क्या आप जानते हैं कि महाकालेश्वर मंदिर में किस भस्म का उपयोग किया जाता है शायद आपको इसकी जानकारी नहीं होगी तो कोई बात नहीं चलिए हम आपको इसकी जानकारी देते हैं:-
दोस्तों मैं आपको बता दूं कि महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में स्थित है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भगवान शिव की भस्म आरती केवल उज्जैन के महाकालेश्वर में ही होती है और कहीं नहीं। इस आरती को बिल्कुल अलग ढंग से किया जाता है। दोस्तों मैं आपको बता दूं कि इस आरती को सुबह 4:00 के वक्त में किया जाता है। और यह आरती चिता के ताजी राख से की जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि महाकालेश्वर मंदिर में आरती के लिए किस भस्म का प्रयोग किया जाता है शायद आप नहीं जानती होंगी हम आपको बताते हैं कि बहुत से श्रद्धालुओं को लगता है कि बाबा पर भस्म चीता की ताजी राख से होती है। तो मैं आपको बता दूं कि ऐसा नहीं होता है। महाकालेश्वर के पुजारी महेश बताते हैं कि बाबा जी की जो आरती होती है उसे मंगला आरती कहा जाता है। और जो भस्म होती है वह शुद्ध पांच कंडे की राख की रहती है। दोस्तों जब महाकाल की आरती होती है तो महाकाल बाबा को उठाने के लिए ढोल नगाड़े बजाए जाते हैं। बताया जाता है कि बरसों पहले महाकाल की आरती के लिए शमशान से भस्म लाने की परंपरा थी लेकिन अब यह परंपरा बहुत सालों से बंद हो चुकी है। अब बाबा महाकाल की आरती करने के लिए काफिला गाय के गोबर से बने कंडे, सामी पीपल पलाश और अमलतास आदि लड़कियों को जलाकर तैयार किए गए भस्म का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार मैंने आपको जानकारी दे दी है कि महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव की आरती करने के लिए किस भस्म का प्रयोग किया जाता है।





