दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको गुर्जरों की कुलदेवी के बारे में बताने वाले हैं। गुर्जरों की कुलदेवी कौन और कहां स्थित है यह जानने से पहले आपका यह जान लेना बेहद जरूरी है कि आखिर गुर्जर होते कौन है।
दरअसल गुर्जर समाज एक प्राचीन समाज है। इस गुर्जर जाति का नाम मुख्यतः अफगानिस्तान के राष्ट्रगान से आता है। अभिलेखों के अनुसार गुर्जर सूर्यवंशी या रघुवंशी कहलाए जाते हैं लेकिन मुगल और अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने के कारण गुर्जरों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी जिसके कारण अपनी जीविका चलाने के लिए गुर्जर समाज को खेती और पशुपालन के व्यवसाय से जुड़ना पड़ा। वर्तमान भारतीय सैनिकों में गुर्जर जाति की अधिकता देखने को मिलती है क्योंकि गुर्जर जाति के लोगों के भीतर शुरू से देश भक्ति होने की बात कही जाती है। राजस्थान में आज भी गुर्जर समाज को सम्मान के तौर पर मिहिर कहा जाता है। "मिहिर" का अर्थ "सूर्य" होता है। अगर संस्कृत के विद्वानों की बात माने तो गुर्जर एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब शत्रु विनाशक या शत्रु का नाश करने वाला होता है। गुर्जर समाज मुख्यतः उत्तर भारत में बसे हुए हैं इसके अलावा पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी गुर्जर जाति के लोगों के बसे होने की बात कही जाती है। अगर भारत की बात करें तो गुर्जर जाति के लोग उत्तर प्रदेश, पंजाब हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, गुजरात जैसे इलाकों में अधिक रहते हैं तथा गुर्जर हिंदू, सिख, मुस्लिम सभी धर्म के होते हैं लेकिन राजस्थान में रहने वाले सारे गुर्जर हिंदू है। बात अगर हिंदू समाज में रहने वाले गुर्जरों की करें तो गुर्जर जाति के लोग शक्ति पूजा में अधिक विश्वास रखते हैं। शक्ति पूजा में विश्वास रखने के कारण ही गुर्जर जाति के लोग माँ चामुंडा को बहुत अधिक सम्मान देते हैं तथा माँ चामुंडा को ही वह अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। सरल शब्दों में कहे तो गुर्जरों की कुलदेवी मां चामुंडा ही है क्योंकि माँ चामुंडा को शक्ति का अवतार माना जाता है।
माँ चामुंडा माता दुर्गा का ही एक रूप है। पार्वती जी के शरीर से प्रकट होने के कारण पहले मां चामुंडा का नाम कौशिकी था परंतु शुंभ निशुंभ नामक तो महाबलशाली असुरों का संहार करने के बाद इनका नाम माँ चामुंडा पड़ गया। माँ चामुंडा के बेहद रौद्र और शक्तिशाली रूप के कारण ही गुर्जरों में माँ चामुंडा अधिक पूजनीय है तथा गुर्जरों की कुलदेवी के रूप में माँ चामुंडा की पूजा की जाती है। गुर्जरों के निवास का मूल स्थान राजस्थान को माना गया है तथा राजस्थान के सभी गुर्जर हिंदू है इसलिए मां चामुंडा की सबसे प्रमुख चामुंडा देवी मंदिर राजस्थान में ही स्थित है। यह चामुंडा देवी मंदिर राजस्थान के नागौर जिले में स्थित है जिसकी पूजा गुर्जर समाज अपने कुलदेवी के रूप में करता है। नागौर जिले का चामुंडा देवी मंदिर पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास ही स्थित है। राजस्थान में गुर्जरों की संख्या अधिक होने के कारण ही इस चामुंडा देवी मंदिर को गुर्जर समाज की कुलदेवी के रूप में मुख्य स्थान दिया गया है।
इसके अलावा देशभर में और भी कई सारे चामुंडा देवी मंदिर स्थित है जिसमें हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित चामुंडा देवी का नाम सर्वप्रथम आता है। जानकारी के लिए बता दे कि हिमाचल को देवभूमि भी कहा जाता है तथा कांगड़ा जिले के अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश में और भी ऐसे अनेक चामुंडा देवी मंदिर है जिसे गुर्जर समाज के लोग अपने कुल देवी के रूप में पूजते हैं। इतना ही नहीं हिमाचल के अलावा देश के लगभग हर जिले जहां-जहां गुर्जरों का निवास है वहां चामुंडा देवी का मंदिर अवश्य देखने को मिलता है और गुर्जर समाज द्वारा चामुंडा देवी को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजने की बात भी सच साबित होती है।







