गाय को हिंदू धर्म मे माँ का सम्मान प्राप्त है। हम सभी गाय की पूजा करते है। दुनिया मे गायो की अनेक प्रकार की नस्ले पायी जाती है।
गायो का पालन पोषण हर किसी से नही होता। इनका रख रखाव, खाना पानी सभी चीजों पर अधिक खर्चा आता है जो केवल वह व्यक्ति ही कर सकता हैं जिसके पास गाय के पालन पोषण का पैसा हो। वह गाय के पालन पोषण से प्राप्त दूध, दही से पैसा कमाता रहता है। यह प्रक्रिया चलती रहती है। लेकिन जो और ज्यादा गरीब व्यक्ति है वह गाय भी नहीं खरीद सकता वह बकरी पालक बनता है।
गाँवो मे हम देखते हैं हर दूसरे के घर मे बकरी होती हैं। बकरी भी गाय के दूध के समान दूध देती हैं। बकरी के दूध मे भी वही पोषक तत्व मौजूद होंते है जो गाय के दूध मे होते है। इसलिए बकरी को गरीबो की गाय कहा गया है। क्योकि यह कम लागत में अच्छा मुनाफा देती हैं। बकरी के मैमने बड़े होकर हलाली के लिए बेच दिये जाते और नन्ही बकरी बड़ी होकर दूध उत्पादन के लिए काम मे लाई जाती हैं।
बकरी के दूध के फायदे -
- कहाँ जाता हैं कि डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी होने पर बकरी के दूध का सेवन करने से डेंगू मे आराम मिलता है।
- बकरी के दूध को माँ के दूध के पोषक तत्वों के बराबर ही माना गया है ।
- किसी भी प्रकार की एलर्जी हो या रोग होने पर बकरी के दूध कारागार माना गया है।
- बकरे के माँस की मांग हर जगह बहुत होती हैं इसके माँस मे शारिरिक शक्ति प्रदान करने की क्षमता होती हैं।
- यह कम लागत मे अधिक मुनाफ़ा देने वाला व्यवसास है । इसमे पशुपालक को किसी भी अन्य जगह लेने की आवश्यकता नही पड़ती। कम जगह मे ही इनका रहना हो जाता हैं।
.jpeg&w=828&q=75)







