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Updated on Mar 15, 2024others

रमजान का मतलब क्या होता है?

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Answered on Mar 13, 2024

बहुत से लोगों को रमजान का मतलब मालूम नहीं है तो चलिए आज मैं उन लोगों को रमजान का मतलब बताना चाहूंगी:-

 

सबसे पहले मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि रमजान एक महीने का नाम है। यह इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से साल का नवा महीना होता है। मैं आपको बता दूं कि रमजान शब्द अरबी जबान का शब्द है। इसका मतलब झुलसा देने वाला है।

 

 मजहबे इस्लाम में रमजान महीने की बहुत अहमियत है। कहा जाता है कि अल्लाह ने यह मुबारक महीना इसलिए बनाया की  साल के 11 महीने इंसान दुनिया के काम धंधे में लगा रहता है। जिस वजह से इंसान रूहानियत से दूर हो जाता है। और अल्लाह के नजदीक कमी पैदा हो जाती है। तो रमजान में आदमी अल्लाह की इबादत करके उस फासले को कम करता है। और दिलों की गफलत को खत्म करता है ताकि जिंदगी का एक नया दौर शुरू हो जाए।

 रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। और नमाज पढ़ते हैं कुरान की तिलावत करते हैं। और यह भी कहा जाता है कि इस महीने में दीगर मीना के मुकाबले हर इबादत का सबब भी 70 गुना ज्यादा हो जाता है। यानी कि रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुले रहते हैं। और जहन्नुम के दरवाजों को बंद कर दिया जाता है। और शैतानों को भी कैद कर दिया जाता है। इतना ही नहीं मुसलमान इस महीने में गुनाहों से भी बचते हैं और नेकी का काम करते हैं ताकि अल्लाह खुश हो सके, जन्नत की राह हम वार हो सके और जहन्नम  निजात मिले।

 

 हम आपको बताएंगे कि इस्लाम में रोजा क्यों रखा जाता है :-

मैं आपको बता दूं कि रोज इस्लाम के पांच मूल स्तंभों में से एक है। यही वजह है कि सभी मुसलमान के लिए रोजा रखना फर्ज होता है। ऐसा माना जाता है कि रमजान के महीने में ही पैगंबर मोहम्मद साहब को मुसलमान के पवित्र धार्मिक किताब कुरान का ज्ञान का प्राप्त हुआ था। और सभी मुसलमान को इस्लाम के  फ़र्ज का पालन करना जरूरी होता है यही वजह है कि लोग रोजा रखते हैं और अपना फर्ज निभाते हैं।

 

 

 

Letsdiskuss 

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Modern India Explorer
Answered on Mar 14, 2024

चलिए आज हम आपको इस पोस्ट के जरिए रमजान का मतलब बताते हैं कि रमजान का मतलब क्या होता है। रमजान इस्लामी धर्म के कैलेंडर में नवा महीना होता है और मुसलमान इस महीने को पवित्र मानते हैं। मुसलमान धर्म के लोग  इस पूरे महीने में रोजा रखते हैं। इस महीने में मुसलमान धर्म के कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इस व्रत को नहीं रख सकते हैं जैसे कि गर्भवती महिला, वृद्ध या जिनकी तबीयत खराब हो वे लोग इस व्रत को ना भी रखें तो चलेगा। जब मुसलमान इस व्रत को रखते हैं तो उनमें संयम होना जरूरी होता है जैसे कि वह किसी भी प्रकार की गाली गलौज नहीं करते हैं और ना ही किसी को अपशब्द बोलते हैं।इसके अतरिक्त वे नाहीं कुछ बुरा सुनते हैं और ना किसी के बारे में बुरा बोलते हैं।ऐसा माना जाता है कि मुसलमान अगर इस महीने में प्यार से अल्लाह से कोई भी दुआ मांगते हैं तो वह  दुआएं अल्लाह को कबूल होती है।

 रमजान एक अरबी शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ होता है जलना।रमजान इस पूरे महीने में नमाज पढ़ते हैं। कुरान भी करते हैं।ऐसा माना जाता है कि इस महीने की 27वीं रात को शब ए कद्र  कुरान का नजूल हुआ इस कारण इस महीने में कुरान को पढ़ना पुण्य माना जाता है।अगर जिससे कुरान पढ़ना नहीं आता है तो वह कुरान को सुन सकता है।मुस्लिम इस पूरे महीने  रोजा करने के बाद अल्लाह का धन्यवाद अदा करते हैं और यह महीना गुजरने के बाद मुसलमान शव्वाल की पहली तिथि को ईद मनाते हैं।

 रमजान के इस में पूरे महीने में मुसलमान लोग गरीब लोगों की मदद के लिए अल्लाह से दुआ करते हैं। कहने का मतलब यह है कि इस महीने में मुसलमान पुण्य का कार्य करते हैं, इसी कारण इस महीने को नेकियों और इबादतों का महीना अर्थात पुण्य और उपासना का महिना कहा जाता है।

 

 

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