षेप ने भी संघ की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचाया। इन समस्याओं के समाधान के लिए, मिखाइल गोर्बाचोव ने 1985 में सोवियत संघ के नेता के रूप में पदभार संभाला और उन्होंने सुधारों का सिलसिला शुरू किया।

 

गोर्बाचोव के सुधार (पेरोस्ट्रोइका और ग्लासनोस्त)

मिखाइल गोर्बाचोव के नेतृत्व में दो प्रमुख सुधारों की शुरुआत हुई, जिन्हें "पेरोस्ट्रोइका" (आर्थ‍िक पुनर्निर्माण) और "ग्लासनोस्त" (खुलापन) कहा जाता है। पेरोस्ट्रोइका का उद्देश्य था सोवियत संघ की आर्थ‍िक प्रणाली को सुधारना और उसे अधिक लचीला बनाना। ग्लासनोस्त के तहत, गोर्बाचोव ने सरकारी निर्णयों और कार्यों में पारदर्शिता की नीति अपनाई और नागरिकों को स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति दी। इन सुधारों ने, हालांकि, जनमानस में असंतोष और उम्मीदें भी पैदा कीं, लेकिन वे सोवियत संघ की राजनीति और समाज में गहरे परिवर्तनों का कारण बने।

 

राजनीतिक असंतोष और अलगाववादी आंदोलन

सोवियत संघ के भीतर कई रिपब्लिक्स (गणराज्य) में अपनी स्वतंत्रता की माँग तेज़ हो गई थी। बाल्टिक राज्यों (एस्तोनिया, लातविया, और लिथुआनिया) में विशेष रूप से स्वतंत्रता के आंदोलन तीव्र हो गए थे। इसके अलावा, अन्य गणराज्यों में भी अलगाववादी भावनाएँ उत्पन्न होने लगीं। इन आंदोलनों को गोर्बाचोव के सुधारों ने और हवा दी, क्योंकि उनके द्वारा दी गई राजनीतिक खुलापन ने लोगों को अपनी आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित किया।

 

यूक्रेन, अज़रबैजान, और कज़ाखस्तान में भी जातीय संघर्षों और आंतरिक असंतोष ने सोवियत संघ को और कमजोर कर दिया। इसके अलावा, रूस में भी राजनीतिक और आर्थ‍िक संकट ने लोगों को सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया।

 

1991 में सोवियत संघ का विघटन

सोवियत संघ का विघटन 1991 के अंत में हुआ। इस विघटन के प्रमुख कारणों में एक ओर बड़ी वजह थी - अगस्त 1991 में सोवियत संघ में एक असफल सैन्य तख़्तापलट। यह तख़्तापलट गोर्बाचोव के खिलाफ था, और उसका उद्देश्य था उन्हें सत्ता से हटा कर सोवियत संघ को पुराने रूढ़िवादी ढांचे में वापस लाना। हालांकि, यह तख़्तापलट विफल हो गया, लेकिन इस घटना ने सोवियत संघ के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

 

तख़्तापलट के विफल होने के बाद, 1991 में सोवियत संघ के कई गणराज्यों ने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। 25 दिसम्बर 1991 को, मिखाइल गोर्बाचोव ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया और सोवियत संघ का आधिकारिक रूप से विघटन हो गया। इसके बाद, 15 स्वतंत्र राष्ट्रों का जन्म हुआ, जिनमें रूस, यूक्रेन, बेलारूस, कज़ाखस्तान और अन्य गणराज्य शामिल थे।

 

विघटन के परिणाम

सोवियत संघ के विघटन के परिणाम गहरे और दूरगामी थे। सबसे पहला परिणाम यह था कि 15 नए स्वतंत्र देशों का अस्तित्व सामने आया। इन देशों ने अपने-अपने आंतरिक संघर्षों, आर्थ‍िक समस्याओं, और राजनीतिक स्थिरता की दिशा में संघर्ष किया। रूस, जो कि सबसे बड़ा और शक्तिशाली गणराज्य था, उसे अपनी नई पहचान और आर्थ‍िक प्रणाली के निर्माण में कठिनाइयाँ आईं।

 

इसके अलावा, सोवियत संघ के विघटन ने वैश्विक राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डाला। शीत युद्ध का अंत हुआ, और संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थिति वैश्विक परिप्रेक्ष्य में और मजबूत हो गई। रूस और पश्चिमी देशों के बीच रिश्ते पहले की तरह शत्रुतापूर्ण नहीं रहे, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव और सहयोग की स्थिति बनी रही।

 

निष्कर्ष

सोवियत संघ का विघटन एक जटिल और लंबी प्रक्रिया का परिणाम था, जो राजनीतिक, आर्थ‍िक, और सामाजिक कारकों द्वारा प्रेरित था। गोर्बाचोव के सुधारों ने इसे तेज़ किया, जबकि विभाजनकारी ताकतों ने इसे अपरिहार्य बना दिया। सोवियत संघ का विघटन न केवल रूस और उसके आसपास के देशों के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक नई राजनीतिक और आर्थ‍िक वास्तविकता लेकर आया। यह घटना 20वीं सदी के अंत की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है, और इसका प्रभाव आज भी वैश्विक राजनीति में महसूस किया जाता है।

 

Answered by
Henry Cavill
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🥰 lovely

Answered on02/13/25
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