क्यों औरतें अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार की जरूरत को महत्व देती हैं ? - letsdiskuss
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Sneha Bhatiya

Student ( Makhan Lal Chaturvedi University ,Bhopal) | पोस्ट किया |


क्यों औरतें अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार की जरूरत को महत्व देती हैं ?


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Content Writer | पोस्ट किया


औरतें अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार की जरूरतों को महत्व देती हैं, वो ऐसा क्यों करती हैं, इसकी कोई एक वजह नहीं हैं | एक औरत के जीवन में कई ऐसी वजह हैं, जो उसको कई बार अपनी जरूरतों को कम महत्व देने पर मजबूर करती हैं, और कई बार तो महत्व न देने पर मजबूर कर देती हैं | परन्तु सभी महिलाएं ऐसी नहीं होती |

अधिकतर महिलाएं बहुत बचत करने वाली होती हैं | बचत करने के लिए वो उन चीजों में कटौती करती है, जो चीज़ें उनको अपने लिए लेनी होती हैं | अगर कही बहार घूमने जाने के लिए कहा जाये तो वो अक्सर मन कर देती हैं, नहीं जाती, क्योकि उन्हें लगता हैं, फ़िज़ूल खर्चा होगा | कभी कहीं घूमने गए भी तो वो खाने-पीने की चीज़ें नहीं खरीदती क्योकि उन्हें लगता हैं, महंगा है, पैसे ज्याद खर्च हो जाएंगे |

अक्सर ऐसी महिलाएं ये सोच कर अपने लिए कुछ नहीं लेती, क्योकि उन्हें लगता हैं, अगर वो ये चीज़ नहीं लेंगी तो इसके बदले उसके बच्चें कोई दूसरी चीज़ ले लेंगे, या फिर उसको लगता हैं, अपने बच्चों के लिए या अपने परिवार के कुछ ले लेते हैं, अपने लिए दोबारा में ले लुंगी, और अक्सर यही सोचती रह जाती हैं |

बस यही सोच लेकर एक औरत अपनी हर इच्छा को मार देती हैं | एक औरत ये नहीं सोचती की उसका ऐसा करना शायद कहीं का कहीं उसको ही तकलीफ दे रहा हैं | जब एक औरत हर चीज़ के लिए यह कह कर मना कर देती हैं, कि "मुझे नहीं चाहिए" या "ये मुझे अच्छा नहीं लगता " तो उसके परिवार वालों को लगता हैं, कि सच में ये चीज़ उसको नहीं चाहिए, या उसको पसंद नहीं हैं |

अगर एक औरत अपनी इच्छा को यूहीं मारती रहें तो एक वक़्त ऐसा आएगा जब आपके परिवार को ऐसा लगेगा के आपको किसी चीज़ की जरूरत ही नहीं और वो आपसे पूछना ही बंद कर देंगे | अगर उन्होंने आपसे पूछना बंद किया तो फिर आपको ये एहसास होगा कि में अपनों के लिए कितने त्याग किये और इसके बदले मुझे क्या मिला | आपको ऐसा लगेगा कि, किसी को आपकी जरूरत ही नहीं हैं |

मुझे ऐसा लगता हैं, एक औरत को अपनी इच्छा को कम करना चाहिए पर उसको पूरी तरह मार देना सही नहीं हैं |

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Media specialist | पोस्ट किया


 एक लड़की का जब जन्म होता है, तब से लेकर जब तक उसकी शादी नहीं होती तब तक उसके घर वाले उसको बस एक ही बात सीखाते है, ज़िंदगी में सिर्फ बलिदान ही लड़कियों का धर्म होता है | जब तक शादी नहीं हुई तो अपने माँ-पिता की सुनो और शादी के बाद अपने ससुराल वालों की सुनो | एक औरत की ज़िंदगी यहीं निकल जाती है |


- एक लड़की :-

जब एक लड़की अपने घर पर रहती है, तो अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने घर काम भी करती हैं | बेशक उनकी अगले दिन परीक्षा हो परन्तु वो घर का काम पूरा कर के ही पढ़ाई करने बैठती हैं | लड़कियों को अपने माता-पिता की बहुत चिंता होती है |

- एक औरत :-

- जब किसी लड़की की शादी हो जाती है, तब वह अपने ससुराल के साथ-साथ अपने घर वालों की भी चिंता करती है |

- अगर एक औरत नौकरी पर जाती है, तो वो उससे पहले अपने घरवालों के लिए नाश्ता बनाकर जाती है, और अपना भी खाना खुद बनती है |

- घर के किसी सदस्य को कही जाना हो तो घर की औरत उससे पहले जागती है | जिसको जाना है, उसकी तयारी करती है |

- अपने हर काम को पूरा करने के बाद भी उसके मन में हमेशा एक विचार चलता रहता है, कि कही कुछ ग़लती न हो जाएं, जिससे सब नाराज हो जाएं |

- हमेशा अपने लिए कमी करती है, पर अपने बच्चों के लिए कोई कमी नहीं करती |
हमेशा औरतें ही बलिदान देती है, क्योकि वो एक औरत है |

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