दोस्तों अपने सनातन धर्म का नाम तो सुना ही होगा पर आपको पता है कि सनातन धर्म होता क्या है अगर नहीं पता है तो चलिए मैं आपको सनातन धर्म के बारे में बताती हूं।
सनातन धर्म- सनातन धर्म दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है ब्राम्हास्मी में और तत्वमासि जिसका अर्थ होता है कि मैं ही ब्रह्मा हूं और यह पूरा जगत ब्रह्म है। सत्य को ही सनातन माना जाता है कहने का मतलब है कि जिसमें सत्य होता है वही सनातन कहलाता है। सनातन धर्म को आदिकाल से शुरू किया गया था और इसका कोई अनंत नहीं है अर्थात यह अनंत काल तक चलेगा। इस प्रकार सनातन धर्म को कहा जाता है कि इसका ना कोई आदि है और न अंत है। सनातन धर्म के माध्यम से ईश्वर के बारे में जानकारी मिलती है इसके साथ ही आत्मा और मोक्ष के बारे में भी जानकारी मिलती है। सनातन धर्म का मूल उद्देश्य पूजा करवाना,जप तप करवाना,दान देना सत्य बोलना,अहिंसा, किसी दूसरे व्यक्ति पर दया करना और उसे क्षमा कर देना इत्यादि है। सनातन धर्म सत्य की राय पर चलने का ज्ञान देता है। सनातन धर्म में शिवजी को,ब्रह्मा जी को और विष्णु जी की पूजा की जाती है। सनातन धर्म मे शिवजी, ब्रह्मा जी, और विष्णु जी ये तीनों देवताओं को आराध्य मानते हैं। सनातन धर्म में भगवान शिव जी की पूजा की जाती है इस कारण सनातन धर्म में ओम को प्रतीक चिन्ह माना जाता है।सनातन धर्म में शास्त्रों की रचना संस्कृत भाषाओं में की गई है।सनातन धर्म शब्द का प्रयोग सबसे पहले अर्जुन द्वारा किया गया था इसलिए सनातन धर्म का ज्ञान गीता से मिलता है। इसके अतिरिक्त महाभारत से भी सनातन धर्म का ज्ञान मिलता है। सनातन धर्म का ज्ञान केवल महाभारत और गीता में ही मिलता है इसके अलावा किसी भी वेद या पुराण में सनातन धर्म को नहीं लिखा गया है।




