सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक मुगल बादशाह बाबर के समकालीन थे।
जन्मः
विक्रमी संवत् 1526 के बैसाख पार शुक्ल पक्ष की तृतीया अर्थात जन्म 5 अप्रैल सन 1969 ई. को गुरु नानक का जन्म हुआ था।
निधनः
गुरु नानक का निधन 22 सितंबर 1539 के दिन करतारपुर में हुआ था।
प्रथम सिख मंदिरः
गुरु नानक रहस्यवादी और समाज सुधारक थे और इस रूप में उन्होंने तत्कालीन पंजाबी जनता की भाषा में विपुल धार्मिक साहित्य की रचना की। गुरु नानक के एक शिष्य ने करतारपुर में प्रथम सिख मंदिर की स्थापना की यहां गुरु नानक अपने उपदेश देने लगे।
कथाः
एक बार मौलवी ने गुरु नानक से कहा कि वे उनके साथ नमाज में शामिल हों। गुरु नानक फौरन राजी हो गए। पर नमाज पढ़ते समय गुरु नानक ने परंपरागत विधियों का पालन नहीं किया। नमाज खत्म होने पर मौलवी ने गुरु नानक को बुरा - भला कहा। गुरु नानक ने उत्तर में कहा कि सच्चाई और भावना के बिना, केवल बाहरी दिखावे के साथ, पड़ी गई नमाज बेकार है।
मौलवी को यह बात ठीक लगी क्योंकि नमाज पढ़ते हुए मौलवी सोच रहा था कि अगर उसकी घोड़ी कुएं में गिर पड़ी, तो क्या होगा ? मौलवी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए गुरु नानक से माफी मांगी।
गुरु नानक के पदः
- अपनी बुद्धि का उपयोग ईश्वर की सेवा और पुण्य लाभ में करो।
- अपनी बुद्धि का उपयोग पढ़ने के समय करो, कि जो तुम पढ़ते हो, उसे ठीक से समझ सको।
- अपनी बुद्धि का उपयोग दान करने में करो।
- गुरु नानक ने सभी धर्मों के आडंबरों का खंडन किया।
- हिंदू मुस्लिम एकता का पाठ पढ़ाया और प्रेम तथा भक्ति का उपदेश दिया।
- गुरु नानक ने जाति व्यवस्था का खंडन किया।
और पढ़े- गुरु नानक जयंती का क्या महत्व है ?





