लेखांकन की सीमाएँ - लेखांकन व्यवसाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है!लेखांकन के द्वारा न केवल व्यवसाय की आर्थिक स्थिति का पता लगता है वरन् यह व्यवसाय के संचालन से हो रहे लाभ या हानि का भी सूचक है!इस कारण लेखांकन की भी कुछ सीमाएँ हैं जो निम्न प्रकार है!
1) नीतियों में परिवर्तन -लेखांकन के अनेक नीतियाँ या एवं विधियाँ हैं!इन नीतियों एवं विधियों में परिवर्तन मात्र से ही व्यवसाय के लाभ -हानि व आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया जा सकता है!
2) अपूर्ण सूचना- लेखांकन द्वारा प्रदर्शित व्यवसाय की आर्थिक स्थिति एवं लाभ -हानि पूर्ण सत्य नहीं होती! व्यवसाय की आर्थिक स्थिति व लाभ -हानि को प्रभावित करने वाले कई ऐसे कारक एवं सूचनाएँ होती हैं जिन्हें लेखांकन में शामिल नहीं किया जाता! लेखांकन के अंतर्गत केवल वे व्यवहार एवं घटनाएँ शामिल की जाती हैं!
लेखांकन की सीमाएं क्या होती है?
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@rajnipatel6804 | Posted on November 18, 2021
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लेखांकन की सीमाएं निम्नलिखित इस प्रकार है - (1) वर्गीकरण(classifying)- जनरल एवं सहायक पुस्तकों में लेखा करने के पश्चात व्यवहारों को वर्गीकृत किया जाता है! एक ही प्रकृति के व्यवहारों को एक जगह एक समूह में खातों में रखने की प्रक्रिया को वर्गीकरण कहते हैं! यह खाते लेजर नामक पुस्तक में खोले जाते हैं!
(2)सारांश निकालना (summarising)-सारांश वर्गीकृत किए गए वित्तीय आंकड़ों को इस प्रकार प्रस्तुत करने की कला है जिसके द्वारा प्रबंधक एवं अन्य पक्ष कार वित्तीय सूचनाओ को समझ सके और उन्हें अपने निर्णय प्रक्रिया में प्रयोग कर सकें,!
(3) संप्रेषण(communication)- लेखांकन सूचनाओं को बाहरी एवं आंतरिक प्रयोगकर्ताओ को उपलब्ध कराना संप्रेक्षण कहलाता है!
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