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Updated on Mar 23, 2024education

काली नदी किसे कहा जाता है?

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Answered on Mar 23, 2024

दोस्तों मैं आपको बता दूं कि हमारे भारत देश में नदियों को हमेशा मां का दर्जा दिया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। क्योंकि नदियां किसकों की खेती के लिए साधन होती है। नदिया देश के लिए जीवनदायक के रूप में काम करती हैं  यही वजह है कि आज भी कई बड़े शहर प्राचीन समय की तरह नदियों के किनारे ही बसते हैं। आप सभी ने गंगा यमुना,कावेरी,गोदावरी नदी,के बारे में सुना होगालेकिन क्या आपने कभी काली नदी के बारे में सुना है यदि आपने इस नदी के बारे में नहीं सुना है तो चलिए आज हम आपको काली नदी का इतिहास बताते हैं।

चलिए हम आपको बताते हैं की काली नदी किसे कहा जाता है।

  मैं आपको बता दूं कि उत्तराखंड में तो वैसे कई सारी नदियां निकलती हैं। लेकिन काली नदी को बेहद खास माना गया है। यह नदी उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों मे मुख्य रूप से बहने वाली काली नदी हिमालय से निकलती है। यह नदी समुद्र तल से लगभग 500 मीटर से भी अधिक की ऊंचाई पर मौजूद लंपियाधुरा नामक स्थान से निकलती है। बताया जाता है कि लिपू लिख दर्रे के निकट 

 भारत और तिब्बत की सीमा पर स्थित है। काली माता के एक मंदिर से इसे अपना नाम मिला है। दोस्तों मैं आपको बता दूं की काली नदी की लंबाई 350 किलोमीटर है। काली नदी को और भी कई सारे नाम से जाना जाता है जैसे की महाकाली, शारदा और काली गंगा के नाम से विख्यात है।

 कहा जाता है की काली नदी दो देश भारत और नेपाल को अलग करती है। क्योंकि काली नदी का मूल स्रोत भारत और तिब्बत की सीमा पर लिपुलेख दर्रे के निकट कला पानी को माना जाता है। और फिर आगे चलकर तिब्बत और नेपाल देश को  अलग करती है। और तो और कुछ महीने पहले इसी नदी को लेकर भारत नेपाल के बीच एक बहुत बड़ा विवाद खड़ा हुआ था।

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Updated on Mar 22, 2024

नदियों को जीवन दायनी कहाँ जाता हैं क्योकि यह कई किसानो के आय का साधन होती हैं। हिंदुओ के लिए नदिया पूज्यनीय है। नदियों को देवी का दर्जा प्राप्त है। गंगा, यमुना, सरस्वती नदियाँ प्रमुख रूप से प्रसिद्ध है। 

 

पहले के समय मे नदियों के किनारे शांत वातावरण मे तपस्वी अपनी तपस्या करते थे। ज्ञान का प्रचार प्रसार करते थे। मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर की भस्म को भी इन्ही नदियों मे प्रवाहित करके हम सुखी होते है क्योकि यह हमारे लिए पूज्यनीय है। भारत मे कुल 200 नदियाँ है।

 

लेकिन क्या आपने काली नदी का नाम सुना है?  यदि नही सुना है तो आज हम आपको काली नदी के बारे बतायेंगे। 

 

काली नदी उत्तराखंड की खास नदी मानी जाती हैं। यह लिम्पियाधुरा जगह से निकलती हैं। इस नदी का नाम माँ काली के नाम से मिला। इस नाम के पीछे कई कथाये प्रचलित है। काली नदी को शारदा नदी, कालीगंगा और महाकाली के नाम से जाना जाता हैं। 

 

यह नदी सबसे खास इसलिए मानी जाती हैं क्योकि आगे चलकर यह सरयू नदी में मिलती हैं और सहायक नदी का रूप ले लेती है। इसके साथ अन्य छह नदियाँ धौली, कुटी, रामगुण, लढीया, चमेलिया, गोरी नदी भी सहायक नदियों की श्रेणि मे आती हैं। लेकिन काली नदी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है जिसकी वजह से इसे राज्य चिन्ह मे भी दर्शाया जाता है। 

 

पौराणिक कथाओं के अनुसार माँ काली ने यहाँ घोर तपस्या की जिसकी वजह से उनका बहुत पसीना निकला और इस नदी का निर्माण हुआ और माँ काली ने इस नदी को शारदा नदी कहा। असुरो का नाश करने के बाद महाकाली ने इसी नदी मे अपने शरीर पर लगे असुरो के लगे रक्त को धोया था। 

कहाँ जाता हैं की शारदा नदी में स्नान करने के पश्चात ही महाकाली का दर्शन किया जाता हैं। शारदा नदी को महाकाली के समान ही पूजा जाता है। 

 

 

 

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