यह पातालकोट नाम से ही स्पष्ट है कि यह पाताल में बसा हुआ गांव है । मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से 78 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान 12 गांवों का समूह है जो प्राकृतिक की गोद में बसा यह पाताल लोक सतपुड़ा की पहाड़ी के बीच 3000 फुट की ऊंचाई पर्वत श्रंखला क़ी तीन ओर से घिरा हुआ है। और यह सतपुड़ा की पहाड़ियों और घनघोर जंगलों से घिरा होने से इसके काफी हिस्से भी सूरज की रोशनी दोपहर में नहीं पहुंचती है वह भी इतनी कम कि दिन में भी रात नजर आती है बारिश के समय मे बादल भी इस घाटी में दिखाई नहीं देते हैं और यहां आगमन के कोई साधन भी नहीं है चारों ओर जीव जंतु फैले हुए
रहते हैं.।
हमारे दुनिया में ऐसी कई जगह है जो विज्ञान के लिए सदेन्ह हैं!ऐसी ही एक जगह मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हैं! और इस गांव को पता लोग के नाम से जाना जाता है! 89 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई एक घाटी है,जो हमारे देश के लिए सदियों से ही अनजान है, और पताल लोक में 12 गांव बसे हुए हैं और वह जमीन के नीचे 1700 फिट में रहते हैं! बाहर की दुनिया के लिए पाताल लोक के संपर्क ज्यादा नहीं हुआ और इनमें से ऐसे भी गांव हैं, जहां पहुंचना आज ही संभव नहीं है, जमीन की काफी नीचे गहराई होने के कारण,और विशाल पहाड़ों के कारण,वहां सूर के कितने तक नहीं पहुंच सकते तो मानव क्या पहुंचेगा!
आज भी हमारे पृथ्वी पर ऐसे बहुत से गांव है जो पाताल लोक में बसे हुए हैं जिनका केवल हम नाम है सुनते आ रहे हैं और देखने को नहीं मिलते हैं चलिए जानते हैं कि कौन-कौन से गांव पाताल लोक में बसे हुए हैं।
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले करीब 78 किलोमीटर दूर स्थित इस स्थान को पातालकोट के नाम से जाना जाता है यहां पर 12 गांव का समूह है जो पहाड़ियों पर स्थित है इसके अलावा पातालकोट में औषधियों का खजाना है इसके अलावा यहां पर तीन ऐसे गांव जहां सूरज की किरणें तक नहीं पहुंच पाती हैं।
चलिए आज हम जानते हैं कि हमारे मध्य प्रदेश में ऐसे कौन से गांव है जो पाताल लोक में बसे हुए हैं। हमारे मध्य प्रदेश के एक शहर पातालकोट को ही पाताल लोक माना जाता है। यहां पर सूर्य की रोशनी भी नहीं पहुंच पाती है क्योंकि यह गांव बहुत ही नीचे स्थित है।ऐसा कहा जाता है कि इस पाताल लोक में कम से कम 12 गांव हैं जो धरातल के निचले भाग में स्थित है। यह पृथ्वी के 3000 किलोमीटर जाकर स्थित गांव बसे हुए हैं। 





