या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||
यह मंत्र दुर्गा सप्तशती का है। इस मंत्र से देवी की उपासना की जाती है।
किसी भी मंत्र का जाप करने से देवी या देवता की उपासना तो की ही जाती है इसके अलावा आपको एक अलग ही सुकून का अनुभव भी होता है ।
भक्ति के मार्ग पर चलने वाला हमेशा परमेश्वर से जुड़ा हुआ रहता है।
इस मंत्र का निरंतर जाप करने से मानव की तमाम परेशानिया दूर हो जाती है । परिवार मे खुशियाँ और समृद्धि आती है। मन एकाग्र होता है ।
नवरात्र मे देवी की उपासना करते समय इस मंत्र का जाप करने से कई तरह के काम आसान हो जाते है।
करन राठौर जी, के प्रशनानुआर इस मंत्र का मतलब क्या है तो इसका जवाब है -
जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान है, उनको मेरा नमस्कार , नमस्कार , नमस्कार है।
हमारे वेदो में कहा गया है कि, किसी भी मंत्र का जाप करने से एक विशेष प्रकार की शक्ति उत्पन्न होती हैं। और सिद्धियो का द्वार खुल जाता हैं।
व्यक्ति के अंदर सकारात्मकता आती है और नकारात्मकता दूर होती हैं।
ऐसा माना जाता हैं जब भी हम किसी मंत्र का जाप करते है हमारे मंत्रो के जाप से ध्वनि तरंगे उत्पन्न हो जाती हैं जो शरीर और मन दोनों मे लिए लाभदायक होती हैं।
किसी भी मंत्र का जाप करने से पहले हमे उसके अर्थ को समझना बहुत जरूरी होता है। और अर्थ जानकर हम उस मंत्र को कई गुना ज्यादा मन से उसका उच्चारण करते है और तभी वह मंत्र सिद्ध होता है और फलदायी सिद्ध होता है।
सभी देवी और देवताओ की उपासना के मंत्र अलग अलग है और उनका अर्थ भी अलग अलग होता है लेकिन सभी मंत्रो का जाप फलदायी होता है।



