श्रृंगार रस के बारे में तो आप सभी ने पढ़ा ही होगा इसलिए आपको श्रृंगार रस के बारे में जानकारी तो होगी ही यदि आपको इसकी जानकारी है तो अच्छी बात है और यदि जिन लोगों को श्रृंगार रस की जानकारी नहीं है तो आज मैं उन लोगों को श्रृंगार रस की पूरी जानकारी देना चाहूंगी।
आप जानना चाहते हैं कि श्रृंगार रस का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है तो मैं आपको श्रृंगार रस का उदाहरण तो बताऊंगी ही लेकिन इससे पहले मैं आपको श्रृंगार रस की परिभाषा बताना चाहूंगी:-
श्रृंगार रस की परिभाषा:-
जहां नायक और नायिका की अथवा महिला पुरुष के प्रेम पूर्वक श्रेष्ठाओं क्रियाकलापों का श्रेष्ठाक वर्णन होता है। तो वहां श्रृंगार रस होता है। जब विभाव अनुभाव और व्यभिचारी के संयोग से रति नामक स्थाई भाव रस रूप से परिणत होता है। उसे ही श्रृंगार रस कहा जाता है। मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि श्रृंगार रस को रसराज यानी कि रसों का राजा भी कहा जाता है।
चलिए अब मैं आपको श्रृंगार रस का सबसे अच्छा उदाहरण बताती हूं:-
(1) मेरे तो गिरधर गोपाला, दूसरों ना कोई।
जाके सिर मोर मुकुट,मेरो पति सोई।
(2) गोपी ग्वाल गाई गो सुत सब,
अति ही दीन बिचारे।
सूरदास प्रभु बिनु यौ देखियत,
चंद बिना ज्यों तारे।
इस प्रकार मैंने आपको यहां पर श्रृंगार रस का एक बहुत ही अच्छा उदाहरण दिया है। मुझे उम्मीद है कि मेरे द्वारा दी गई जानकारी आपको अवश्य पसंद आएगी।
चलिए अब मैं आपको श्रृंगार रस के प्रकार बताती हूं:-
दोस्तों श्रृंगार रस दो तरह के होते हैं।
पहला संयोग श्रृंगार रस
दूसरा वियोग श्रृंगार रस।
संयोग श्रृंगार रस की परिभाषा:-
मैं आपको बताना चाहूंगी कि संयोग काल में नायक और नायिका के बीच प्रेम और रति का मिलन ही संयोग श्रृंगार रस कहलाता है।
अब मैं आपको वियोग श्रृंगार रस की परिभाषा बताऊंगी :-
एक दूसरे के प्रेम में अनुरक्त नायक एवं नायिका के मिलन का अभाव वियोग श्रृंगार रस होता है।


