चलिए दोस्तों आज हम आपको गीता का सबसे प्रेरक श्लोक बताते हैं कि गीता का सबसे प्रेरक श्लोक कौन सा है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि गीता में हर कविता का हाल दिया होता है और गीता में ऐसे कई श्लोक हैं जिनको पढ़कर और समझ कर हम अपनी जिंदगी में सुधार कर सकते हैं।गीता के सभी श्लोक में एक सबसे प्रेरक श्लोक है जिसके बारे में मैं बता रही हूं कि वह सबसे प्रेरक श्लोक कौन सा है।गीता का सबसे प्रेरक श्लोक निम्न है -
सर्वधर्मापरित्याज्य ममेकां शरणमव्रज।
अहं त्वम सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:।।
इस श्लोक में श्री कृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं कि हे अर्जुन तुम सभी धर्म को त्याग कर अर्थात हर आश्रय को त्याग कर केवल मेरी शरण में आ जाओ मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्ति दिला दूंगा इसलिए तुम्हें तुम शक मत करो।
चलिए मैं गीता के ऐसे और श्लोक के बारे में बता रही हूं जिनसे हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं-
कर्मणेवाधिकारस्ते मा फलेषु कदचन।
मा कर्मफलहेतुर्भोूर्मा सांगड़ोस्तवकर्मणी।
इसमें श्री कृष्ण जी उपदेश देना चाहते हैं किकर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है कर्म के फलों पर नहीं इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो। अगर आप कर्म करते रहते हैं तो आपको फल अवश्य मिलेगा इसलिए कम आप करते रहिए फल की चिंता मत करिए।
गीता में एक और अच्छा श्लोक है -
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदत्मानम सृजाम्यहम्।।
इस श्लोक के माध्यम से श्री कृष्ण का कहना है कि जब-जब भारत में धर्म की ग्लानि अर्थात हानि याधर्म उसका लोप होता है और अधर्म में वृद्धि अर्थात बढ़ोतरी होती है तब तब मैं धर्म के उत्यान के लिए स्वयं की रचना करता हूं अर्थात धर्म के उत्थान के लिए अवतार लेता हूं।
ऐसे ही गीता में और कई सारे प्रेरक श्लोक हैं जो आपको प्रेरक कर सकते हैं और आपकी जिंदगी में सुधार ला सकते हैं।