क्रोना वायरस ने पूरी दुनिया को कवारंटीन करके रखा हुआ है. 22 मार्च को 14 घंटों के लिए जनता कर्फ्यू की घोषणा कर दी जाती है, लोगों को लगा कर मात्र 1 दिन की तो बात है उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को 21 दिनों के लिए पूरे देश को लॉकडाउन रहने का आदेश दिया. फिर सभी को लगता है कि 21 दिनों की तो बात है फिर उसके बाद 14 अप्रैल सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन की अवधि को आगे बढ़ाकर 3 मई करने का फैसला लिया.
अभी की बात की जाए तो पूरा देश इस वक्त मुश्किल हालातों में पहले ही गुजर रहा है और सबसे ज्यादा जिनको परेशानी हो रही है वह प्रवासी लोगों को हो रही है. सबसे ज्यादा दिक्कत होगी तो आम जनता को ही होगी सरकार ने वसूलना तो हम लोगों से ही हैं
अवधि बढ़ाई जाने के बाद कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.लोग सरकार की असुविधाओं की वजह से पैदल अपने घर की ओर निकल पड़े हैं इतनी गर्मी होने के बावजूद वह कई ह़जार किलोमीटर का सफर पैदल तय कर रहे हैं. देखा जा रहा है कि जो लोग पैदल अपने घर को निकल पड़े हैं उनमें से कई लोग तो रास्ते में ही किसी ट्रक वर्क के नीचे आकर मर जा रहे हैं जो लोग वाहनों से आ रहे हैं वह लोग एक्सीडेंट का शिकार हो जा रहे ह एक्सीडेंट से होने वाली मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
अगर लाकडाउन 3 महीने तक बढ़ा दिया जाता है तो सबसे ज्यादा दिक्कत होगी उन लोगों को होगी जे लोग पैदल अपने घर निकल रहे हैं इस वक्त गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि घर में रहते रहते ही मन उफलने लगता है सोचे वह लोग जो हजार किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पैदल तय कर रहे हैं वह लोग कैसे रहेंगे.
अवधि बढ़ाए जाने के बाद उन लोगों का क्या जो लोग प्रतिदिन की कमाई पर ही निर्भर रहते थे उन लोगों कि सोचने वाला कोई भी नहीं है वह लोग कैसे रहेंगे उनके पास तो पैसे भी नहीं है घर का राशन कैसे चलाएंगे.
1 महीने की बंदी में ही कई राज्यों के सरकारों के पसीने छूट गए.उनके पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं था सरकार ने लाकडाउन में ढील सबसे पहले शराब की बिक्री को दी और कई राज्यों ने तो 70% एमआरपी टेक्स् भी लगा दिया ताकि राज्य की सरकार अपना खजाना भर सके और कर्मचारियों को पैसे देने की कोई दिक्कत ना हो. सोचिए अगर 3 महीने लाकडाउन बढ़ जाता है फिर क्या हालात पैदा हो जाएंगे
3महीने की अवधि बढ़ने के बाद देश की अर्थव्यवस्था बिल्कुल ही डगमगा जाएगी हालांकि डगमगाई तो हुई है देश में भुखमरी छा जाएगी रोजगार तो वैसे भी नहीं था पूरा देश बेरोजगार हो जाएगा.
अगर इनमें से फायदे की बात की जाए तो एक ही फायदा है वह है प्रदूषण का कम होना.ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरा कम हो गया है वातावरण एकदम मनमोहक हो चुका है.