नदियों को जीवन दायनी कहाँ जाता हैं क्योकि यह कई किसानो के आय का साधन होती हैं। हिंदुओ के लिए नदिया पूज्यनीय है। नदियों को देवी का दर्जा प्राप्त है। गंगा, यमुना, सरस्वती नदियाँ प्रमुख रूप से प्रसिद्ध है।
पहले के समय मे नदियों के किनारे शांत वातावरण मे तपस्वी अपनी तपस्या करते थे। ज्ञान का प्रचार प्रसार करते थे। मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर की भस्म को भी इन्ही नदियों मे प्रवाहित करके हम सुखी होते है क्योकि यह हमारे लिए पूज्यनीय है। भारत मे कुल 200 नदियाँ है।
लेकिन क्या आपने काली नदी का नाम सुना है? यदि नही सुना है तो आज हम आपको काली नदी के बारे बतायेंगे।
काली नदी उत्तराखंड की खास नदी मानी जाती हैं। यह लिम्पियाधुरा जगह से निकलती हैं। इस नदी का नाम माँ काली के नाम से मिला। इस नाम के पीछे कई कथाये प्रचलित है। काली नदी को शारदा नदी, कालीगंगा और महाकाली के नाम से जाना जाता हैं।
यह नदी सबसे खास इसलिए मानी जाती हैं क्योकि आगे चलकर यह सरयू नदी में मिलती हैं और सहायक नदी का रूप ले लेती है। इसके साथ अन्य छह नदियाँ धौली, कुटी, रामगुण, लढीया, चमेलिया, गोरी नदी भी सहायक नदियों की श्रेणि मे आती हैं। लेकिन काली नदी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है जिसकी वजह से इसे राज्य चिन्ह मे भी दर्शाया जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार माँ काली ने यहाँ घोर तपस्या की जिसकी वजह से उनका बहुत पसीना निकला और इस नदी का निर्माण हुआ और माँ काली ने इस नदी को शारदा नदी कहा। असुरो का नाश करने के बाद महाकाली ने इसी नदी मे अपने शरीर पर लगे असुरो के लगे रक्त को धोया था।
कहाँ जाता हैं की शारदा नदी में स्नान करने के पश्चात ही महाकाली का दर्शन किया जाता हैं। शारदा नदी को महाकाली के समान ही पूजा जाता है।




