ज्योतिष शाश्त्र का मानव जीवन में बहुत बड़ा महत्व है | ज्योतिष शाश्त्र बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा एक शाश्त्र है | ये इंसान की जन्म से लेकर मृत्यु तक का लेखा जोखा होता है | इसमे इंसान के वर्तमान से लेकर उसके भविष्य तक की सब जानकारी होती है | जो लोग ज्योतिष को मानते है उनके लिए यह सब कुछ है | ज्योतिष शाश्त्र इतना बड़ा है कि उसको समझने के लिए ज्योतिष शाश्त्र को भी कई भागो में विभाजित किया गया है |
जैसे :-
हस्त रेखा ,कुंडली ,पंचाग,वास्तु शाश्त्र ,अंक विद्द्या ,सभी प्रकार कि पूजन विधि इत्यादि |
हस्त रेखा :- हस्त रेखा ज्ञान वो ज्ञान होता है ,जिससे इंसान का भविष्य उसकी हाथो कि रेखाओ में होता है | वैसे माना जाता है कि इंसान कि किस्मत उसके हाथो में ही होती है | अब जो लोग मेहनत करे तो उनकी मेहनत में और जो लोग हस्त रेखा मानते है उनकी रेखाओ में |
कुंडली :- जब किसी का जन्म होता है तो उसके जन्म तिथि से लेकर उसका समय और स्थान कि सम्पूर्ण जानकरी के बाद उसकी कुंडली बनाई जाती है | यह कुंडली इंसान का भविष्य और वर्तमान दोनों बताती है |
पांचांग :- हिन्दू धर्म का कैलेंडर हम पांचांग को मान सकते है | ज्योतिष के पांच अंग को मिलकर बनता है पांचांग | जैसे -तिथि ,वार ,नक्षत्र,योग और करण |
वास्तु शाश्त्र :- नकारात्मक शक्तियों और ऊर्जाओं को अपने घर व ज़िंदगी से दूर करने के लिए वाश्तु शाश्त्र माना जाता है | वर्तमान में बहुत से लोग वास्तु के आधार पर ही अपने घर व ऑफिस का निर्माण करते है |
अंक विद्द्या :- अंक विद्द्या भी ज्योतिष शाश्त्र का एक महत्वपूर्ण पहलु है | इसमे इंसान का भविष्य उसके जन्म कि तारिक से निकाला जाता है |