गौतम बुद्धबौद्ध धर्म के प्रवर्तक थे। इनका जीवन सभी के लिए प्रेरणा दायक है। गौतम बुद्ध के जन्म का नाम सिद्धार्थ था। वह बचपन से ही साहसी और ज्ञानी थे। उनका जन्म गणराज्य की राजधानी कपिल वस्तु के पास लुंबिनी में हुआ था। गौतम बुद्ध को लेकर एक भविष्यवाणी के कारण उनके पिता ने उन्हे राजमहल में ही रखा। उनको तपस्वी बनने से रोकने के लिए उनके पिता ने कई उपाय किये। बहुत दयालु थे ।उनसे किसी का दर्द देखा नही जाता था ।
घर के अंदर बंद गौतम के मन मे कई प्रश्न उठते थे। उनके पिता ने उनके मनोरंजन के सभी इंतेजाम महल में ही करवा दिये थे फिर उनका विवाह योशोधरा से करवा दिया था। उनका एक पुत्र भी था जिसका नाम उन्होंने राहुल रखा था।
इतना सब होने के पश्चात् भी गौतम खुश नही थे । उन्होंने अपना सांसारिक मोह छोड़ घर से चले गए।
गौतम बुद्ध ने कई वर्षो तक कठोर तपस्या की। लेकिन कोई परिणाम नही निकला। जब गौतम 35 वर्ष के हुए तब एक दिन वह एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ कर तपस्या कर रहे थे। यह पीपल का पेड़ बिहार के गया जिले में स्थित है। पीपल के वक्ष के नीचे गौतम को रात्रि में भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ। इसक बाद इस वृक्ष को बोधिवृक्ष के नाम से जाना जाने लगा।
कहा जाता हैं कि इस बोधिवृक्ष को कई बार नष्ट करने का प्रयास किया गया लेकिन यह हमेशा की तरह फिर से उग जाता है।
यह पेड़ पीढी दर पीढी हर बार नई शाखा के साथ उग जाता है । इस पेड़ की चौथी पीढ़ी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और विदिशा के बीच सलामतपुर की पहाड़ी में मौजूद है। इसकी रखवाली और सुरक्षा के लिए 24 घंटे पुलिस तैनात रहती है। इस वृक्ष की देखरेख मे हर साल लगभग 12 -14 लाख रुपये खर्च होते है।


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