Krishna Patel
Krishna Patel· 4 years ago
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पापी मनुष्य सुखी क्यों रहते हैं?

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सुखी होना और सुखी होने का दिखवा करना दोनों अलग -अलग बाते होती है,पापी मनुष्य सुखी होने का दिखवा करते है लेकिन असल मे सुखी होते नहीं है। पापी मनुष्य बोलता है कि उसके पास 50 करोड़ का मकान है,उसके जिंदगी मे सारे सुख के साधन मौजूद है,लेकिन पापी मनुष्य हज़ार कोशिश करने के बाद नींद नहीं आती है क्योकि उसे आपने सम्पति के चोरी होने के डर बना रहता है लेकिन दूसरी तरफ एक सामान्य मनुष्य खाना खाकर बिस्तर पर लेटने के 15 मिनट बाद सो जाता है,इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सामान्य जीवन जीने वाला मनुष्य, पापी मनुष्य से ज्यादा सुखी रहता है।

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S
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Mp

Answered on05/28/23
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ज्यादा तो नही पता पर ऐसा लगता है की भगवान भी नही चाहते की अच्छे लोगो द्वारा पाप हो। इसलिए जब भी अच्छे इंसान द्वारा कुछ गलत होता है तो भगवान उसको उसके किए की सजा देकर उसको फिर अच्छा करने पर मजबूर कर देता है जिससे वो गलत रास्ते पर जाने से बच जाए ।लेकिन पापी इंसान को एक भी मौका नहीं देना चाहता ।जिससे उसके पाप का घड़ा जल्दी भरे और उसको उसके किए की सजा मिल जाए।

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Anita  Pandey
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Updated on12/23/25
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क्या आप जानते हैं कि पापी मनुष्य हमेशा सुखी क्यों होता है चलिए हम आपको इसकी जानकारी देते हैं। दरअसल पापी मनुष्य सुखी नहीं होता बल्कि वह सुखी होने का दिखावा करता है और पापी मनुष्य सुखी रह भी कैसे सकता है यदि आपको किसी के साथ गलत करते हैं तो आपके साथ भी गलत होगा जिस वजह से आप कभी भी खुश नहीं रह सकेंगे हां लेकिन पापी मनुष्य दूसरों के साथ छल कपट करके सुखी रह सकता है लेकिन ज्यादा दिन तक नहीं एक ना एक दिन उसके पाप के घड़े भर जाएंगे और वह नरक में अवश्य जाएगा।

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Krishna Patel
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Answered on06/03/23
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पापी मनुष्य इसलिए सुखी रहते क्योंकि उन्हें पाप और पुण्य से कुछ लेना देना नहीं होता है। वह जो भी काम करते हैं, उसे सही और गलत के दायरे में पहचान नहीं करते हैं। असल में उन्हें इस बात का अहसास ही नहीं होता है कि वह जो कर रहे हैं उसका बुरा फल भी मिल सकता है। इसलिए वे अपने जीवन में सुखी ही रहते हैं क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता नहीं होती उनके किए से उनको कोई पछतावा हो रहा है। जैसे ही इंसान पाप और पुण्य के बारे में सोचता है और कोई गलत काम करता है तब वह मनोवैज्ञानिक रूप से परेशान होता है और अच्छे काम करने के लिए प्रेरित होता है। वहां अपने Letsdiskussकाम में ध्यान देता है और कभी भी इस संजीदगी से सोचता नहीं है कि उसने कोई गलत काम किया है. जब तक कानूनी रूप से उसे कोई सजा नहीं मिल जाती है। इसलिए पापी इंसान भी सुखी रहता है। जबकि इसके विपरीत अच्छा काम करने वाला इंसान सदैव मेहनत करता है और इस बात की चिंता नहीं करता है कि वह सुखी है कि दुखी क्योंकि सुख और दुख दोनों जीवन के पहलू होते हैं। वास्तव में जो अंदर से सुखी है वही इमानदार इंसान है।

और पढ़े- अकेले रहते हुए भी कैसे सुखी बनाये अपना जीवन?

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Rinki Pandey
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Answered on03/15/22
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यह एक बहुत ही गहरा और दार्शनिक प्रश्न है जो अक्सर लोगों के मन में आता है। हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर श्रीमद्भगवद्गीता और गरुड़ पुराण में इसका तार्किक उत्तर दिया गया है।

पापी मनुष्य के सुखी दिखने के मुख्य कारण:

  • संचित कर्म (Accumulated Karma): मनुष्य का वर्तमान सुख उसके वर्तमान कार्यों पर नहीं, बल्कि उसके पिछले जन्मों या अतीत के संचित 'पुण्य कर्मों' पर आधारित होता है। जब तक उसके पुण्यों का बैंक बैलेंस खत्म नहीं होता, तब तक वह ऐश्वर्य और सुख भोगता रहता है।
  • प्रारब्ध का फल: जैसे ही उस व्यक्ति के पुराने पुण्य समाप्त होते हैं, उसके वर्तमान 'पाप कर्म' प्रभावी होने लगते हैं। प्रकृति का नियम है कि "जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।" सुख की यह अवधि केवल एक अस्थायी भ्रम है।
  • परीक्षा और मोह: कई बार भौतिक सुख मनुष्य को अहंकारी बना देते हैं, जिससे वह अपने विनाश की ओर तेजी से बढ़ता है। बाहरी सुख का मतलब आंतरिक शांति नहीं होता।

निष्कर्ष: शास्त्रों के अनुसार, अन्याय से अर्जित सुख की उम्र बहुत छोटी होती है। अंततः कर्म का फल सबको भुगतना पड़ता है, चाहे वह इस जन्म में हो या अगले। इसलिए, दूसरों की भौतिक संपन्नता को देखकर विचलित होने के बजाय अपने सत्कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।

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R
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Answered on03/09/26
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