चंद्र शेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 क़ो मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव भावरा जिले मे हुआ था। चंद्रशेखर आजाद के पिता जी का नाम सीताराम आजाद था, जो एक उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले के एक छोटे से गांव बदरनाक गांव मे नौकरी करते थे किसी कारण से उनकी नौकरी छूट गयी तो वह मध्यप्रदेश के भावरा चले गए तथा चंद्रशेखर की माता जी का नाम जगरानी देवी था।
चंद्रशेखर आजाद कम उम्र मे रामप्रसाद बिस्मिल के साथ वर्ष 1925 मे काकोरी कांड मे शामिल हुए। इसके बाद चंद्रशेखर आज़ाद ने 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस ऑफिसर एसपी सॉन्डर्स को गोली चलाकर लाला लाजपत राय की मौत का बदला पुलिस ऑफिसर से लिया,इन घटनाओं क़ो अंजाम दिया।
चंद्रशेखर आजाद अंग्रेजों से अकेले लड़ाई करते हुए इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में सुखदेव और अपने अन्य मित्रो के साथ बैठकर अंग्रेजो के खिलाफ योजना बना रहे थे,इस बात की जानकारी अंग्रेजों को पहले ही मिल गयी थी।जिस वजह से अचानक अंग्रेज चंद्रशेखर पर हमला कर दिया,आजाद ने अपने मित्रो क़ो वहां से जाने के लिए कह दिया और चंद्रशेखर अकेले ही अंग्रेजों से लड़ने लगे। इस लड़ाई में अंग्रेजो की गोलियों से लड़ते रहे, वह अंग्रेजो के सामने 20 मिनट तक लड़ते रहे। उसके बाद उन्होंने संकल्प लिया था कि वह कभी नहीं पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार चंद्रशेखर आज़ाद क़ो फांसी दे पाएगी,इसीलिए उन्होंने अपने इस संकल्प को पूरा करने के लिए चंद्रशेखर आज़ाद ने अपनी पिस्तौल की आखिरी गोली खुद को मार कर और मातृभूमि के लिए प्राणों क़ो न्योछावर कर दिया।
चंद्रशेखर को ‘आजाद’ नाम एक खास कारण से मिला क्योंकि ज़ब चंद्रशेखर 15 साल के थे। तब चंद्रशेखर आज़ाद क़ो किसी केस में जज के सामने पेश किया गया,ज़ब जज ने चंद्रशेखर से उनका नाम पूछा तो वह बोले ‘मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता जी का नाम स्वतंत्रता है तथा मेरा घर जेल है’। न्यायाधीश चंद्रशेखर के साहसी उत्तर से क्रोधित हो गए और उन्हें 15 कोड़ों की सजा सुनाई। यहीं से "आजाद" नाम उनसे जुड़ गया, जो उनके अदम्य स्वभाव का प्रतीक बन गया।






