डायग्नोसिस कोई बीमारी नही है जिसमे हम आपको यह बता सके के यह किसकी कमी से होता है।
डायग्नोसिस का मतलब, जब हम किसी डॉक्टर के पास जाते है तो हम उन्हे बताते है की हमे खासी, बुखार, सिर दर्द, कमर दर्द या पेट दर्द हो रहा है। तब डॉक्टर हमारी बॉडी का परीक्षण करके हमे उस दर्द की दवाई देता है या जिस दर्द को वह समझ नही पा रहा या अंदरूनी दर्द है तो वह हमे कुछ टेस्ट करवाने को कहता है जैसे - ब्लड टेस्ट, युरिन टेस्ट या ECG , एक्स रे आदि।
इस प्रक्रिया को डायग्नोसिस कहा जाता है।
रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर द्वारा उचित दवाईयो से मरीज का इलाज किया जाता है।
डायग्नोसिस के बाद मरीज को डॉक्टर के द्वारा लिखी गई जांचो के लिए डायग्नोसिस सेंटर खोले जाते है। जहाँ डॉक्टर द्वारा लिखी सारी जांचे होती हैं।
मरीज का ब्लड सेम्पल ले कर कुछ जांचे होती हैं, कुछ युरिन से होती हैं। एक्स - रे , ECG, MRI, सिटी स्केन आदि सारी जांचे अलग अलग उपकरणों से की जाती है।
यहाँ लैब में सभी प्रकार के उपकरण उपलब्ध होते है जो इन सभी बीमारियों की जांच मे आवश्यक होते है।
कोरोना जैसी महामारी के बाद देश थोड़ा और आगे बढ़ गया है अब इन सभी जांचो के लिए हमे डायग्नोसिस सेंटर जाने की भी आवश्यकता नही होती हैं कई ऐसी लैब बन गई है जो घर घर जाकर सेम्पल कलेक्ट करती है और रिपोर्ट्स को घर कुरियर करवा देती हैं।
आशा करती हूँ कि सुमिल यादव जी को उनके गलत प्रश्न का सही उत्तर मिल गया होगा ।
कई बार हम ऐसे प्रश्नो के उत्तरो मे आ जाते है और सोचने पर मजबूर हो जाते है की ऐसी कौन सी बीमारी है या ऐसा कौन सा रोग है जिसके बारे में हमे आज तक नही पता।
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