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Himani Saini· 2 years ago
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बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है

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Answered on09/28/26

बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के मूड, ऊर्जा, नींद और दैनिक गतिविधियों में काफी बदलाव हो सकते हैं। इसमें व्यक्ति को कभी बहुत अधिक उत्साह या ऊर्जा महसूस हो सकती है, जबकि दूसरे समय में वह उदासी, थकान या निराशा का अनुभव कर सकता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर में मुख्य रूप से मैनिक या हाइपोमैनिक एपिसोड और डिप्रेसिव एपिसोड देखे जा सकते हैं।

मैनिक एपिसोड के दौरान व्यक्ति में बहुत अधिक ऊर्जा, कम नींद की आवश्यकता, तेज़ी से बोलना, विचारों का तेजी से आना, अत्यधिक आत्मविश्वास या कभी-कभी impulsive फैसले लेने जैसी चीजें दिखाई दे सकती हैं।

डिप्रेसिव एपिसोड में व्यक्ति उदास या खाली महसूस कर सकता है, ऊर्जा और रुचि कम हो सकती है, ध्यान लगाने में कठिनाई हो सकती है और रोज़मर्रा के काम भी मुश्किल लग सकते हैं।

हर व्यक्ति में बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण और उनकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है। यह कहना सही नहीं है कि बाइपोलर डिसऑर्डर वाला व्यक्ति हमेशा मूडी या अस्थिर रहता है। उचित उपचार और नियमित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल से कई लोग अपने लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं और सामान्य, सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

यदि किसी व्यक्ति में मूड में बार-बार या बहुत अधिक बदलाव दिखाई देते हैं, तो स्वयं निदान करने के बजाय मनोचिकित्सक से परामर्श लेना उचित होता है।

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Answered on03/18/24

आज की खराब दिनचर्या से हर व्यक्ति पीड़ित है। वह ना तो समय पर खाना खा पाता है और ना ही अपने लिए सुकुन के कुछ पल निकाल पाता । 

ऐसे मे वह व्यक्ति किसी ना किसी मानसिक रोग का शिकार हो ही जाता हैं। 

कई व्यक्ति अपनी समस्याओं , अपनी परेशानियों, सुख, दुख को किसी के साथ साझा नही करते और नतीजा मानसिक रोग का रूप ले लेता है। 

उन्ही मानसिक रोगों मे से एक का नाम बाइपोलर डिसऑडर। 

 

यह एक ऐसा मानसिक रोग है जिसमे व्यक्ति दो हिस्सों मे बट जाता है। कभी वह खुद को सुखी व्यक्ति, ऊर्जा से भरा हुआ तनाव से मुक्त, हर कामो को करने व्यक्ति समझता है तो कभी वह थका , हारा हुआ व्यक्ति,  तनाव से भरा हुआ महसूस करता है। 

इस मानसिक रोग मे अकसर व्यक्ति गलत तरह की मानसिकता जैसे  आत्महत्या, नशीले पदार्थो का सेवन  जैसे विचारो की और आगे बढ़ता है। 

इस डिसओर्डर मे नींद मे कमी आ जाती है, वजन अचानक कम या ज्यादा हो जाता हैं , व्यवहार मे परिवर्तन होने लगता हैं। विशेषज्ञो के अनुसार यह मानसिक रोग आनुवंशिक ज्यादा होता है। जैसे पीढी मे किसी को यदि यह रोग है तो नई जन्मी पीढी मे यह रोग होने की संभावना 40% तक बढ़ जाती है। माँ -  बाप को यदि यह रोग है तो बच्चा भी इस रोग से ग्रसित हो सकता हैं।

यह डिसओर्डर का कोई संभव ईलाज नही है। मरीज की उचित देखभाल ही इसका ईलाज माना गया है। 

हर साल लगभग इस बाइपोलर डिसओर्डर से 150 से अधिक लोग ग्रसित होते है और उन मे से केवल 60 से 70% मरीजो का भी ईलाज नही हो पाता। 

यह मानसिक रोग की जानकारी के लिए हर साल 30 मार्च को वर्ल्ड बाइपोलर डिसओर्डर डे मनाया जाता है। 

 

 

 

 

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