सुनहरी मछली याने गोल्डफिश बहुत ही खूबसूरत होती हैं। इसमे सुनहरे पंख देखने मे मनमोहक होते है।
इसका वैज्ञानिक नाम कैरासियस ऑराटस है।
यह एक कार्प मछली है। यह एक्विरियम के लिए प्रसिद्ध है और यह पालतू मछली के रूप में रखी जाती हैं। इसक अलावा बगीचो के तालाबों और पानी के अन्य निकायो मे भी इसका उपयोग किया जाता है।
अधिकतर सुनहरी मछलियाँ नारंगी- लाल या नारंगी पीले रंग की होती हैं। यह अधिकतर 6 सालों तक ही जीवित रह पाती है। यदि उचित देखभाल और पर्याप्त भोजन और साफ वातावरण मिले तो यह 45 सालों तक भी जीवित रह सकती हैं।
सुनहरी मछली के बारे में रोचक तथ्य -
- सुनहरी मछलीयो का पेट नहीं होता है इसलिए उन्हे छोटे छोटे भोजन के टुकड़े दिये जाते है जिसे वह आसानी से पचा सके।
- यह अत्यधिक मात्रा में अपशिष्ट बाहर निकालती है जिससे एक्विरियम को साफ रखने के लिए फिल्टर की आवश्यकता पड़ती है।
- यह सर्वाहारी होती हैं यह मच्छरो का लार्वा, पानी के पिस्सू, जलीय पौधे, कीड़े और शैवाल भी खा जाती हैं।
- गोल्डफिश की यादाश्त लगभग 3 महीने की होती हैं।
- वातावरण और अच्छे टैंक का गोल्डफिश पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
- टैंक अच्छा होने पर यह लगभग 1 फिट तक बड़ी हो सकती हैं।
- यह हमेशा आँखे खुली रखती हैं क्योकि इनकी पलके नही होती हैं।
- गोल्डफिश की 11 प्रसिद्ध प्रजातियाँ पायी जाती है।
समान्य गोल्ड फिश, शूंबकिन, धूमकेतु, फैनटेल, ब्लैक मूर, रयुकिन, ओरंडा, लिनहेड, रेंचु, पर्लस्केल, टेलिस्कोप गोल्ड फिश।
- इसके अलावा भी कई और प्रजातियाँ पाई जाती हैं जो अपने आकर्षण के लिए प्रसिद्ध है।
- सुनहरी मछली को अंधेरे में रहना बिल्कुल पसंद नहीं है।
- कोई भी फिश युरिन नही करती है यह अपने गलफडो के द्वारा अमोनिया को फिल्टर करने का काम करती हैं।
- यह ठंडे पानी में भी जीवित रह सकती हैं लेकिन ठंडे पानी मे इनकी गति धीमी हो जाती हैं।
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