छींक क्यों आती है - छींक का बहुत अधिक प्रभाव होता है, और खींचते समय हम अपनी आंखें भी खोल कर नहीं रख सकते, हमारी आंखें तक बंद हो जाती है। यह एक ऐसी क्रिया है, जो कि अचानक ही घट जाती है। जब छींक आती है, तो उस समय कुछ क्षण के लिए शरीर का पूरा सिस्टम ही प्रभावित हो जाता है। छींक किसे और कब आएगी, यह पता लगाना नामुमकिन है। लेकिन जब छींक आएगी तो रुकेंगी नहीं। अब आपको बताते हैं कि - छींक क्यों आती है? अगर किन्ही कारणों से नाक की म्यूकस मैब्रेन में इरिटेशन होता है, तो उसे छींक आती है। छींक आने वाले व्यक्ति के नाक के भीतर सुक्ष्म कणों की हलचल या धूल से एलर्जी होने पर
मस्तिष्क के नीचे स्नीज सेंटर में आदेश जाता है कि सभी नसों को छींकने के लिए तैयार होना है और मिलकर काम करना है। छींकने के बाद खुजली इरिटेशन पैदा करने वाले अन्य दूर हो जाते हैं इसके बाद उस व्यक्ति को बड़ा आराम महसूस होता है

