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shweta rajput· 6 years ago
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सनातन धर्म और विज्ञानं का क्या सम्बन्ध है ?

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Updated on07/07/20
एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने *विदेश में रहने वाले बेटे से विडियो चैट करते वक्त पूछ बैठी-

बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या नहीं?

बेटा बोला-

माँ, मैं एक जीव वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूँ। विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन.. क्या आपने उसके बारे में सुना भी है?

उसकी माँ मुस्कुराई
और बोली.....
मैं डार्विन के बारे में जानती हूँ बेटा.. उसने जो भी खोज की, वह वास्तव में सनातन-धर्म के लिए बहुत पुरानी खबर है।

हो सकता है माँ!बेटे ने भी व्यंग्यपूर्वक कहा।

यदि तुम कुछ समझदार हो, तो इसे सुनो.. उसकी माँ ने प्रतिकार किया
क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है?

विष्णु के दस अवतार ?
बेटे ने सहमति में कहा...

हाँ! पर दशावतार का मेरी रिसर्च से क्या लेना-देना?

माँ फिर बोली-
लेना-देना है..
मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुम और मि. डार्विन क्या नहीं जानते हो ?

पहला अवतार था 'मत्स्य', यानि मछली। ऐसा इसलिए कि जीवन पानी में आरम्भ हुआ, यह बात सही है या नहीं?

बेटा अब ध्यानपूर्वक सुनने लगा..

उसके बाद आया दूसरा अवतार 'कूर्म', अर्थात् कछुआ क्योंकि जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया.. 'उभयचर (Amphibian)', तो कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर के विकास को दर्शाया।

तीसरा था 'वराह' अवतार, यानी सूअर। जिसका मतलब *वे जंगली जानवर, जिनमें अधिक बुद्धि नहीं होती है। तुम उन्हें डायनासोर कहते हो।
बेटे ने आंखें फैलाते हुए सहमति जताई..

चौथा अवतार था 'नृसिंह', आधा मानव, आधा पशु जिसने दर्शाया जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों का विकास।

पांचवें 'वामन' हुए, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था। क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है? क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे- होम इरेक्टस(नरवानर) और होमो सेपिअंस (मानव), और होमो सेपिअंस ने विकास की लड़ाई जीत ली।

बेटा दशावतार की प्रासंगिकता सुन के स्तब्ध रह गया..

माँ ने बोलना जारी रखा-
छठा अवतार था 'परशुराम', जिनके पास शस्त्र (कुल्हाड़ी) की ताकत थी। वे दर्शाते हैं उस मानव को जो गुफा और वन में रहा.. गुस्सैल और असामाजिक।

सातवां अवतार थे 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम', सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति। जिन्होंने समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार।

आठवां अवतार थे 'भगवान श्री कृष्ण', राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी।जिन्होंने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि *सामाजिक ढांचे में रहकर कैसे फला-फूला जा सकता है?

बेटा सुनता रहा, चकित और विस्मित..

माँ ने ज्ञान की गंगा प्रवाहित रखी -
नवां थे 'महात्मा बुद्ध', वे व्यक्ति जिन्होंने नृसिंह से उठे मानव के सही स्वभाव को खोजा। उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की।

और अंत में दसवां अवतार 'कल्कि' आएगा। वह मानव जिस पर तुम काम कर रहे हो.. वह मानव, जो आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठतम होगा।

बेटा अपनी माँ को अवाक् होकर देखता रह गया..

अंत में वह बोल पड़ा-
यह अद्भुत है माँ.. हिंदू दर्शन वास्तव में अर्थपूर्ण है!

मित्रों..
वेद, पुराण, ग्रंथ, उपनिषद इत्यादि सब अर्थपूर्ण हैं। सिर्फ आपका देखने का दृष्टिकोण होना चाहिए। फिर चाहे वह धार्मिक हो या वैज्ञानिकता...!


जय श्री कृष्ण
जय श्री राम
ॐ नमो भगवते वासुदेवय नमः

राधे राधे राधे राधे राधे राधे



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Answered on07/31/21

सनातन धर्म जीवन का एक तरीका है……. यह आपको प्रकृति पर आधारित जीवन की एक स्पष्ट तस्वीर देता है …… यह भावनाओं, संबंधों, शरीर रचना विज्ञान, शरीर विज्ञान, और बहुत कुछ …… .. से संबंधित है।

विज्ञान कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे किसी इंसान ने बनाया है…..यह सिद्धांतों और सिद्धांतों का समूह है जिसके साथ एक खोज की जाती है… मेनिंग साइंस हमें पेट्रोल का उपयोग करने में मदद करता है जो पहले से ही प्रकृति का एक हिस्सा है…।

चूंकि सनातन धर्म शुद्ध प्रकृति की अवधारणा है

वायु जल पृथ्वी सूर्य चंद्रमा आदि ……… इसमें जो भी अनुष्ठान और प्रथाएं हैं, उसका वैज्ञानिक कारक होगा..

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Answered on07/14/20
सनातन धर्म मे हर चिज विज्ञान से सम्बंधित है
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Answered on07/14/20
सनातन धर्म मे बहुत पहले ही ऐक ऋषि थे जिन्होने प्लास्टिक सर्जरी किया था
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Answered on10/20/23

राष्ट्रगान को गाने में लगने वाला समय, इसे गाए जाने की गति, राष्ट्रगान के संस्करण और छंदों को जोड़ने या हटाने जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी देश के राष्ट्रगान की आमतौर पर एक मानक अवधि होती है, और इसे उचित समय सीमा के भीतर गाना परंपरा और सम्मान का विषय है। राष्ट्रगान गाने के लिए यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं:

1.सम्मानजनक अवधि: राष्ट्रगान गाना एक प्रतीकात्मक और गंभीर कार्य है, और इसे सम्मान और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। अधिकांश राष्ट्रगान कुछ ही मिनटों में गाए जा सकते हैं।

2.मानक छंद: कई राष्ट्रगानों का एक मानक संस्करण होता है जिसमें विशिष्ट संख्या में छंद और एक कोरस शामिल होता है। इन छंदों और कोरस को गाने में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं।

3.आधिकारिक दिशानिर्देश: कुछ देशों में, राष्ट्रगान के उचित गायन के संबंध में आधिकारिक दिशानिर्देश हैं। ये दिशानिर्देश गाए जाने वाले छंदों की संख्या और इसे जिस गति से निष्पादित किया जाना चाहिए उसे निर्दिष्ट कर सकते हैं।

4. प्रथागत गति: स्पष्ट उच्चारण और अभिव्यक्ति की अनुमति देने के लिए राष्ट्रगान आमतौर पर मध्यम गति से गाए जाते हैं। बहुत जल्दी गाने से राष्ट्रगान की गंभीरता से समझौता हो सकता है।

5.विशेष अवसर: राष्ट्रीय छुट्टियों या आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे विशेष अवसरों पर, अक्सर राष्ट्रगान का पूरा संस्करण गाया जाता है, जिससे इसकी अवधि बढ़ सकती है। हालाँकि, इसे आमतौर पर एक उचित समय सीमा के भीतर गाया जाता है।

हालाँकि राष्ट्रगान गाने के लिए कोई निश्चित अधिकतम समय नहीं है, लेकिन इस कार्य को श्रद्धा के साथ करना और राष्ट्रगान के गायन के संबंध में सांस्कृतिक और आधिकारिक रीति-रिवाजों का पालन करना महत्वपूर्ण है। अवधि के बजाय देशभक्ति और प्रतीकात्मक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

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Answered on07/13/20
सनातन धर्म मे बहुत पहले ही सुर्य से पृथ्वी कि दुरी बता दि गयी थी
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Answered on07/10/20
बहुत सारे वैज्ञानिक ने माना है कि सनातन धर्म का हर सम्बन्ध विज्ञान से है
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Society & Culture Writer
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Answered on07/09/20
सनातन धर्म और विज्ञान का वही सम्बन्ध है जो वायु और जिवन का है
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Answered on07/08/20
पुरा सन्तान धर्म ही विज्ञान है
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Updated on05/29/26

मानव जीवन में शिक्षा का उतना ही महत्व है, जितना वर्तमान समय में जीवन को जीने का | मानव जीवन में इंसान का शिक्षित होना जरुरी है, मगर ये बात जब तक सभी लोग नहीं मान लेते तब तक ऐसे कैसे कहा जा सकता है कि मानव जीवन में शिक्षा का क्या महत्व है ?

आज भी कई जगह ऐसी है जहाँ बच्चों को नहीं पढ़ाया जाता | कई जगह तो बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल हैं ही नहीं और अगर कहीं हैं, भी तो वहाँ सही शिक्षक नहीं किसी भी प्रकार का मैनेजमेंट नहीं | उस पर कहीं तो ये हाल कि लोग सिर्फ लड़कों को पढ़ाते हैं, लड़कियों को नहीं | अगर ऐसा ही चलेगा तो आप ही बताइये कि मानव जीवन में शिक्षा का क्या महत्व रह जाएगा |
 
Letsdiskuss
 
शिक्षा का महत्व होना सिर्फ पढ़ना या कुछ सीखना नहीं होता बल्कि शिक्षा के विचार को उसकी अच्छाई को अपने जीवन में लाना भी होता है | मुझे तो नहीं लगता कि आज के समय में शिक्षा का कोई महत्व रह गया है | इसके भी कुछ कारण हैं, जिसके आधार पर शिक्षा आज के समय में न तो व्यवस्थित है और न ही किसी काम की |
 
मुझे लगता है, कि वर्तमान समय में शिक्षा का कोई महत्व नहीं रह गया है, क्योकि जहाँ लड़का-लड़की में भेद हो आज भी वहाँ और शिक्षित समाज होने का कोई फायदा नहीं है |
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Answered on07/08/20
सनातन धर्म और विज्ञान मे बहुत ज्यादा सम्बन्ध है सनातन धर्म कि हर कही गयी बात मे विज्ञान है
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Modern Day Philosopher
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