चलिए दोस्तों हम आपको बताते हैं की संस्कृत भाषा में मम का क्या अर्थ होता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं की संस्कृत भाषा हिंदी भाषा से अलग होती है संस्कृत भाषा के शब्द अलग होते हैं और हिंदी भाषा के शब्द अलग होते हैं। जिस प्रकार हिंदी भाषा में मेरा शब्द होता है उसी प्रकार संस्कृत भाषा में मम शब्द होता है।
इस प्रकार हम कह सकते हैं की संस्कृत भाषा में मम का अर्थ मेरा होता है। मैं का अर्थ मेरा,मैं और मुझे भी हो सकता है। इसी प्रकार संस्कृत भाषा के और कई सारे शब्द है जिनके अर्थ अलग-अलग होता है।
उदाहरण के लिए मैं आपको मैं का अर्थ बताती हूं- जैसे कोई बोलता है मम पुस्तकम तो इसका हिंदी में अर्थ हुआ मेरी पुस्तक, मम भ्राता शिक्षित: तो इसका अर्थ हुआ मेरा भाई शिक्षित है। संस्कृत भाषा में भाई को भ्राता बोलते हैं। अगर बड़े भाई के बाद की जाए तो बड़े भाई को संस्कृत मे जेष्ठ भ्राता कहते हैं। वहीं अगर माता-पिता की बात की जाए तो संस्कृत भाषा में माता-पिता को मातृ पितृ बोलते हैं। वहीं अगर बेटे की बात की जाए तो बेटे को संस्कृत भाषा में पुत्र बोलते हैं तथा बेटी को संस्कृत भाषा में पुत्री बोलते हैं। इसी प्रकार संस्कृत भाषा की गिनती भी अलग होती है। हिंदी भाषा में गिनती 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 होती है। लेकिन संस्कृत भाषा की गिनती प्रथम,द्वितीय,तृतीय, चतुर्थ,पंचम,षष्ठाम, सप्तम, अष्टम,नवमी दशमी इतिहास होती है।संस्कृत भाषा में गुरु को आचार्य जी बोलते हैं। इसी प्रकार संस्कृत भाषा कैसे तमाम शब्द जिनका हिंदी अर्थ होता है। संस्कृत भाषा की उत्पत्ति लगभग 1700 से 1200 वर्ष ईसा पूर्व पहले हुई थी और संस्कृत भाषा की उत्पत्ति वैदिक संस्कृति के रूप में महर्षि पणिनी द्वारा की गई थी।सस्कृत भाषा यूरोपीय भाषा से ली गई है।
इस प्रकार संस्कृत भाषा को ऐसे बहुत से कम लोग हैं जो समझ पाते हैं संस्कृत भाषा एक कठिन भाषा होती है जिसका अर्थ निकलना मुश्किल होता है।

