कुशल बाजार परिकल्पना अर्थशास्त्री यूजीन फामा द्वारा 1960 के दशक में दिया गया एक सिद्धांत है | इस निवेश सिद्धांत के अनुसार कोई भी शेयर बाज़ार को ‘बीट’ (हरा) नहीं कर सकता है क्योंकि कुशल बाजार परिकल्पना के होने से शेयर बाजार हमेशा मौजूदा शेयर मूल्यों और सभी जानकारियों को शामिल करता है और इन्हें प्रतिबिंबित भी करता है | अतः शेयर ट्रेडिंग करने वाले कभी भी किसी शेयर को उसके उच्चतम मूल्य पर बेच नहीं सकते और निम्नतम स्तर पर खरीद नहीं सकते |
शेयर हमेशा अपने उचित मूल्य पर व्यापार करते हैं, जिससे निवेशकों के लिए कम कीमतों पर शेयरों को खरीदना या ज्यादा कीमतों पर शेयरों को बेचना असंभव हो जाता है | ऐसे में, बेस्ट स्टॉक चयन और बेहतर बाजार की कल्पना असंभव हो जाती है | इसी कारण से निवेशक उच्च रिटर्न ही प्राप्त कर सकता है उच्चतम नहीं |
निवेशकों के लिए कुशल बाजार परिकल्पना का मतलब है की बाजार में लगतार बदलाव के कारण निवेशक कम लागत वाले निष्क्रिय पोर्टफोलियो में निवेश करके बेहतर परिणाम पा सकते हैं क्योंकि तेज गति के मार्किट में बदलाव को पकड़ना और समझना असंभव हो जाता है | यही कारण है की इन्वेस्टर्स को लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट्स की सलाह दी जाती है और डेली शेयर ट्रेडिंग से बचने को कहा जाता है |
