
दोस्तों हर एक धर्म के अपने-अपने नियम होते हैं जिनकी जानकारी हम उनके धर्म ग्रंथो से लगा सकते हैं। प्राचीन धर्म ग्रंथो में धर्म से जुड़े हर एक विषय की जानकारी विस्तारपूर्वक सटीक रूप से दी रहती है लेकिन धर्म ग्रंथो को पढ़ने का वक्त सभी लोगों के पास नहीं होता है। ऐसे में अगर आप भी इस्लाम धर्म से जुड़े विषयों को जानने में रुचि रखते हैं लेकिन आपके पास इस्लामिक धर्म ग्रंथ यानी कि कुरान को पढ़ने का वक्त नहीं है तो आप हमारे इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़े।
आज के इस आर्टिकल में हम एक इस्लामी प्रथा की बात करने वाले हैं जिसका नाम हलाला है। मुस्लिम में हलाला किसे बोलते हैं इस धर्म विषय के पूरी सटीक जानकारी आपको इस आर्टिकल पूरा पढ़ने के बाद मिल सकता है। अतः आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़े। हलाला साधारण तौर पर एक इस्लामी प्रथा है। यह हलाला प्रथा केवल मुस्लमानो में लागू है। हलाला प्रथा का हिंदू धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि समय के साथ-साथ हलाला प्रथा मुस्लिम समाज से धीरे-धीरे कम हो रहा है। दरअसल मुस्लमानो में तीन तलाक का नियम है यानी कि पति अपनी पत्नी को केवल तीन बार तलाक बोलकर तलाक दे सकता है और अपने पति पत्नी के रिश्ते को खत्म कर सकता है। तीन तलाक का ज़िक्र इस्लामी धर्म ग्रंथो में भी मिलता है। इस्लामी धर्म ग्रंथो के मुताबिक तलाक को बहुत बड़ा जुर्म माना गया है। कोई भी पति किसी भी छोटी लड़ाई या अपने पत्नी से रूठ कर उसे आसानी से तीन बार तलाक बोलकर तलाक देने का दुस्साहस ना करे इसलिए यह हलाला प्रथा को बनाया गया है। हलाला प्रथा का जिक्र इस्लामिक धर्म ग्रंथो में भी मिलता है।
हलाला प्रथा के मुताबिक पति जब अपनी पत्नी को तीन बार तलाक देता है तो फिर वह अपनी पत्नी से वापस तब तक शादी नहीं कर सकता या फिर कोई संबंध नहीं बना सकता जब तक उसकी पत्नी किसी अन्य पुरुष से निकाह और शारीरिक संबंध नहीं बना लेती। निकाह के बाद उस पुरुष से तलाक लेकर स्त्री फिर अपने पहले पति से निकाह कर सकती है। अन्य पुरुष से निकाह के बगैर और शारीरिक संबंध बनाए बग़ैर अगर स्त्री अपने पहले पति से तलाक के बाद वापस निकाह करती है तो इसे बहुत बड़ा जुर्म माना गया है और इसकी सजा जहन्नुम तय की गई है। पहले पति से तलाक होने के 3 महीने के पश्चात् ही स्त्री किसी अन्य पुरुष से निकाह कर सकती है। हलाला प्रक्रिया इस्लामी शरीयत में मान्य है और इस प्रक्रिया का उपयोग विवाह संबंधों के केवल विशेष मामलों में ही किया जाता है।
किसी अन्य पुरुष से निकाह करके उससे शारीरिक संबंध बनाने और फिर तीन तलाक की प्रक्रिया से उस रिश्ते को खत्म करके अपने पहले पति से पुनः निकाह करने की प्रक्रिया को ही मुस्लिम में हलाला बोलते हैं। कई लोग इस हलाला प्रथा को मुसलमान औरतों के लिए अत्याचार बताते हैं तो कई लोगों का मानना है हलाला प्रथा से मुस्लिमऔरतों को कोई एतराज नहीं है बल्कि वह अपनी खुशी से हलाला प्रक्रिया को अपनाती है और अन्य पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाती है तथा हलाला प्रक्रिया के कारण ही पुरुषों में भी महिलाओं को तीन तलाक न देने का खौफ़ बना रहता है।
