कुछ ग़लत होता हुआ देख कर आपको क्या करना चाहिए ? - letsdiskuss
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मयंक मानिक

Student-B.Tech in Mechanical Engineering,Mit Art Design and Technology University | पोस्ट किया |


कुछ ग़लत होता हुआ देख कर आपको क्या करना चाहिए ?


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Content writer | पोस्ट किया


सुनने में भले ही यह सवाल थोड़ा अटपटा लगता हो लेकिन अगर हम गहराई से सोचे तो यह एक गहन चिंता का विषय है, कि कुछ गलत होते हुए देख कर आपको क्या करना चाहिए| वैसे तो इस सवाल का जवाब बहुत सरल है, लेकिन बदलते युग में हम सरल चीज़ो का पालन करना पसंद नहीं करते|  

Letsdiskuss (courtesy-pragativadi )
जैसे आज मेरे साथ एक घटना हुई की जब सुबह में मेट्रो स्टेशन पहुंची तो मैंने देखा वहां पर एक बुजुर्ग व्यक्ति गीली ज़मीन जहाँ पर पानी बिखरा हुआ था, उसकी तस्वीर खींच रहे थे, जब मैं  वहाँ से गुज़री तो यह बात मुझे थोड़ी अटपटी जरूर लगी लेकिन जैसे ही में मेट्रो स्टेशन के अंदर तक आयी, तब मैंने देखा की एक महिला के सर पर चोट लगी हुई थी, तभी वह बुजुर्ग व्यक्ति वहां आये और मेट्रो के स्टाफ पर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगे और उन्हें वह तस्वीर दिखाई जहाँ  गीली ज़मीन थी थोड़ा पानी बिखरा हुआ था, तब जाकर मालूम चला की वह महिला गीली ज़मीन पर गिर गयी थी जिसकी वजह से उसे चोट लग गयी और वह घायल हो गयी| यह मेट्रो स्टाफ की लापरवाही थी जो वक़्त रहते उन्होंने गीली ज़मीन को साफ़ नहीं किया था|

इसलिए कभी भी किसी गलत बात का साथ नहीं देना चाहिए, और कभी भी किसी के साथ जान बुझ कर गलत नहीं करना चाहिए, और ना ही गलत बात को छुपाना चाहिए| वर्तमान काल में हम सभी अपनी आँखें और कान बंद कर के गलत बातो का साथ देते है| 


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Businessman | पोस्ट किया


कुछ ग़लत होता है, तो लोग मुँह मोड़ लेते हैं, क्योंकि कोई किसी पंगे में फसना नहीं चाहता | एक तरफ लोग ग़लती को खुद बढ़ावा देते हैं, ग़लत होते हुए भी चुप रहकर क्योंकि हम हमेशा यही सोचते हैं कि हमें क्या |

लोगों का यह कहना "हमें क्या" उस दिन भारी पड़ जाता है जिस दिन कोई घटना उनके साथ होती हैं और लोग कहते हैं "हमें क्या" और तब बुरा लगता है |आज कल के समय में ग़लत को ग़लत कहने की हिम्मत सब में हैं , पर ग़लत के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत कोई नहीं करता |

जब ग़लत होते हुए देख रहे हैं और अगर उस ग़लती को सुधारा जा सकता हैं, तो इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि आप उसके ख़िलाफ़ आवाज उठाएं |

जो इंसान ग़लती करता हैं, वो तो ग़लत हैं परन्तु उससे भी ग़लत वो है, जो ग़लती को सहता है और उसके ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाता |


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