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Educationभागवत कथा कब करानी चाहिए ?
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| Updated on March 9, 2026 | education

भागवत कथा कब करानी चाहिए ?

4 Answers
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@sonamsingh1730 | Posted on March 9, 2026

क्या आप जानते हैं की भागवत कथा कब करनी चाहिए। यदि आप जानते हैं तो अच्छी बात है और यदि आपको इसकी जानकारी नहीं है तो चलिए आज हम आपको इसकी जानकारी देते हैं।

यहां पर मैं आपको बताने वाली हूं की भागवत कथा कब करानी चाहिए:-

भागवत कथा करने के लिए आषाढ़, श्रावण,भाद्रपद, अश्विन, मार्गशीर्ष,अधिक मास, पितृपक्ष सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। आप इन महीने में किसी भी महीने में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन कर सकते हैं।

लिए हम आपको भागवत गीता कथा करने की विधि बताते हैं:-

हमारे हिंदू धर्म में भागवत गीता को सबसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथ माना जाता है। भगवत गीता ग्रंथ वह ग्रंथ है जो अधिक पढ़ा जाता है। मैं आपको बता दूं कि इस ग्रंथ में मानव जीवन के हर प्रश्न का उत्तर दिया जाता है।

 भागवत गीता करने के लिए सबसे पहले किसी योग्य ज्योतिषी से शुभ मुहूर्त निकलवाना पड़ता है।

 शुभ मुहूर्त निकालने के बाद भागवत गीता कथा करने के लिए जिस तरह गरीब कन्या के विवाह के लिए अन्य लोगों से सहायता लेकर धन एकत्रित करते हैं। ठीक इसी तरह भागवत गीता कथा करने के लिए भी लोगों की सहायता से धन एकत्रित किया जाता है।

और जब धन एकत्रित हो जाता है तो उसके बाद सपरिवार लोगों को भगवत गीता कथा में पधारने के लिए अनुरोध किया जाता है।

 आपने जिस जगह पर भागवत गीता कथा करने के लिए जगह का चुनाव किया है। उसे जगह को अच्छे से साफ सफाई करना चाहिए, और उसे जगह पर पुष्प और तुलसी के पौधे लगाना चाहिए।

 इसके बाद किसी योग्य भागवत गीता कथा वाचन ब्राह्मण को आमंत्रित करना चाहिए।

 इसके बाद जिस स्थान पर कथा होनी है उसके मुख्य द्वार को केले के पत्तों से सजाना चाहिए। तथा फल, फूल आदि लगाना चाहिए।

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@meenakushwaha8364 | Posted on March 9, 2026

श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भाद्रपद, आश्विन,मार्गशीष, आषाढ़, कार्तिक और श्रावण के महीने मे करानी चाहिए।इन महीनो में भागवत कथा सुनने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। भागवत कथा पौराणिक कथा मानी जाती है जो हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण होती है।

भागवत कथा आयोजन कराने के लिए आपको पंडित से मुहूर्त निकलवाना पड़ता है क्योंकि बिना मुहूर्त के भागवत कथा नहीं हो सकती है। भागवत कथा का आयोजन सोमवार से करवाना चाहिए और भागवत कथा का पाठ एक सप्ताह तक चलता है, भागवत कथा करवाने से पितृ दोष कम होते है और भगवान प्रसन्न होते है और आशीर्वाद देते है।

 श्रीमद् भागवत कथा आयोजन को सभी लोगो के सहयोग से करना चाहिए। ऐसे लोगों से सहयोग लेना चाहिए जो श्रीमद् भागवत कथा मे शामिल होने मे रूचि रखते हो। भागवत कथा कराने के लिए सबसे पहले किसी विद्वान ऋषि या ब्राह्मण से शुभ मुहूर्त निकलवाना चाहिए, इसके बाद जिस तरह से एक गरीब व्यक्ति अपनी कन्या के विवाह के लिए धन एकत्रित करता है उसी प्रकार लोगों से भागवत कथा के लिए धन एकत्रित करना होता है।

ीमद् भागवत कथा पाठ कराने के लिए सही जगह का निर्धारित करनी होती है। जैसे कि किसी पवित्र स्थल नदी के किनारे या फिर किसी मंदिर में भी भागवत कथा करवा सकते है। मंदिर या नदी के किनारे पवित्र स्थल मे जहाँ पर भागवत करवाना है वहां पर 5-6 दिन पहले साफ- सफाई करना जरुरी होता है। उस जगह को अच्छे से स्वच्छ रखना चाहिए इसके बाद भागवत कथा प्रारंभ करते समय व्यास जी महाराज के लिए एक ऊँचे जगह या व्यासपीठ बनायीं जाती है जहां से व्यास जी की कथा सभी लोगो क़ो सुनाई दें।भागवत कथा पूरे 7 दिनों तक चलती है 7वें दिन कथा का समापन होता है और भंडरे के प्रसाद का वितरण कराया जाता है।

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@kirankushwaha3551 | Posted on March 2, 2024

दोस्तों आपने भागवत कथा तो सुनी ही होगी भागवत कथा अत्यंत ही प्रिय होती है और उसमें लिखे हुए वचन सबके मन को भाते हैं। भागवत कथा कई लोग सुनते हैं तो चलिए हम बताते हैं आपको की भागवत कथा को कब सुनना चाहिए।

भागवत कथा भाद्रपद,आश्विन, कार्तिक, माघ, आसाड़ और श्रवण के महीने में करवाने से श्रेष्ठ होती है। कहते हैं कि इन महीनो में भागवत कथा सुनने से व्यक्ति को मोच की प्राप्ति होती है। भागवत कथा जब करनी चाहिए जब व्यक्ति का सौभाग्य का उदय होता है या पूर्व जन्म के संस्कार होते हैं।

 चलिए हम आपको बताते हैं की भागवत कथा किस स्थान पर करनी चाहिए। अगर हम भागवत कथा करने की सोच रहे हैं तो हमें भागवत कथा मंदिर मे , किसी बड़े विशाल मैदान मे, या अपने घर में जहां बहुत सारी जगह हो उसे जगह पर करवाना चाहिए।

 अगर हम भागवत कथा को मंदिर में करवाते हैं तो उससे हमें भागवत कथा का पूरा फल मिलता है। मंदिर में भगवान जी की मूर्ति होती है और भगवान जी की मूर्ति के सामने भागवत कथा करना अत्यंत ही शुभ माना जाता है।

भागवत कथा कराने से पहले निम्न व्यवस्था कर लें-

  1.  सबसे पहले हम 5 दिन से पहले घर के सभी लोग मिलकर भिछाने वाले वस्त्र को एकत्रित करना चाहिए।
  2.  जहां पर भागवत हो रही है उसके मुख्य द्वार पर केले का पेड़ लगा देना चाहिए।
  3.  केले का पेड़ लगाकर खाब्बो का ऊंचा मंडप बनाएं और उस मंडप को झंडियों, फूलों, फल इत्यादि से सजा दे। सजाने के बाद उस मंडप को सात लोक में बांटे एक लोक में ब्राह्मण, साधु,संत,दूसरे लोक में अन्य दूरस्थ गांव के आए हुए लोगों को,तीसरे लोक में स्वयं के गांव के लोग,चौथ लोक में अपने घर परिवार रिश्तेदार के लोग,पांचवें लोक में स्त्रियां,छटे लोक में बच्चों को बैठाए और एक लोक को श्री भगवान और देवताओं के लिए आसान खाली छोड़े दे।

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@rajeshyadav9188 | Posted on March 9, 2026

श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण और आयोजन हिंदू धर्म में परम कल्याणकारी माना गया है। वैसे तो भगवान की भक्ति के लिए हर समय शुभ है, लेकिन शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार भागवत कथा कराने के लिए कुछ विशेष समय और परिस्थितियाँ अत्यंत फलदायी मानी जाती हैं:

कथा के लिए श्रेष्ठ समय:

  • पितृ पक्ष (Pitru Paksha): अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पितृ पक्ष के दौरान कथा कराना सबसे उत्तम माना जाता है।
  • पवित्र महीने: सावन, कार्तिक, माघ और वैशाख के महीनों में कथा का आयोजन विशेष पुण्य फल प्रदान करता है।
  • अधिक मास (Malmas): पुरुषोत्तम मास या अधिक मास में भागवत कथा सुनने से अनंत गुना फल मिलता है।
  • शुभ तिथियाँ: अक्षय तृतीया, गुरु पूर्णिमा या किसी बड़े त्योहार के अवसर पर भी इसका आयोजन किया जा सकता है।

आयोजन के मुख्य कारण:

  • मनोकामना पूर्ति: यदि परिवार में सुख-शांति, संतान प्राप्ति या किसी विशेष बाधा को दूर करने की इच्छा हो।
  • पितृ दोष शांति: यदि कुंडली में पितृ दोष हो, तो श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कराना सबसे प्रभावी उपाय है।
  • आध्यात्मिक जागृति: जीवन के अंतिम पड़ाव में मोक्ष प्राप्ति और ईश्वर से जुड़ने के लिए भी कथा कराई जाती है।

निष्कर्ष: शास्त्रों के अनुसार, जब आपके मन में शुद्ध भाव जागृत हो और कथा के लिए उचित धन व समय की व्यवस्था हो जाए, वही समय "शुभ" है। बस ध्यान रखें कि कथा के दौरान नियमों का पालन और सात्विक आहार अनिवार्य है।

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