बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के मूड, ऊर्जा, नींद और दैनिक गतिविधियों में काफी बदलाव हो सकते हैं। इसमें व्यक्ति को कभी बहुत अधिक उत्साह या ऊर्जा महसूस हो सकती है, जबकि दूसरे समय में वह उदासी, थकान या निराशा का अनुभव कर सकता है।
बाइपोलर डिसऑर्डर में मुख्य रूप से मैनिक या हाइपोमैनिक एपिसोड और डिप्रेसिव एपिसोड देखे जा सकते हैं।
मैनिक एपिसोड के दौरान व्यक्ति में बहुत अधिक ऊर्जा, कम नींद की आवश्यकता, तेज़ी से बोलना, विचारों का तेजी से आना, अत्यधिक आत्मविश्वास या कभी-कभी impulsive फैसले लेने जैसी चीजें दिखाई दे सकती हैं।
डिप्रेसिव एपिसोड में व्यक्ति उदास या खाली महसूस कर सकता है, ऊर्जा और रुचि कम हो सकती है, ध्यान लगाने में कठिनाई हो सकती है और रोज़मर्रा के काम भी मुश्किल लग सकते हैं।
हर व्यक्ति में बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण और उनकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है। यह कहना सही नहीं है कि बाइपोलर डिसऑर्डर वाला व्यक्ति हमेशा मूडी या अस्थिर रहता है। उचित उपचार और नियमित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल से कई लोग अपने लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं और सामान्य, सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति में मूड में बार-बार या बहुत अधिक बदलाव दिखाई देते हैं, तो स्वयं निदान करने के बजाय मनोचिकित्सक से परामर्श लेना उचित होता है।


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