श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भाद्रपद, आश्विन,मार्गशीष, आषाढ़, कार्तिक और श्रावण के महीने मे करानी चाहिए।इन महीनो में भागवत कथा सुनने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। भागवत कथा पौराणिक कथा मानी जाती है जो हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण होती है।
भागवत कथा आयोजन कराने के लिए आपको पंडित से मुहूर्त निकलवाना पड़ता है क्योंकि बिना मुहूर्त के भागवत कथा नहीं हो सकती है। भागवत कथा का आयोजन सोमवार से करवाना चाहिए और भागवत कथा का पाठ एक सप्ताह तक चलता है, भागवत कथा करवाने से पितृ दोष कम होते है और भगवान प्रसन्न होते है और आशीर्वाद देते है।
श्रीमद् भागवत कथा आयोजन को सभी लोगो के सहयोग से करना चाहिए। ऐसे लोगों से सहयोग लेना चाहिए जो श्रीमद् भागवत कथा मे शामिल होने मे रूचि रखते हो। भागवत कथा कराने के लिए सबसे पहले किसी विद्वान ऋषि या ब्राह्मण से शुभ मुहूर्त निकलवाना चाहिए, इसके बाद जिस तरह से एक गरीब व्यक्ति अपनी कन्या के विवाह के लिए धन एकत्रित करता है उसी प्रकार लोगों से भागवत कथा के लिए धन एकत्रित करना होता है।
ीमद् भागवत कथा पाठ कराने के लिए सही जगह का निर्धारित करनी होती है। जैसे कि किसी पवित्र स्थल नदी के किनारे या फिर किसी मंदिर में भी भागवत कथा करवा सकते है। मंदिर या नदी के किनारे पवित्र स्थल मे जहाँ पर भागवत करवाना है वहां पर 5-6 दिन पहले साफ- सफाई करना जरुरी होता है। उस जगह को अच्छे से स्वच्छ रखना चाहिए इसके बाद भागवत कथा प्रारंभ करते समय व्यास जी महाराज के लिए एक ऊँचे जगह या व्यासपीठ बनायीं जाती है जहां से व्यास जी की कथा सभी लोगो क़ो सुनाई दें।भागवत कथा पूरे 7 दिनों तक चलती है 7वें दिन कथा का समापन होता है और भंडरे के प्रसाद का वितरण कराया जाता है।




