बोधगया बिहार के राजधानी पटना से लगभग 115 किलोमीटर दूर दक्षिण - पूर्व दिशा में स्थित है और गया जिला से सटा हुआ एक शहर है। यहां गंगा की सहायक फल्गु नदी तट के किनारे पश्चिम दिशा में स्थित महाबोधि मंदिर है। इस मंदिर का संबंध सीधे तौर पर भगवान बुद्ध से है। बोधगया वह स्थान है जहां, भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसलिए बौद्ध भिक्षुओं के लिए बोधगया को दुनिया का सबसे प्राचीन व पवित्र शहर माना जाता है। कहा जाता है कि करीब 531 ईसा पूर्व में यहां फल्गु नदी के किनारे गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने यहां स्थित बोधि वृक्ष के पास बैठकर कठोर तपस्या की। दरअसल बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर में एक पीपल का पेड़ है। इसी पेड़ के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। कहां जाता है कि बोधि का अर्थ 'ज्ञान' से होता है और वृक्ष का अर्थ पेड़ है। इसीलिए इस वृक्ष को ज्ञान का पेड़ कहा जाता है और बोधगया को ज्ञान की नगरी भी कहा जाता है। भगवान बुद्ध को बोधगया में इसी वृक्ष के पास ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, इसलिए भी यहां बुद्ध के अनुयायी और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों की भीड़ जुड़ती है। बोधगया में बौद्ध धर्मावलंबियों के अलावा अन्य धर्मों के लोग भी पूजा-अर्चना करने और प्राचीन पर्यटन स्थल के रूप में देखने आते हैं। महाबोधि मंदिर के नजदीक विभिन्न देशों के तीर्थ यात्री अपने तरीकों से पूजा करते हैं साथ अपने पवित्र उपदेशों को पढ़ते हैं, और मंदिर के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, बोधि वृक्ष के नीचे चिंतन करने बैठते हैं। पूरी तरह ईटों से बना बोधगया का महाबोधि मंदिर सबसे प्राचीन बौद्ध मंदिरों में से एक है। कहां जाता है कि सम्राट अशोक तीसरी शताब्दी से पूर्व इस मंदिर का निर्माण कराया था। इसके बाद कई बार मंदिर स्थल का विस्तार और पुनर्निर्माण किया गया है।






