सुखी होना और सुखी होने का दिखवा करना दोनों अलग -अलग बाते होती है,पापी मनुष्य सुखी होने का दिखवा करते है लेकिन असल मे सुखी होते नहीं है। पापी मनुष्य बोलता है कि उसके पास 50 करोड़ का मकान है,उसके जिंदगी मे सारे सुख के साधन मौजूद है,लेकिन पापी मनुष्य हज़ार कोशिश करने के बाद नींद नहीं आती है क्योकि उसे आपने सम्पति के चोरी होने के डर बना रहता है लेकिन दूसरी तरफ एक सामान्य मनुष्य खाना खाकर बिस्तर पर लेटने के 15 मिनट बाद सो जाता है,इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सामान्य जीवन जीने वाला मनुष्य, पापी मनुष्य से ज्यादा सुखी रहता है।





काम में ध्यान देता है और कभी भी इस संजीदगी से सोचता नहीं है कि उसने कोई गलत काम किया है. जब तक कानूनी रूप से उसे कोई सजा नहीं मिल जाती है। इसलिए पापी इंसान भी सुखी रहता है। जबकि इसके विपरीत अच्छा काम करने वाला इंसान सदैव मेहनत करता है और इस बात की चिंता नहीं करता है कि वह सुखी है कि दुखी क्योंकि सुख और दुख दोनों जीवन के पहलू होते हैं। वास्तव में जो अंदर से सुखी है वही इमानदार इंसान है।