चलिए मैं आपको बताती हूं कि भगवान गणेश किस चीज के प्रतीक है :-
जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे हिंदू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है। सभी देवताओं में केवल गणेश जी ही ऐसे भगवान है जिन्हें प्रथम पूज्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इतना ही नहीं हिंदू धर्म में किसी भी कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा के बिना नहीं होती है।
शास्त्रों में स्वास्तिक चिन्ह भगवान गणेश जी का प्रतीक माना गया है। इसलिए जब भी किसी नए सामान को खरीद कर घर लाया जाता है तो उस पर रोली बांधकर और स्वास्तिक चिन्ह बनाकर पूजन करने के बाद ही उसका प्रयोग किया जाता है। वहीं स्वास्तिक को किसी भी मंगल कार्य शुरू करने से पहले बनाया जाता है। इसके अलावा किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए बनाए जाने वाले पत्र जैसे की विवाह पत्र, व्यापारियों के खाते के साथ-साथ कई जगहों पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। यही वजह है कि भगवान गणेश जी को स्वास्तिक का प्रतीक माना जाता है।

सभी कार्यों में मिलेगी सफलता:-
आपने देखा होगा कि किसी भी बड़े अनुष्ठान या हैवान से पहले स्वास्तिक चिन्ह निश्चित रूप से बनाया जाता है। क्योंकि स्वास्तिक चिन्ह को सुभिता का प्रतीक होने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा कभी संचार करता है। मैं आपको बता दूं कि स्वास्तिक की चार भुजाओं को गणेश जी की चार भुजाओं का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा स्वास्तिक के चारों बिंदु चारों पुरुषार्थ, धर्म,अर्थ,काम एवं मोक्ष के प्रतीक है। वही भुज के समीप दोनों रेखाएं गणेश जी की दोनों पत्नियों अर्थात रिद्धि और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। और उनके आगे की दो रेखाएं उनके दोनों पुत्र योग और क्षेम का प्रतीक माना जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि स्वास्तिक चिन्ह भगवान गणेश के पूरे परिवार का प्रतीक माना जाता है।



