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Apr 24, 2026entertainment

करवा चौथ क्यों मनाया जाता है?

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Apr 24, 2026

करवा चौथ मुख्य रूप से हिंदू धर्म में सुहागिन (विवाहित) महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। यह विशेष रूप से उत्तर भारत में बहुत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

करवा चौथ मनाए जाने के मुख्य कारण और इसका सांस्कृतिक महत्व इस प्रकार है:

1. पति की लंबी उम्र और सलामती (मुख्य उद्देश्य)

इस त्योहार को मनाने का सबसे प्रमुख कारण पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उनके जीवन में सफलता की कामना करना है। मान्यता है कि इस दिन पत्नी द्वारा सच्चे मन से रखा गया 'निर्जला व्रत' (बिना अन्न और जल ग्रहण किए) पति के जीवन पर आने वाले हर संकट को टाल देता है।

2. अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

करवा चौथ के दिन मुख्य रूप से भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में शिव-पार्वती को आदर्श दंपत्ति माना जाता है। महिलाएं माता पार्वती की पूजा करके उनसे 'अखंड सौभाग्यवती' (आजीवन पति का साथ और सुखी वैवाहिक जीवन) होने का आशीर्वाद मांगती हैं।

3. पौराणिक कथाएं और मान्यताएं

इस व्रत की उत्पत्ति और महत्व से कई प्राचीन कथाएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:

करवा माता की कथा: करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री के पति को नदी में स्नान करते समय एक मगरमच्छ ने पकड़ लिया था। करवा ने अपने सतीत्व और तपोबल से यमराज को विवश कर दिया कि वे मगरमच्छ को मृत्युदंड दें और उनके पति के प्राण लौटाएं। माना जाता है कि उन्हीं के नाम पर इस त्योहार का नाम 'करवा चौथ' पड़ा।

रानी वीरवती की कथा: यह करवा चौथ की सबसे प्रचलित कथा है, जिसमें वीरवती अपने भाइयों के छल के कारण चांद निकलने से पहले ही व्रत खोल लेती है और उसके पति की मृत्यु हो जाती है। बाद में पूरे एक साल तक कठोर नियम पालन और अगले करवा चौथ का व्रत रखकर वह अपने पति को पुनः जीवित कर लेती है।

4. प्रेम और आपसी समर्पण का प्रतीक

धार्मिक मान्यताओं से परे, आधुनिक परिप्रेक्ष्य में करवा चौथ पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति समर्पण को व्यक्त करने का दिन बन गया है। यह रिश्तों को मजबूत करने का एक अवसर होता है। आजकल कई पति भी अपनी पत्नी के अच्छे स्वास्थ्य, सम्मान और समानता के प्रतीक के रूप में उनके साथ यह व्रत रखते हैं।

व्रत की प्रक्रिया

यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत सूर्योदय से पहले सास द्वारा दी गई 'सरगी' खाकर होती है। इसके बाद महिलाएं दिन भर जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं। रात को चंद्रमा के दर्शन करने, उसे छलनी से देखने और अर्घ्य (जल) चढ़ाने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके ही यह कठिन व्रत पूर्ण माना जाता है।

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H
Apr 21, 2026

करवा चौथ एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जिसे विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए मनाती हैं। इस दिन महिलाएँ सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं।

इस व्रत का संबंध पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण से माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन मजबूत और सुखी बना रहता है।

महिलाएँ सज-धज कर पूजा करती हैं, कथा सुनती हैं और रात में चाँद को देखकर व्रत खोलती हैं।

करवा चौथ प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक त्योहार है, जो दांपत्य जीवन को मजबूत बनाता है।

 
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N
Apr 21, 2026

करवा चौथ केवल व्रत ही नहीं, बल्कि रिश्तों की भावनात्मक मजबूती का प्रतीक भी है। यह त्योहार पति-पत्नी के बीच विश्वास, प्रेम और आपसी समझ को दर्शाता है।

इस दिन महिलाएँ एक साथ पूजा करती हैं, जिससे आपसी जुड़ाव और रिश्तों में अपनापन बढ़ता है। यह त्योहार परिवार और समाज को जोड़ने का भी काम करता है।

मेरे हिसाब से, करवा चौथ का असली महत्व त्याग और समर्पण की भावना में है, जहाँ एक व्यक्ति अपने प्रिय के लिए पूरे दिन उपवास रखता है।

यह त्योहार सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि रिश्तों में प्यार, विश्वास और सम्मान को मजबूत करने का एक खास अवसर है।

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V
Apr 24, 2026

करवा चौथ एक हिंदू पर्व है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रमा निकलने तक निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चांद को देखकर व्रत खोलती हैं।

इस व्रत के पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता है कि इससे पति की रक्षा होती है और दांपत्य जीवन मजबूत बनता है। साथ ही यह त्योहार पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।


करवा चौथ पति की लंबी उम्र, खुशहाल जीवन और रिश्ते की मजबूती के लिए मनाया जाता है

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