सनातन धर्म में भगवा रंग केसरिया रंग को बहुत पवित्र माना जाता है। अनादि काल से ही हिंदू संत और साधु भगवा ध्वज की पूजा करते आ रहे हैं. सनातन धर्म में भगवा रंग को त्याग, बलिदान, ज्ञान, शुद्धता,साहस, वीरता और सेवा का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवा सूर्यास्त ( संध्या) और अग्नि का रंग है.जो बलिदान,प्रकाश और मोक्ष की खोज का प्रतीक है. कई भारतीय हिंदु राज्यों और राजवंशों के झंडे का रंग भगवा है. जो सनातन धर्म को दर्शाता है। जिसमें मराठा साम्राज्य भी शामिल है। सनातन धर्म में जो मोक्ष के मार्ग में चलने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, सन्यास ले लेते हैं, वानप्रस्थ में होते हैं, वे सभी केसरिया रंग या भगवा रंग के कपड़े पहनते हैं।भगवा रंग.को ऊर्जा का भी प्रतीक माना जाता है.ऐसा माना जाता है, कि भगवा रंग के कपड़े पहनने से मन पर नियंत्रण रहता है.और दिमाग शांत रहता है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज की तीन रंगों में सबसे ऊपर वाली पट्टी का रंग भगवा होता है। छत्रपति शिवाजी के अनुसार ध्वज का भगवा रंग उगते हुए सूर्य का रंग है, अग्नि की ज्वालाओ रंग है. उगते सूर्य का रंग उसे ज्ञान और वीरता का प्रतीक माना गया है इसलिए हमारे पूर्वजों ने इन सब का प्रेरणा स्वरूप माना है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पवित्र भगवा रंग के ध्वज को ही अपना गुरु माना है। भगवा पहनकर कई भारतीय युवाओं ने आक्रमणकारियों मुगलों और अंग्रेजों से संघर्ष किया है। हिंन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार ज्ञानी लोग केसरिया रंग यह भगवा रंग को चक्रो से जोड़कर देखते हैं. हनुमान जी अजय अमर है.उन्हें शक्ति और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है. महाराज बजरंगबली शक्ति के पुंज हैं, उन्हें केसरिया रंग या भगवा रंग का चोला चढ़ाया जाता है। भगवा रंग के वस्त्र को संयम, संकल्प और आत्म नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए सनातन धर्म में भगवा रंग को इतना महत्व दिया गया है। Loading image...
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| Updated on December 16, 2023 | others
सनातन धर्म में भगवा रंग का क्या महत्व हैं?
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