कई societies में महिलाओं को बचपन से caring, sacrificing और family-oriented roles के साथ social conditioning दी जाती है। इसी कारण कई महिलाएं अपनी personal needs से पहले family responsibilities को priority देने लगती हैं। Emotional attachment, motherhood expectations, cultural values और relationship responsibilities भी इसका बड़ा कारण हो सकते हैं। हालांकि modern times में कई women personal growth, career और self-care को भी importance देने लगी हैं। Experts मानते हैं कि healthy balance जरूरी है क्योंकि लगातार self-neglect emotional exhaustion और stress पैदा कर सकता है। Family care महत्वपूर्ण है, लेकिन women की own health, dreams और emotional well-being को equally valuable माना जाना चाहिए।
क्यों औरतें अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार की जरूरत को महत्व देती हैं ?
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जी हाँ बिल्कुल औरते अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार की जरूरत को महत्व इसलिए देती है, क्योंकि वह अपने से पहले अपने परिवार वालो के बारे मे सोचती है, परिवार से बहुत प्यार करती है उनके लिए परिवार से बढ़कर कुछ नहीं होता है इसलिए वह अपनी जरूरतों की चीजों मे कटौती कर देती है जैसे कि फिजूल के खर्च नहीं करती है, कही बाहर घूमने जाती है तो घर से ही खाना बनाकर लेकर जाती है जिससे पैसा बच जाये और वही पैसो से परिवार का गुजारा हों जाये।

क्या आप जानते हैं कि क्यों औरतें अपने जरूरतों से ज्यादा अपने परिवार की जरूरतों का ख्याल रखती हैं चलिए हम आपको इसके बारे में बताते हैं औरत अपने परिवार का हमेशा खुद से ज्यादा ख्याल रखती है क्योंकि उसे अपने परिवार की चिंता हर समय लगी रहती है, एक औरत अपने परिवार वालों से इतना अधिक प्यार करती है कि उसे अपने परिवार के आगे कुछ भी दिखाई नहीं देता, यदि एक औरत के परिवार के साथ कुछ गलत होता है तो वह कभी भी सहन नहीं कर सकती है हमेशा उसके खिलाफ आवाज उठाती है।

दोस्तों आप सभी को पता है कि कोई भी औरत क्यों ना हो वह अपनी जरूरतों से ज्यादा अपने परिवार की जरूरत को महत्व देती है क्योंकि एक औरत के लिए सब कुछ उसका परिवार और उसके बच्चे ही होते हैं। एक औरत अपने परिवार की जरूरतों को समझते हुए अपनी नौकरी को भी छोड़ देती है क्योंकि वह जानती है कि उसकी जरूरत उसके परिवार को पहले हैं। एक औरत अपने बच्चे की देखभाल करने के लिए सारी रात तक जागती रहती है।

आपकी राय सें सयुंक्त परिवार ज्यादा अच्छा हैं I क्योंकि सयुंक्त परिवार में रहने कुछ अलग ही मजा हैं क्योंकि सयुंक्त परिवार में एक मुखिया भी होता हैं I जो परिवार कि सारी जिम्मेदारी उठाता हैं औऱ उसकी राय सें ही सब कुछ चलता हैं I एक बात औऱ एकल या सयुंक्त परिवार चाहे कुछ भी हो लेक़िन कैसे रहना हैं वो आपके सोच औऱ व्यवहार पर निर्भर करता हैं I यहाँ आपकी सोच सें सब कुछ चलता है क्योंकि कुछ लोंग कि सोच औऱ व्यवहार कहता हैं कि हमे सयुंक्त परिवार रहना चाहिए , कुछ लोंग सोच औऱ व्यवहार कहता है कि एकल परिवार रहने सें खुशियाँ मिलती हैं, मेरी राय के अनुसार - सयुंक्त परिवार रहने सें हमें बहुत सारी खूबियां मिलती हैं, क्योंकि सयुंक्त परिवार रहने सें हमें सभी प्रेम मिलता हैं, सभी बड़ो का आशीर्वाद मिलता हैं I साथ मिल -जुलकर रहते हैं, सयुंक्त परिवार में सास -ससुर, देवर - देवरानी, जेठ -जेठनी, नानद, दादा -दादाजी सभी का प्यार मिलता हैं, औऱ खुशहाल जीवन जीते हैं, औऱ सयुंक्त परिवार रहने सें एक खूबियां यह है कि कोई परेशनी दिक्कत आने पे सबसे पहले घर के मुखिया ही सब देखते हैं I हमें कोई परेशनी सामना नहीं करना पड़ता क्योंकि घर में सब बड़े रहते है I
औऱ एकल परिवार रहनें कुछ फायदे औऱ नुकसान भी हैं आज के समय में इतनी महगाई होगयी कुछ लोंग घर का खर्चा नहीं उठा पाते कारण परिवार रहना पडता है I दूसरा कारण यह भी हैंकुछ महिला घऱ सें अलग एकल परिवार में रहना पसंद करती है क्योंकि उनकी खुद कि जरूरत पूरी नहीं हो पाती I एकल परिवार रहनें सें पति -पत्नी बच्चें सब खुखुश रहते हैं Iमां-बाप खुश नहीं रहते क्योंकि माँ -बाप कूछ आरमान होते हैं बच्चो कों लेके मेरे बच्चे हमारे बुढ़ापे का सहारा बनेगा I जिस तरह हमनेेेेे अपने बच्चों को पाल - पोषण करके बड़ा किया|
कुछ औरते अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार वालो क़ो जरूरत क़ो महत्व देती है क्योंकि उनके लिए सब कुछ उनका परिवार ही होता है, परिवार से बढ़कर उनके लिए कुछ नहीं होता है। परिवार मे अपने माता -पिता और सास -ससुर,पति क़ो बहुत ज्यादा महत्व देती है, क्योंकि वह अपने परिवार वालो की जरूरत पहले पूरा करती है फिर बाद मे महिलाए अपनी जरूरत क़ो पूरा करती है।
एक लड़की का जब जन्म होता है, तब से लेकर जब तक उसकी शादी नहीं होती तब तक उसके घर वाले उसको बस एक ही बात सीखाते है, ज़िंदगी में सिर्फ बलिदान ही लड़कियों का धर्म होता है | जब तक शादी नहीं हुई तो अपने माँ-पिता की सुनो और शादी के बाद अपने ससुराल वालों की सुनो | एक औरत की ज़िंदगी यहीं निकल जाती है |

