आइये हम आपको बताते हैं कि होलिका दहन के समय कौन सा अनाज जलाया जाता है :-
मार्च का महीना प्रारंभ हो गया है होलिका दहन की तैयारी वैसे तो होली के 8 दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। जब होलास्ट लगता है। इसी दिन से होलिका दहन के लिए लकड़िया इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं। होलिका की रात का शास्त्रों में बहुत ही महत्व बताया गया है। इतना ही नहीं लोगों का मानना है कि होलिका की पूजा करने के बाद होलिका दहन करना चाहिए। और इसके साथ परिक्रमा करनी चाहिए इससे रोग और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कोसो दूर रहते है।
मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि होलिका की अग्नि जल जाने पर उसमें मिठाइयां एवं सात प्रकार के अनाज और गेहूं की बालियां भी डालने की परंपरा होती है। लेकिन बहुत थी कम लोग इस परंपरा को जानते हैं। तो चलिए हम आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं।
कहां जाता है की होली दहन की अग्नि में गेहूं की साथ बालियों की आहुति दी जाती है। और बहुत ही कम लोगों को इस 7 के पीछे के मान्यता की नहीं पता होगी। तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि 7 का अंक शुभ माना जाता है इसलिए सप्ताह में 7 दिन और विवाह में सात फेरे होते हैं। यही कारण है कि लोग गेहूं की साथ बालियां होलीका में डालते है।
होलिका दहन पर अग्नि देव की पूजा की जाती है इस बात को तो आप जानते ही हैं। और इसमें अनाज धान की बाली उपले आदि डाला जाता है। होलिका दहन फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। ऐसी मानता है कि इस दिन सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश अग्नि में हो जाता है। होलिका दहन के दिन मांस मदिरा का सेवन भूल कर भी नहीं करना चाहिए।






