हवाई जहाज जमीन से अधिकतम 42,000फिट ऊंचाई से उड़ सकता है। यदि इससे ज्यादा ऊंचाई पर हवाई जहाज उड़ता है, तो खतरा अधिक होता है और वही हवाई जहाज कम ऊंचाई से उड़ता है, तो पक्षियों के हवाई जहाँ से टकराने का खतरा अधिक होता है।इस तरह के मामले देखने को मिलते रहते है,जब पक्षियों के टकराने से हवाई जहाज आपातकालीन लैंडिंग की समस्या उत्पन्न होती है इसलिए पक्षी 40,000 फीट की ऊँचाई तक नहीं उड़ सकते हैं।
ऐसे मे ज्यादा ऊंचाई पर हवाई जहाज का उड़ना कम ऊंचाई के मुकाबले बहुत ही सुरक्षित माना जाता है।पायलट को केवल टेक ऑफ और लैंडिंग के वक़्त ही पक्षियों का विशेष रूप से ध्यान रखना होता है।
हवाई जहाज को ज्यादा ऊंचाई पर उड़ाने के कई वजह हो सकती है,कम ऊंचाई पर हवाई जहाज के उड़ने का कारण घने एयर मॉलिक्यूल्स होता है। वही हवाई जहाज का अधिक ऊंचाई मे उड़ने से हवा पतली होती है और एयर मॉलिक्यूल्स भी न के बराबर हो जाती है जिस कारण से हवाई जहाज पूरी क्षमता के साथ उड़ सकता है, जिस कारण से हवाई जहाज का माइलेज भी बढ़ने लगता है।
हवाई जहाज में यात्रा करने वाले लोगो के लिए कई बार आपातकालीन द्वावार होते हैं, इन्ही दवार के माध्यम से कोई भी दुर्घटना की स्थिति होने पर बाहर निकल सकते है।लेकिन क्या आपको मालूम है कि आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर पायलटों को हवाई जहाज से बाहर निकालने के लिए विमान के कॉकपिट में एक निकास दवार होता है जिससे निकल सकते है।
हवाई जहाजों का डिजाइन इतना उत्कृष्ट है कि इन्हें आसमान की बिजली का कोई असर नहीं पड़ता। साल में एक बार या 1,000 घंटे की उड़ान में एक बार, बिजली की चमक ने किसी कारणवश हवाई जहाज को नहीं छूआ है। इस सुरक्षा की सुरक्षा के बिना, यात्रियों को खतरा हो सकता है।



