बहुत से लोगों को रमजान का मतलब मालूम नहीं है तो चलिए आज मैं उन लोगों को रमजान का मतलब बताना चाहूंगी:-
सबसे पहले मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि रमजान एक महीने का नाम है। यह इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से साल का नवा महीना होता है। मैं आपको बता दूं कि रमजान शब्द अरबी जबान का शब्द है। इसका मतलब झुलसा देने वाला है।
मजहबे इस्लाम में रमजान महीने की बहुत अहमियत है। कहा जाता है कि अल्लाह ने यह मुबारक महीना इसलिए बनाया की साल के 11 महीने इंसान दुनिया के काम धंधे में लगा रहता है। जिस वजह से इंसान रूहानियत से दूर हो जाता है। और अल्लाह के नजदीक कमी पैदा हो जाती है। तो रमजान में आदमी अल्लाह की इबादत करके उस फासले को कम करता है। और दिलों की गफलत को खत्म करता है ताकि जिंदगी का एक नया दौर शुरू हो जाए।
रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। और नमाज पढ़ते हैं कुरान की तिलावत करते हैं। और यह भी कहा जाता है कि इस महीने में दीगर मीना के मुकाबले हर इबादत का सबब भी 70 गुना ज्यादा हो जाता है। यानी कि रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुले रहते हैं। और जहन्नुम के दरवाजों को बंद कर दिया जाता है। और शैतानों को भी कैद कर दिया जाता है। इतना ही नहीं मुसलमान इस महीने में गुनाहों से भी बचते हैं और नेकी का काम करते हैं ताकि अल्लाह खुश हो सके, जन्नत की राह हम वार हो सके और जहन्नम निजात मिले।
हम आपको बताएंगे कि इस्लाम में रोजा क्यों रखा जाता है :-
मैं आपको बता दूं कि रोज इस्लाम के पांच मूल स्तंभों में से एक है। यही वजह है कि सभी मुसलमान के लिए रोजा रखना फर्ज होता है। ऐसा माना जाता है कि रमजान के महीने में ही पैगंबर मोहम्मद साहब को मुसलमान के पवित्र धार्मिक किताब कुरान का ज्ञान का प्राप्त हुआ था। और सभी मुसलमान को इस्लाम के फ़र्ज का पालन करना जरूरी होता है यही वजह है कि लोग रोजा रखते हैं और अपना फर्ज निभाते हैं।

