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Jonny Smith· 2 years ago
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क़ुरान में ईसा मसीह के बारे में क्या लिखा है?

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Answered on02/26/25

इस्लाम में ईसा मसीह (अलैहिस्सलाम) को एक महान नबी और अल्लाह के पैगंबर के रूप में माना जाता है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, वे मरियम (मरयम) के पुत्र थे और अल्लाह के आदेश से बिना किसी सांसारिक पिता के जन्मे थे। इस संदर्भ में, क़ुरआन में ईसा मसीह (अ.स.) का उल्लेख कई स्थानों पर किया गया है।

 

क़ुरआन में ईसा मसीह का ज़िक्र मुख्य रूप से उनके जन्म, उनके चमत्कारों, उनके संदेश, उनकी परीक्षाओं और उनके स्वर्गारोहण (उठाए जाने) के संदर्भ में किया गया है। इस्लाम में, ईसा (अ.स.) को ईश्वर का पुत्र नहीं बल्कि एक सम्मानित दूत माना जाता है, जो एकेश्वरवाद (तौहीद) का प्रचार करने के लिए भेजे गए थे।

 

क़ुरान में ईसा मसीह के बारे में क्या लिखा है? - Letsdiskuss

 

1. ईसा मसीह का पवित्र जन्म

क़ुरआन के अनुसार, ईसा मसीह (अ.स.) का जन्म एक चमत्कारी घटना थी। उनकी माँ मरयम (अ.स.) एक पवित्र और धार्मिक महिला थीं, जिन्हें अल्लाह ने विशेष रूप से चुना और सम्मान दिया।

 

क़ुरआन (सूरह आले इमरान 3:42-47) में कहा गया है:
"और जब फ़रिश्तों ने कहा: ऐ मरयम! निश्चय ही अल्लाह ने तुम्हें चुन लिया और तुम्हें पवित्र बना दिया तथा संसार की स्त्रियों में तुम्हें चुनकर ऊँचा स्थान दिया।"

 

सूरह मरयम (19:16-21) में वर्णन मिलता है:
"और (हे पैगंबर!) इस किताब (क़ुरआन) में मरयम का वर्णन कीजिए, जब वह अपने परिवार से अलग होकर एक पूर्वी स्थान पर चली गई। फिर उसने उनसे पर्दा कर लिया, तब हमने उसकी ओर अपनी रूह (फ़रिश्ते) को भेजा और वह उसके सामने एक संपूर्ण मानव के रूप में प्रकट हुआ। मरयम ने कहा: ‘यदि तू अल्लाह से डरने वाला है तो मैं तुझसे बचने के लिए रहमान (अल्लाह) की शरण लेती हूँ।’ उसने कहा: ‘मैं तो केवल तेरे रब का भेजा हुआ हूँ ताकि तुझे एक पवित्र पुत्र प्रदान करूँ।’"

 

मरयम (अ.स.) को जिब्रील (गैब्रियल) फ़रिश्ते ने सूचित किया कि वे एक पुत्र को जन्म देंगी, जो अल्लाह की विशेष कृपा से होगा। यह जन्म एक अलौकिक चमत्कार था, क्योंकि ईसा मसीह (अ.स.) का जन्म बिना पिता के हुआ था।

 

2. ईसा मसीह को अल्लाह का पैग़ंबर बताया गया

इस्लाम में ईसा मसीह (अ.स.) को अल्लाह का पैग़ंबर बताया गया है, न कि ईश्वर का पुत्र। ईसाइयों के विपरीत, इस्लाम यह मानता है कि ईसा (अ.स.) ईश्वर नहीं बल्कि अल्लाह के एक विशेष दूत थे।

 

सूरह अन-निसा (4:171) में कहा गया है:
"हे अहले किताब! अपने धर्म में अतिशयोक्ति न करो और अल्लाह के बारे में सत्य के सिवा कुछ न कहो। वास्तव में मसीह ईसा, मरयम के पुत्र, केवल अल्लाह के रसूल और उसका एक शब्द (क़लमा) थे, जिसे उसने मरयम की ओर डाला और वह उसकी ओर से एक आत्मा थी। तो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और यह न कहो कि (अल्लाह तीन में से एक है)। इससे बाज़ आओ, यही तुम्हारे लिए उत्तम है। निःसंदेह अल्लाह एक ही इश्वर है।"

 

3. ईसा मसीह के चमत्कार

क़ुरआन में उल्लेख मिलता है कि ईसा (अ.स.) ने कई चमत्कार किए, लेकिन यह सब अल्लाह की अनुमति से हुआ।

 

सूरह आले इमरान (3:49) में कहा गया है:
"और (अल्लाह ने ईसा से कहा) वह उसे बनी इस्राईल के लिए रसूल बनाएगा (जो कहेगा): मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक निशानी लेकर आया हूँ। मैं मिट्टी से पक्षी का आकार बनाता हूँ, फिर उसमें फूँक मारता हूँ और वह अल्लाह के हुक्म से जीवित पक्षी बन जाता है। और मैं अल्लाह की अनुमति से अंधे और कोढ़ी को अच्छा कर देता हूँ और मुर्दों को जीवित करता हूँ। और मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम क्या खाते हो और क्या अपने घरों में जमा करते हो। निस्संदेह इसमें तुम्हारे लिए एक निशानी है, यदि तुम ईमान लाने वाले हो।"

 

इन चमत्कारों से यह स्पष्ट होता है कि ईसा (अ.स.) को अल्लाह की विशेष कृपा प्राप्त थी, लेकिन वे स्वयं ईश्वर नहीं थे, बल्कि अल्लाह के पैग़ंबर थे।

 

4. ईसा मसीह की शिक्षा

क़ुरआन के अनुसार, ईसा मसीह (अ.स.) ने एकेश्वरवाद (तौहीद) का प्रचार किया और लोगों को अल्लाह की बंदगी करने की शिक्षा दी।

 

सूरह अल-माइदा (5:116-117) में कहा गया है:
"और (क़यामत के दिन) अल्लाह कहेगा: ऐ ईसा, मरयम के बेटे! क्या तुमने लोगों से कहा था कि मुझे और मेरी माँ को अल्लाह के अलावा उपास्य बना लो? वह कहेगा: मैं तेरा गुणगान करता हूँ, मैंने कभी उनसे कुछ नहीं कहा, सिवाय इसके कि तूने मुझे जो आदेश दिया था: कि अल्लाह की बंदगी करो, जो मेरा और तुम्हारा रब है।"

 

यह इस बात का प्रमाण है कि इस्लाम में ईसा (अ.स.) की शिक्षा केवल एकेश्वरवाद की थी, न कि स्वयं को ईश्वर मानने की।

 

5. ईसा मसीह की क्रूस पर मृत्यु नहीं हुई

इस्लाम की मान्यता के अनुसार, ईसा मसीह (अ.स.) को सूली पर नहीं चढ़ाया गया था, बल्कि उन्हें अल्लाह ने जीवित स्वर्ग में उठा लिया।

 

सूरह अन-निसा (4:157-158) में कहा गया है:
"और उन्होंने कहा: हमने मसीह ईसा, मरयम के बेटे को मार डाला, जो अल्लाह का रसूल था, जबकि न तो उन्होंने उसे मारा और न ही उसे सूली दी, बल्कि उन्हें (दिखाई देने में) ऐसा लगा (कि वह मारा गया)। और जो लोग इसके बारे में मतभेद कर रहे हैं, वे संदेह में पड़े हुए हैं। उनके पास इसका कोई निश्चित ज्ञान नहीं है, बल्कि वे केवल अनुमान के पीछे चलते हैं। और निश्चय ही उन्होंने उसे नहीं मारा। बल्कि अल्लाह ने उसे अपनी ओर उठा लिया।"

 

6. ईसा मसीह का पुनः आगमन

इस्लामी मान्यता के अनुसार, ईसा मसीह (अ.स.) को क़यामत के दिन से पहले दोबारा इस धरती पर भेजा जाएगा, ताकि वे सत्य धर्म की स्थापना करें और अन्याय को समाप्त करें।

 

हदीसों में वर्णित है:
"ईसा (अ.स.) क़यामत के करीब वापस आएंगे और न्यायपूर्ण शासन स्थापित करेंगे। वे दज्जाल (मसीह विरोधी) को पराजित करेंगे और इस्लाम का प्रसार करेंगे।"

 

निष्कर्ष

क़ुरआन में ईसा मसीह (अ.स.) को एक सम्माननीय नबी, अल्लाह के पैगंबर और एक चमत्कारी व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस्लाम उन्हें ईश्वर का पुत्र नहीं मानता, बल्कि अल्लाह का एक बंदा और रसूल मानता है, जिन्हें बिना पिता के जन्म दिया गया और जो अल्लाह की अनुमति से चमत्कार करते थे। ईसा (अ.स.) की मृत्यु नहीं हुई, बल्कि उन्हें अल्लाह ने उठा लिया और वे क़यामत के दिन पुनः लौटेंगे।

 

Henry Cavill
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