क्या आपने कभी देखा या सुना है कि एक ऋषि ऐसे भी थे जिन्होंने अपनी बेटी से शादी की है । शायद यह बात आपको बहुत हैरान कर सकती है कि कैसे कोई ऋषि अपनी बेटी से शादी कर सकता है ।
आपको बता दें कि यह बात इतिहास से जुड़ी हुई है । ऋषि अगस्त्य ने जब सतयुग में सभी देवताओं की जान खतरे में थी,तब सात समुद्र का पानी पीने वाले अगस्त्य ऋषि ने अपनी ही बेटी से शादी कर ली थी। लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों किया इसके बारे में कोई नही जानता आइए आज हम इसके बारे में बताते है ।

आपको बता दें जब ऋषि अगस्त्य ने अपने तपोबल से सभी गुणों से संपन्न एक नवजात लड़की का निर्माण किया। लेकिन तभी इनको पता चला कि विदर्भ में एक राजा अपनी संतान प्राप्ति के लिए तप कर रहा है। तभी उन्होंने उस विदर्भ के राजा को अपने इस नवजात और सर्वगुण संपन्न पुत्री को गोद दे दिया था।
इसके बाद जब इनकी पुत्री जवान हुई तो अगस्त्य ऋषि ने विदर्भ के राजा से उस कन्या का हाथ मांग लिया। तब राजा ने भी बिना कुछ कहे और ज्यादा विचार विमर्श किए ऋषि अगस्त्य को उन्हीं की पुत्री का हाथ दे दिया। क्योंकि वह भी जानते थे, अगर वे ऐसा करने से इंकार कर देते तो ऋषि अगस्त्य उनको अपने खतरनाक शाप से भस्म कर देते। इसीलिए राजा ने ऋषि अगस्त्य से इनकार नहीं किया तब ऋषि अगस्त्य ने अपनी ही पुत्री से शादी कर ली। और उनके साथ यौन संबंध बनाने शुरू कर दिए।

उनकी पुत्री ने भी उनके साथ अपनी इच्छा से यौन संबंध बनाए। लेकिन उनकी पुत्री ने उनके सामने एक शर्त रखी थी, कि उनको एक विशेष प्रकार की जगह पर ही यौन संबंध बनाने हैं, तो फिर ऋषि अगस्त्य ने उनकी उस शर्त को भी पूरा किया था और उनके साथ संबंध बनाए ।
यह सब हो जाने के बाद इन दोनों को दो संतानों की प्राप्ति हुई। अगर बात करें ऋषि अगस्त्य की शादी की तो उस समय मनुष्य आत्मा को देखते थे, ना कि रिश्ते की मर्यादा को।