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Educationजन्माष्टमी- श्री कृष्ण का जन्म
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Asha Hire

| Updated on August 28, 2021 | education

जन्माष्टमी- श्री कृष्ण का जन्म

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Asha Hire

@ashahire5291 | Posted on August 28, 2021

जन्माष्टमी श्री कृष्ण के प्रकट दिवसः श्री राम और श्री कृष्ण भारतीय सभ्यता संस्कृति के दो महत्वपूर्ण व्यक्तित्व माने जाते हैं। उस महत्व और समाज के कारण ही श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम और श्रीकृष्ण को योगीराज कहा जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का संबंध यदि दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों से जुड़ा है, तो जन्माष्टमी श्री कृष्ण के प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाने वाला त्यौहार है। इस बार यह 30 अगस्त को मनाया जाएगा।

ऐसी मान्यता हैः जन्माष्टमी को हम मुख्य और विशुद्ध रूप में मौला भारतवासियों याने हिंदुओं का त्यौहार कह सकते हैं। यह हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। बार और तिथि कोई भी हो सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में आज से लगभग 5000 वर्ष पहले अत्याचारी राजा कंस के बहाने देवकी ने बंदी गृह में श्रीकृष्ण को जन्म दिया था। क्योंकि देवकी पति वसुदेव के साथ विदाई के अवसर पर ही एक भविष्यवाणी से कंस जान गया था कि देवकी के गर्भ से ही उसका काल उत्पन्न होगा, सो मारे डर के कंस ने देवकी को विदा न कर उसके पति वसुदेव के साथ जेल में बंद कर दिया था। वहीं पर कृष्ण जन्म हुआ था।

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कथाः

कहते हैं जैसे ही कृष्ण का जन्म हुआ, जेल के द्वार खुल गए। वसुदेव बालों को यमुना पार अपने मित्र नंद के पास पहुंचा आया। गोकुल में यशोदा माता और नंद बाबा के देख - रेख में पालन-पोषण हुआ कृष्ण का। यही बालक मुरली मनोहर, लीला बिहारी, महारास रचने वाला तो हुआ ही, श्री कृष्ण के रूप में उसने कंस और उसके कई दोस्त साथियों का वध भी किया। बड़े होकर इसने महाभारत का सूत्रधार बनकर ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ जैसा कर्म योग का महान उपदेश भी दिया।

जन्माष्टमी के दिन भक्त और श्रद्धालु लोग दिनभर व्रत रखते हैं। आधी रात के समय श्री कृष्ण जन्म हो जाने तक भजन पूजन कीर्तन आदि करते रहते हैं। उसके बाद कुछ खा पी कर व्रत का उपारण किया करते हैं। जन्माष्टमी के दिन वो तो छोटे - बड़े प्रत्येक मंदिर का खूब सजाया जाता है। पर कृष्ण मंदिरों की तो शोभा ही निखरि हुआ करती है। एवं इधर-उधर तंबू लगाकर भी कृष्ण लीला का संबंध रखने वाली कई तरह की झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं। प्रसाद बांटा जाता है।

भारतीय सभ्यता संस्कृति का उद्धार करने के कारण ही कर्मयोगी श्री कृष्ण का मान सम्मान और पूजा एक संपूर्ण कला - संपन्न अवतार के रूप में की जाती है। जिन कारणों या गुणों के कारण वे इतना महत्वपूर्ण स्थान पा सके, उन्हें अपनाकर ही हम उनके प्रति सच्चा प्रेम और आधार भाव प्रकट कर सकते हैं।

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