दोस्तों प्रकाश के बारे में तो हम सब जानते हैं। साधारण तौर पर प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है। प्रकाश एक ऐसी ऊर्जा है जो हमें अपने आसपास के चीजों को देखने में मदद करती है। बिना प्रकाश के हम अंधेरे में चीजों की सही जानकारी नहीं कर सकते। प्रकाश एक ऐसा विकिरण है जो हमारे आंखों में दृष्टि संवेदना को उत्पन्न करता है और जिसके कारण हम चीजों को देख पाते हैं। सरल शब्दों में कहें तो प्रकाश विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम का वह भाग है जिसे मनुष्य की आंखों द्वारा देखा जा सकता है उसे ही प्रकाश कहते हैं। प्रकाश फोटोन से मिलकर बना होता है। भौतिक विज्ञान की शाखा ऑप्टिक्स का अध्ययन करके आप प्रकाश के गुण, व्यवहार और प्रकाश के प्रभाव के बारे में विस्तार पूर्वक जान सकते हैं। इसके अलावा रसायन विज्ञान में भी प्रकाश का अध्ययन किया जाता है। प्रकाश के अलावा विद्युतीय चुंबक स्पेक्ट्रम के अन्य भाग भी है जिसे आँखों द्वारा हम नहीं देख सकते और उसे हम एक्स-रे, पराबैंगनी रे के नाम से भी जानते हैं।
प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में गमन करती है तथा खुली आंखों से प्रकाश को का केवल सफेद रंग ही दिखता है परंतु प्रिज्म का प्रयोग करके हम यह जान सकते हैं कि प्रकाश में सात रंग होते हैं। जिसे इंद्रधनुष के साथ रंग भी कहते हैं तथा इस सात बैंगनी, इंडिगो, हरा, नीला, पीला, नारंगी, लाल है जिसे VIBGYOR के नाम से भी जानते हैं। जब सूर्य का प्रकाश प्रिज्म से होकर गुजरता है तो प्रकाश के अपवर्तन के कारण ही प्रकाश सात रंगों में विभाजित हो जाता है। श्वेत प्रकाश के सात रंगों में विभाजन होने की क्रिया को प्रकाश का वर्ण विक्षेपण कहते हैं। इसके अलावा प्रकाश के परावर्तन और अपवर्तन के अलग-अलग नियम भी होते हैं। प्रकाश के परावर्तन की घटना दर्पण में होती है वही अपवर्तन की घटना लेंस में देखने को मिलती है।
इसके अलावा आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से भी तेज होती है। प्रकाश की गति 3×10⁸ m/s की होती है एवं प्रकाश की गति उसके माध्यम पर निर्भर करती है। यानी की अलग-अलग माध्यम से गुजरने पर प्रकाश की गति भिन्न हो जाती है। उदाहरण के तौर पर जल में प्रकाश की गति 2.25×10⁸ मीटर प्रति सेकंड की होती है। वही कांच और नायलॉन में प्रकाश की गति क्रमशः 2×10⁸ मीटर प्रति सेकंड और 1.96×10⁸ मीटर प्रति सेकंड की होती है। अतः हम कह सकते हैं कि प्रकाश की गति उसके माध्यम पर निर्भर करती है। निर्वात में प्रकाश की गति सबसे तेज यानी की 3×10⁸ m/s की होती है एवं सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक आने में तकरीबन 8 मिनट का समय लेता है जबकि चंद्रमा से परावर्तित हो रहे प्रकाश को पृथ्वी तक आने में केवल 1.28 सेकंड का समय ही लगता है।
प्रकाश की गति का पता सबसे पहले रोमन नामक एक वैज्ञानिक ने लगाया था एवं उन्होंने प्रकाश की इस गति का पता बृहस्पति ग्रह के उपग्रहों की गति को देखकर लगाया था। उसके बाद अन्य वैज्ञानिक आए जिन्होंने प्रकाश की तरंग एवं प्रकाश व्यतिकरण का सिद्धांत दिया तथा 1905 ईस्वी में आइंस्टीन ने बताया कि प्रकाश छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना है जिसे फोटोन कहा जाता है। याद रखें कि प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में गमन करता है और प्रकाश के इस सीधी रेखा में गमन करने के कारण ही कैमरे में उल्टे चित्र का बनना तथा विभिन्न प्रकाश की छाया का बनना संभव है।
Loading image...