यदि कोई बालिग मर्द तथा औरत रमजान के महीने मे रोजा नही रखते तो गुनहगार माना जाता है। लेकिन वही कुरान और हदीस में प्रत्येक बालिग मर्द तथा औरत का रमजान के महीने मे रोजा रखना चाहिए लेकिन कुछ लोग बीमार होते हैं तथा ज्यादा वृद्ध अवस्था होने के कारण उनके शरीर में रोजा रखने की क्षमता नहीं होती है, तो उन लोगो क़ो रोजा न रखने की पूरी छूट होती है।
वही 1-2 साल के छोटे बच्चो,प्रेग्नेंट महिलाओं को रोजा न रखने की पूरी छूट अल्लाह की तरफ से होती है।रोजा न रखने के कारण प्रेगेनेट महिलाओ क़ो अल्लाह से माफ़ी मांग लेनी चाहिए और अल्लाह उन्हें माफ भी कर देता है।
जो व्यक्ति बीमार होने के कारण 30 दिन रोजा नहीं रख सकते है वह व्यक्ति 60 गरीबों को सुबह, शाम दोनों टाइम खाना खिलाये या फिर 60 गरीबों को अनाज दान दे सकते है।
वही जिन महिलाओ क़ो रमजान के महीने मे मासिक धर्म आना शुरू हो जाता है तो उन लोगो क़ो रोजा न रखने की छूट होती है।लेकिन मासिक धर्म जितने दिन रहता है उतने दिन ही महिलाओ क़ो रोजा न रखने की छूट होती है, उसके बाद जैसे ही मासिक धर्म खत्म होते ही महिलाएं रोजा रख सकती है।
वही कुछ ऐसे लोग भी होते है जो शारीरिक, मानसिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद भी रमजान के महीने मे रोजा नहीं रखते है।ऐसे व्यक्तियों क़ो अल्लाह के गुनहगार माने जाते है और ऐसे लोगो क़ो जहन्नुम कभी नसीब होता है। साथ ही ऐसे लोग जो रोजा नहीं रखते है और रमजान के महीने मे शराब, सिगरेट, मांस खाते है उन्हें अल्लाह कभी माफ नहीं करता है। बाद मे ऐसे लोग मस्जिद मे जाकर नमाज, कुरान पढ़ते है तो उनकी कोई भी दुआ अल्लाह कुबूल नहीं करता है, ऐसे लोग अल्लाह के गुनहगार माने जाते है।






