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Sneha Bhatiya· 8 साल पहले
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क्यों औरतें अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार की जरूरत को महत्व देती हैं ?

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अपडेट किया गया06/06/26

कई societies में महिलाओं को बचपन से caring, sacrificing और family-oriented roles के साथ social conditioning दी जाती है। इसी कारण कई महिलाएं अपनी personal needs से पहले family responsibilities को priority देने लगती हैं। Emotional attachment, motherhood expectations, cultural values और relationship responsibilities भी इसका बड़ा कारण हो सकते हैं। हालांकि modern times में कई women personal growth, career और self-care को भी importance देने लगी हैं। Experts मानते हैं कि healthy balance जरूरी है क्योंकि लगातार self-neglect emotional exhaustion और stress पैदा कर सकता है। Family care महत्वपूर्ण है, लेकिन women की own health, dreams और emotional well-being को equally valuable माना जाना चाहिए।

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Bridging clinical medicine and everyday wellness — helping readers make informed decisions about their health and appearance.
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Dr. Aarav Gupta is a practising physician with over 8 years of clinical experience, specialising in general medicine and dermatology-adjacent wellness. He holds an MBBS from All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), New Delhi, and an MD in General Medicine from the same institution — credentials that place his health and beauty writing on a foundation of verified medical knowledge. His content covers evidence-based skincare, preventive health, nutrition, mental wellness, and the science behind beauty trends that are too often reported without clinical context. His work has been published on platforms including HealthShots, OnlyMyHealth, and Lybrate, where he contributes medical reviews, explainers, and practical health guidance grounded in current clinical evidence. With 8+ years of patient-facing practice behind his writing, Dr. Gupta brings a perspective that is rarely found in health and beauty content — one shaped by real clinical encounters, not just research papers. He is a registered member of the Indian Medical Association (IMA) and has spoken on health literacy and responsible medical communication at platforms including the India Health Summit. Across all his work, his standard remains consistent — every claim is grounded in medical evidence, every recommendation is one he would make to a patient, and no trend is reported without clinical scrutiny.

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जवाब दिया गया12/07/22

जी हाँ बिल्कुल औरते अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार की जरूरत को महत्व इसलिए देती है, क्योंकि वह अपने से पहले अपने परिवार वालो के बारे मे सोचती है, परिवार से बहुत प्यार करती है उनके लिए परिवार से बढ़कर कुछ नहीं होता है इसलिए वह अपनी जरूरतों की चीजों मे कटौती कर देती है जैसे कि फिजूल के खर्च नहीं करती है, कही बाहर घूमने जाती है तो घर से ही खाना बनाकर लेकर जाती है जिससे पैसा बच जाये और वही पैसो से परिवार का गुजारा हों जाये।

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जवाब दिया गया07/06/23

क्या आप जानते हैं कि क्यों औरतें अपने जरूरतों से ज्यादा अपने परिवार की जरूरतों का ख्याल रखती हैं चलिए हम आपको इसके बारे में बताते हैं औरत अपने परिवार का हमेशा खुद से ज्यादा ख्याल रखती है क्योंकि उसे अपने परिवार की चिंता हर समय लगी रहती है, एक औरत अपने परिवार वालों से इतना अधिक प्यार करती है कि उसे अपने परिवार के आगे कुछ भी दिखाई नहीं देता, यदि एक औरत के परिवार के साथ कुछ गलत होता है तो वह कभी भी सहन नहीं कर सकती है हमेशा उसके खिलाफ आवाज उठाती है।

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Krishna Patel
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जवाब दिया गया07/07/23

दोस्तों आप सभी को पता है कि कोई भी औरत क्यों ना हो वह अपनी जरूरतों से ज्यादा अपने परिवार की जरूरत को महत्व देती है क्योंकि एक औरत के लिए सब कुछ उसका परिवार और उसके बच्चे ही होते हैं। एक औरत अपने परिवार की जरूरतों को समझते हुए अपनी नौकरी को भी छोड़ देती है क्योंकि वह जानती है कि उसकी जरूरत उसके परिवार को पहले हैं। एक औरत अपने बच्चे की देखभाल करने के लिए सारी रात तक जागती रहती है।

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अपडेट किया गया12/25/25

आपकी राय सें सयुंक्त परिवार ज्यादा अच्छा हैं I क्योंकि सयुंक्त परिवार में रहने कुछ अलग ही मजा हैं क्योंकि सयुंक्त परिवार में एक मुखिया भी होता हैं I जो परिवार कि सारी जिम्मेदारी उठाता हैं औऱ उसकी राय सें ही सब कुछ चलता हैं I एक बात औऱ एकल या सयुंक्त परिवार चाहे कुछ भी हो लेक़िन कैसे रहना हैं वो आपके सोच औऱ व्यवहार पर निर्भर करता हैं I यहाँ आपकी सोच सें सब कुछ चलता है क्योंकि कुछ लोंग कि सोच औऱ व्यवहार कहता हैं कि हमे सयुंक्त परिवार रहना चाहिए , कुछ लोंग सोच औऱ व्यवहार कहता है कि एकल परिवार रहने सें खुशियाँ मिलती हैं, मेरी राय के अनुसार - सयुंक्त परिवार रहने सें हमें बहुत सारी खूबियां मिलती हैं, क्योंकि सयुंक्त परिवार रहने सें हमें सभी प्रेम मिलता हैं, सभी बड़ो का आशीर्वाद मिलता हैं I साथ मिल -जुलकर रहते हैं, सयुंक्त परिवार में सास -ससुर, देवर - देवरानी, जेठ -जेठनी, नानद, दादा -दादाजी सभी का प्यार मिलता हैं, औऱ खुशहाल जीवन जीते हैं, औऱ सयुंक्त परिवार रहने सें एक खूबियां यह है कि कोई परेशनी दिक्कत आने पे सबसे पहले घर के मुखिया ही सब देखते हैं I हमें कोई परेशनी सामना नहीं करना पड़ता क्योंकि घर में सब बड़े रहते है I

औऱ एकल परिवार रहनें कुछ फायदे औऱ नुकसान भी हैं आज के समय में इतनी महगाई होगयी कुछ लोंग घर का खर्चा नहीं उठा पाते कारण परिवार रहना पडता है I दूसरा कारण यह भी हैंकुछ महिला घऱ सें अलग एकल परिवार में रहना पसंद करती है क्योंकि उनकी खुद कि जरूरत पूरी नहीं हो पाती I एकल परिवार रहनें सें पति -पत्नी बच्चें सब खुखुश रहते हैं Iमां-बाप खुश नहीं रहते क्योंकि माँ -बाप कूछ आरमान होते हैं बच्चो कों लेके मेरे बच्चे हमारे बुढ़ापे का सहारा बनेगा I जिस तरह हमनेेेेे अपने बच्चों को पाल - पोषण करके बड़ा किया|

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जवाब दिया गया07/06/23

कुछ औरते अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार वालो क़ो जरूरत क़ो महत्व देती है क्योंकि उनके लिए सब कुछ उनका परिवार ही होता है, परिवार से बढ़कर उनके लिए कुछ नहीं होता है। परिवार मे अपने माता -पिता और सास -ससुर,पति क़ो बहुत ज्यादा महत्व देती है, क्योंकि वह अपने परिवार वालो की जरूरत पहले पूरा करती है फिर बाद मे महिलाए अपनी जरूरत क़ो पूरा करती है।लेख की तस्वीर

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अपडेट किया गया12/24/25

एक लड़की का जब जन्म होता है, तब से लेकर जब तक उसकी शादी नहीं होती तब तक उसके घर वाले उसको बस एक ही बात सीखाते है, ज़िंदगी में सिर्फ बलिदान ही लड़कियों का धर्म होता है | जब तक शादी नहीं हुई तो अपने माँ-पिता की सुनो और शादी के बाद अपने ससुराल वालों की सुनो | एक औरत की ज़िंदगी यहीं निकल जाती है |

- एक लड़की :-
 
जब एक लड़की अपने घर पर रहती है, तो अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने घर काम भी करती हैं | बेशक उनकी अगले दिन परीक्षा हो परन्तु वो घर का काम पूरा कर के ही पढ़ाई करने बैठती हैं | लड़कियों को अपने माता-पिता की बहुत चिंता होती है |
 
- एक औरत :-
 
- जब किसी लड़की की शादी हो जाती है, तब वह अपने ससुराल के साथ-साथ अपने घर वालों की भी चिंता करती है |
 
- अगर एक औरत नौकरी पर जाती है, तो वो उससे पहले अपने घरवालों के लिए नाश्ता बनाकर जाती है, और अपना भी खाना खुद बनती है |
 
- घर के किसी सदस्य को कही जाना हो तो घर की औरत उससे पहले जागती है | जिसको जाना है, उसकी तयारी करती है |
 
- अपने हर काम को पूरा करने के बाद भी उसके मन में हमेशा एक विचार चलता रहता है, कि कही कुछ ग़लती न हो जाएं, जिससे सब नाराज हो जाएं |
 
- हमेशा अपने लिए कमी करती है, पर अपने बच्चों के लिए कोई कमी नहीं करती |
हमेशा औरतें ही बलिदान देती है, क्योकि वो एक औरत है |
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अपडेट किया गया06/06/26
औरतें अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार की जरूरतों को महत्व देती हैं, वो ऐसा क्यों करती हैं, इसकी कोई एक वजह नहीं हैं | एक औरत के जीवन में कई ऐसी वजह हैं, जो उसको कई बार अपनी जरूरतों को कम महत्व देने पर मजबूर करती हैं, और कई बार तो महत्व न देने पर मजबूर कर देती हैं | परन्तु सभी महिलाएं ऐसी नहीं होती |
 
अधिकतर महिलाएं बहुत बचत करने वाली होती हैं | बचत करने के लिए वो उन चीजों में कटौती करती है, जो चीज़ें उनको अपने लिए लेनी होती हैं | अगर कही बहार घूमने जाने के लिए कहा जाये तो वो अक्सर मन कर देती हैं, नहीं जाती, क्योकि उन्हें लगता हैं, फ़िज़ूल खर्चा होगा | कभी कहीं घूमने गए भी तो वो खाने-पीने की चीज़ें नहीं खरीदती क्योकि उन्हें लगता हैं, महंगा है, पैसे ज्याद खर्च हो जाएंगे|
 
अक्सर ऐसी महिलाएं ये सोच कर अपने लिए कुछ नहीं लेती, क्योकि उन्हें लगता हैं, अगर वो ये चीज़ नहीं लेंगी तो इसके बदले उसके बच्चें कोई दूसरी चीज़ ले लेंगे, या फिर उसको लगता हैं, अपने बच्चों के लिए या अपने परिवार के कुछ ले लेते हैं, अपने लिए दोबारा में ले लुंगी, और अक्सर यही सोचती रह जाती हैं |
 
बस यही सोच लेकर एक औरत अपनी हर इच्छा को मार देती हैं | एक औरत ये नहीं सोचती की उसका ऐसा करना शायद कहीं का कहीं उसको ही तकलीफ दे रहा हैं | जब एक औरत हर चीज़ के लिए यह कह कर मना कर देती हैं, कि "मुझे नहीं चाहिए" या "ये मुझे अच्छा नहीं लगता " तो उसके परिवार वालों को लगता हैं, कि सच में ये चीज़ उसको नहीं चाहिए, या उसको पसंद नहीं हैं |
 
अगर एक औरत अपनी इच्छा को यूहीं मारती रहें तो एक वक़्त ऐसा आएगा जब आपके परिवार को ऐसा लगेगा के आपको किसी चीज़ की जरूरत ही नहीं और वो आपसे पूछना ही बंद कर देंगे | अगर उन्होंने आपसे पूछना बंद किया तो फिर आपको ये एहसास होगा कि में अपनों के लिए कितने त्याग किये और इसके बदले मुझे क्या मिला | आपको ऐसा लगेगा कि, किसी को आपकी जरूरत ही नहीं हैं |
 
मुझे ऐसा लगता हैं, एक औरत कोअपनी इच्छा को कम करना चाहिए पर उसको पूरी तरह मार देना सही नहीं हैं |
 
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