भगवान राम की जन्म भूमि आयोध्या है। 22 जनवरी 2024 के दिन आयोध्या मे भगवान राम की प्राणप्रतिष्ठा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदीजी के द्वारा की गई।
राम के आयोध्या वापस आने पर सभी भारतवासियो मे खुशियों की लहर दौड़ गई थी। सभी ने अपने प्रिय राम का स्वागत दीप जलाकर किया।
आयोध्या मे सभी भक्त राम जी की प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी बने।
आयोध्या में भगवान राम का मन्दिर बड़ा ही भव्य बनाया गया है। मन्दिर के पास ही एक नदी बहती है , जिसका नाम सरयू नदी है।
कहा जाता हैं की सरयू नदी मे स्नान मात्र से सभी तीर्थो का फल एक बार में ही मिल जाता हैं। यह नदी आयोध्या के उत्तर दिशा मे बहती है। सरयू नदी में शारदा और गंगा दोनो नदी का समावेश होता है।
बृह्म् मुहूर्त मे इस नदी पर स्नान करने से पापो से मुक्ति मिलती हैं और सभी तीर्थो और उनके दर्शन का फल प्राप्त हो जाता है।
सरयू नदी की उत्पत्ति की पौराणिक कथा भी प्रचलित है जिसके अनुसार, असुर शंखासुर दैत्य था। वह संपूर्ण ज्ञान अर्जित करना चाहता था इसलिए उसने बृह्मा जी के पास से सभी वेदो को चुरा लिया और वहा से भाग गया। भागकर वह समुद्र के अंदर चला गया और वहाँ वेदो को छुपा दिया। पकड़ा ना जाए इस डर से वह खुद भी उसी समुद्र मे छिप गया।
बृह्म जी भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने मत्स्य का रूप धारण करके असुर शंखासुर को ढूढ़ कर उसका वध कर दिया। और वेदो को बृह्मा जी को लौटा दिये। वेदो को देते समय विष्णु भगवान की आँखो से आँसू बहने लगे। बृह्मा जी ने उन आँसुओ को ले कर मानसरोवर मे मिला दिया । लेकिन कुछ वर्षो के पश्चात जब यह बात वैवस्वत को पता चली तो वह उस अश्रुओ को प्राप्त करने के उद्देश्य से मानसरोवर के पास पहुँचा और बाण से मानसरोवर मे प्रहार किया जिसके फलस्वरूप एक जलधारा की उत्पत्ति हुई जिसका नाम सरयू हुआ।
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