कुचला (Strychnos nux-vomica) एक सदाबहार और अत्यधिक विषैला औषधीय पौधा है, जिसके बीजों में स्ट्राइकिनीन (Strychnine) नामक घातक जहर पाया जाता है। यदि कोई व्यक्ति इसके बीजों को बिना शुद्ध किए या अधिक मात्रा में खा लेता है, तो यह सीधे उसके तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है। इसके दुष्प्रभाव से पूरे शरीर में तेज ऐंठन और झटके आने लगते हैं, मांसपेशियां अत्यधिक कठोर और अकड़ जाती हैं, और श्वसन तंत्र पंगु होने के कारण सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगती है। इसके अलावा पेट में भयानक दर्द, मरोड़ और उल्टी जैसी समस्याएं भी शुरू हो जाती हैं। अत्यधिक विषैला होने के कारण सही समय पर इलाज न मिलने पर इसके सेवन से इंसान या पशु की मृत्यु होना तय माना जाता है।
आयुर्वेद और होमियोपैथी (Nux-vomica) में इसका उपयोग केवल एक विशेष शुद्धिकरण प्रक्रिया (कुचला शोधन) के बाद बहुत ही सीमित मात्रा में किया जाता है। शुद्ध होने के बाद इसका इस्तेमाल पक्षाघात (लकवा), गठिया का दर्द, नसों की कमजोरी और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं बनाने में होता है। चूंकि यह एक खतरनाक और जानलेवा जहर है, इसलिए आम लोगों को सख्त हिदायत दी जाती है कि वे इसका कभी भी घरेलू उपयोग या सीधे सेवन न करें; इसका प्रयोग केवल किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।
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