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Anushka

Updated on Apr 1, 2024others

हनुमान बाहुक के रचनाकार कौन है?

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Answered on Mar 30, 2024

हनुमान बाहुक के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी है। हनुमान बाहुक की रचना तुलसीदास जी ने उस समय की थी जब वह खुद रोगों से पीड़ित थे और वात रोग से पूरी तरह पीड़ित और ग्रस्त होते हुए उन्हे हनुमान जी की शक्तियों का भास हुआ और उन्होंने अपनी पीड़ा को हनुमान बाहुक मे लिखना प्रारंभ किया। हनुमान जी की शक्तियों के सामने अपने रोग को छोटा बताया और हनुमान बाहुक के अंत तक उनके रोग पूरी तरह खत्म हो गए थे। 

हम जब कभी निराश, चिंतित, और बेसहारा महसूस करते है तो भगवान की शरण मे ही जाते है। और अपनी सारी चिंताएं , परेशानियाँ उनके सामने रख देते है। 

हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान प्राप्त है। कहा जाता है कि जब भी कभी हमे शारीरिक या मानसिक रोग हो या परेशानिया हो तो हमे हनुमान बाहुक का पाठ करना चाहिए। 

यह एक महा मंत्र है जिससे हमारे सभी कष्टो का निवारण होता है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती हैं। 

 

हनुमान बाहुक का पाठ करने के नियम - 

हनुमान बाहुक का पाठ प्रति मंगलवार को करना अच्छा माना जाता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त मे उठ कर अपने नित्य कर्मो को करने के पश्चात स्नान करने के पश्चात हनुमान जी के समक्ष जल का एक लौटा ले उसमे तुलसी के पत्ते को डाल दे। फिर एकाग्र मन से संकल्प ले कर हनुमान बाहुक का पाठ करे। तत्पश्चात लौटे के जल को हाथ मे लेकर ग्रहण करे। ऐसा 21 मंगलवार करने से रोगों का नाश होता है और शरीर मे सकारात्मकता आती हैं। मन से बुरे विचारो से छुटकारा मिलता है । 

हनुमान जी बहुत ही दयालु है उनका स्मरण जो भी करता है वह निश्चित ही उनके सारे रोग और परेशानियों को दूर कर देते है। सच्चे भक्ति भाव से हनुमान बाहुक का पाठ करने से निश्चित कष्टो का नाश होता है। 

 

 

 

 

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