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Anushka

Updated on Feb 22, 2024others

भगवान गणेश किस चीज़ के प्रतिक हैं ?

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Answered on Feb 21, 2024

चलिए मैं आपको बताती हूं कि भगवान गणेश किस चीज के प्रतीक है :-

जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे हिंदू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है। सभी देवताओं में केवल गणेश जी ही ऐसे भगवान है जिन्हें  प्रथम पूज्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इतना ही नहीं हिंदू धर्म में किसी भी कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा के बिना नहीं होती है।

 शास्त्रों में स्वास्तिक चिन्ह भगवान गणेश जी का प्रतीक माना गया  है। इसलिए जब भी किसी नए सामान को खरीद कर घर लाया जाता है तो उस पर रोली बांधकर और स्वास्तिक चिन्ह बनाकर पूजन करने के बाद ही उसका प्रयोग किया जाता है। वहीं स्वास्तिक को किसी भी मंगल कार्य शुरू करने से पहले बनाया जाता है। इसके अलावा किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए बनाए जाने वाले पत्र जैसे की विवाह पत्र, व्यापारियों के खाते के साथ-साथ कई जगहों पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। यही वजह है कि भगवान गणेश जी को स्वास्तिक का प्रतीक माना जाता है।

 

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सभी कार्यों में मिलेगी सफलता:-

आपने देखा होगा कि किसी भी बड़े अनुष्ठान या हैवान से पहले स्वास्तिक चिन्ह निश्चित रूप से बनाया जाता है। क्योंकि स्वास्तिक चिन्ह को सुभिता का प्रतीक होने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा कभी संचार करता है। मैं आपको बता दूं कि स्वास्तिक की चार भुजाओं को गणेश जी की चार भुजाओं का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा स्वास्तिक के चारों बिंदु चारों पुरुषार्थ, धर्म,अर्थ,काम एवं मोक्ष के प्रतीक है। वही भुज के समीप दोनों रेखाएं गणेश जी की दोनों पत्नियों  अर्थात रिद्धि और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। और उनके आगे की दो रेखाएं उनके दोनों पुत्र योग और क्षेम का प्रतीक माना जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि स्वास्तिक चिन्ह भगवान गणेश के पूरे परिवार का प्रतीक माना जाता है।

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Answered on Feb 22, 2024

भगवान गणेश जी का प्रतीक चिह्न स्वस्तिक माना जाता है। गणेशजी प्रथम पूज्य देवता माने गये हैं, इसी वजह से गणेश भगवान के पूजन की शुरुआत में स्वस्तिक बनाने की परंपरा चलती आ रही है। गणेश भगवान का स्वस्तिक चिन्ह बनाकर पूजा करने से सभी धर्म-कर्म सफल होते हैं और जिन मनोकामनाओं के लिए हम पूजा करते है वे सारी इच्छाएं गणेश भगवान पूरी करते हैं।

पौराणिक कथाओ के अनुसार ज़ब सभी देवी-देवताओं के बीच इस बात का विवाद हुआ कि धरती पर सबसे पहले किस देवता का पूजन किया जाना चाहिए तो सभी देवता स्वयं क़ो एक-दूसरे से श्रेष्ठ बताने लगे।सभी देवताओं के बीच हो रहे विवाद को देखकर नारद जी ने देवी -देवताओं क़ो भगवान शिव की शरण में जाने की सलाह दें दिये।

सभी देवी -देवता भगवान शिव के पास पहुंचे तो सभी ने अपनी स्थितियों के बारे में बताया तो भगवान शिव ने देवताओं के इस विवाद क़ो देखते हुए विवाद क़ो सुलझाने के लिए एक योजना बनायी।भगवान शिव ने प्रतियोगिता आयोजित किया इस प्रतियोगिता के मुताबिक सभी देवताओं को अपने-अपने वाहन पर बैठकर पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर सबसे पहले पृथ्वी लोक पर वापस आएगा उसे ही धरती पर प्रथम पूजनीय देवता माना जाएगा।

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भगवान​ शिव की बात का अनुसरण करने के बाद सभी देवीं -देवता अपना-अपना वाहन लेकर ब्रह्माण्ड की परिक्रमा के लिए निकल गये और इस प्रतियोगिता में गणेश जी भी हिस्सेदारी थे। गणेश जी का सवारी चूहा था,गणेश जी ने सोचा पुरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने की बजाय मै अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की सात फेरे लगाकर परिक्रमा करके, उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

तभी सभी देवी -देवता ब्रह्मांडका परिक्रमा करके पृथ्वी लोक आये तो उन्होंने देखा कि गणेश जी वही थे, तो सभी देवताओं ने सोचा चूहें सवारी से ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर कैसे इतनी जल्दी वापस आ गये तो तभी शिव जी बताया कि गणेश पुत्र ने माता पार्वती और भगवान शिव के चारों ओर 7परिक्रमा करके उन्होंने ब्रह्मांड लोक स्थान प्राप्त किया है। भगवान शिव के निर्णय से सभी देवी -देवता खुश हुए और तभी से गणेश भगवान क़ो प्रथम पूजनीय देवता माना जाने लगा और साथ ही गणेश भगवान क़ो स्वस्तिक चिन्ह का प्रतीक भी दिया गया, ज़ब भी कोई पूजा होंगी भगवान गणेश के पूजा के साथ स्वसतिक भी बनाया जाएगा।

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