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Anushka · 2 years ago
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लैला मजनू की वास्तविक कहानी क्या थी?

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Answered on02/25/24

मैं आपको आज बताने वाली हूं की लैला मजनू की वास्तविक कहानी क्या थी:-

अक्सर जब भी प्यार,मोहब्बत, इश्क के बारे में चर्चा हो और लैला मजनू का जिक्र ना हो ऐसा कैसे संभव हो सकता है। क्योंकि लैला- मजनू सदियों से ही प्यार करने वालों के आदर्श रहे हैं। और हां लैला मजनू की वास्तविक कहानी ऐसे समय की है जब प्यार करना गुनाह समझा जाता था।

 ये कहानी उसे समय की है जब प्रेम एक गुनाह था। अरबपति शाह हमारी के बेटे मजनू की किस्मत में  यह प्रेम रोग हाथ की लकीरों में ही लिखा था। और उसे देखते ही ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की की कैसे प्रेम दीवाना होकर दर-दर भटकता फिरेगा। और फिर ज्योतिषों की भविष्यवाणी को झूठलाने के लिए शाह अमारी ने खूब मन्नते की कि उनका बेटा इस प्रेम रोग से मशहूर रहे लेकिन कुदरत तो अपना खेल दिखाती ही है।

 और जब दमिश्क के मदरसे में उसने नाज्द के शाह की बेटी लैला को तो देखा पहली नजर में ही उसका आशिक हो गया। और फिर मौलवी ने उसे समझाया कि वह प्रेम की बातें भूल जाए और पढ़ाई में अपना ध्यान लगाए। और इसी तरह मोहब्बत का असर लैला पर भी हुआ और दोनों ही प्रेम सागर में डूब गए। और फिर इसका नतीजा यह हुआ की लैला को घर में कैद कर दिया गया। और फिर मजनू लैला की जादू में प्यार के लिए मारा मारा फिरने लगा। और उसकी दीवानगी को देखकर लोगों ने उसे मजनू का नाम दिया। इतना ही नहीं लैला मजनू को अलग करने की लाख कोशिशें भी की गई  लेकिन सब बेकार साबित हुआ। और लैला की तो शादी भी बख्त नामक व्यक्ति से  सादी कर दी गई थी। और लैला ने अपनी शहर को बता दिया कि वह सिर्फ मजनू की दीवानी है  और मजनू के अलावा उसे कोई भी नहीं छू सकता है।

 इस प्रकार मैंने आपको यहां पर ले लो और मजनू की प्रेम की कहानी बताई है।

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Answered on02/26/24

प्यार, मोहब्बत और इश्क के बारे में चर्चा हो और लैला मजनू का जिक्र न हो ऐसा कैसे संभव हो सकता है। लैला मजनू सदियों से ही प्यार करने वालों के आदर्श रहे हैं। लैला मजनू के वास्तविक कहानी ऐसे समय की है, जब प्यार करना गुनाह समझा जाता था। कहते हैं की सातवीं शताब्दी में एक अरब  के रेगिस्तान में एक धनी शाह आमरी के पुत्र हुआ। जिसका नाम  कैस-इब्न आमरी रखा गया। ज्योतिषियों और मालवियों  शाह आमरी से कैस-इब्न के बारे में एक भविष्यवाणी कर दी थी कि यह प्यार के चक्कर में दर दर भटकेगा। यह सुनकर कैस के पिता ने मालवियों से कहा कि वह ऐसा होने नहीं देंगे। लेकिन कुदरत में जो लिखा होता है, वह होकर रहता है। कैस ने दमिश्क के मदरसे में आकर्षित दिखने वाली लैला को देखा और उससे प्यार करने लगा। लैला से उसको इतना प्यार हो गया कि उसके बारे में वह कविताएं तक लिखने लगा। हालांकि मदरसे में मौलाना ने कैस को बहुत समझाया कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। लेकिन कैस को हर जगह लैला ही दिखाई देती थी। लैला भी उसके प्यार में दीवानी हो गई। लैला के घर वालों ने लैला को हर प्रकार से समझाया कि वह मजनू से ना मिले उससे दूर रहे। उसे कई प्रकार की यातनाएँ दी यहां तक की बात न मानने पर  लैला को घर में कैद कर लिया गया। मजनू लैला से न मिलने पर इधर-उधर पागलों की तरह भटकने लगा। इस तरह से लोग उसे देखकर मजनू कहकर पुकारने लगे। मजनू को उर्दू में पागल कहा जाता है। मजनू के पिता ने लैला के पिता से निकाह करने की बात की लेकिन वों राजी नहीं हुए। उन्होंने लैला का निकाह बख्त नाम के अमीर व्यापारी से कर दी निकाह के पश्चात लैला ने अपने और मजनू के बारे में सब बता दिया कि वह मजनू से प्यार करती है। इसके बाद लैला को बहुत सताया गया। कुछ दिनों के बाद बख्त ने लैला को तलाक दे दिया। इसके बाद लैला मजनू की तलाश में निकल गई। कहते हैं कि वह एक दूसरे से बेइंतहा प्यार करते थे। यहां तक की यह भी कहा जाता है कि जब लोग मजनू को पत्थर मारते थे तो चोट लैला को लगती थी। बहुत कोशिशों के बाद वे भटकते हुए एक स्थान पर मिले। वह दोनों एक सुरक्षित स्थान पर गए। जब वहां वे दोनों आराम कर रहे थे तो लैला का भाई वहां पहुंचा और उसने मजनू का कत्ल कर दिया। मजनू के मरे हुए शरीर को देखकर लैला ने भी उसी समय अपने प्राण त्याग दिए। Article image

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