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komal Solanki's avatar
Mar 10, 2026entertainment

शादी के मंडप मे चार खंबे ही क्यु होते है?

5 Answers
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@anjalipatel3903Oct 18, 2023

शादी के मंडप में चार खंबे ही क्यों होते हैं क्या आपने कभी इस बात के बारे में सोचा है। यदि आपको इसके बारे में जानकारी नहीं है तो चलिए आज हम आपको इसकी पूरी जानकारी देते हैं।

शादी में मंडप का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है इसके बिना शादी की कल्पना नहीं की जा सकती।तो चलिए जानते हैं कि आखिर शादी के मंडप पर चार खंबे ही क्यों होते हैं धर्म ग्रंथों के अनुसार, व्यक्ति के जीवन में चार चरण होते हैं: , ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और आखिर में संन्यास।मंडप के चार स्तंभ जीवन के इन्हीं चार चरणों का प्रतीक माने जाते हैं। साथ ही, यह पंच तत्व को भी दर्शाते हैं। इसके अलावा यह चार प्रकार के स्तंभ , वायु, पृथ्वी जल और आकाश को भी दर्शाते हैं इस प्रकार पहले से ही मंडप में चार खंबे को बनाने का रिवाज़ चला आ रहा है।

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और पढ़े- आपको कैसी शादी पसंद है लव मैरिज या अरेंज मैरिज?

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@aanyasingh3213Oct 27, 2023

हमारे हिंदू धर्म में जब भी शादी विवाह होता है तो मंडप अवश्य लगाया जाता है, जिनमें चार खंबे लगे हुए होते हैं, क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है की शादी के मंडप में चार खंबे ही क्यों होते हैं चार के अलावा 6 या 7 खम्भे भी तो हो सकते हैं लेकिन 4 ही खंबे जरूरी क्यों होते हैं? चलिए शास्त्रों के अनुसार इसकी जानकारी प्राप्त करते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है?धर्म ग्रंथों के अनुसार, व्यक्ति के जीवन में चार चरण होते हैं: , ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और आखिर में संन्यास।मंडप के चार स्तंभ जीवन के इन्हीं चार चरणों का प्रतीक माने जाते है। हम हिन्दू धर्म के लोग हैं इसलिए हमारे यहां बिना मंडप की शादी की कल्पना भी नहीं की जा सकती है यदि मंडप नहीं लगाया जाएगा तो शादी भी नहीं होगी, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो हमारे उत्तर को लाइक अवश्य करें।

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@shikhapatel7197Oct 27, 2023

दोस्तों चलिए आज आपको हम इस आर्टिकल में बताएंगे कि शादी के मंडप में चार खंबे ही क्यों होते हैं यदि आपको नहीं पता तो आप इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें।धर्म ग्रंथों के अनुसार, व्यक्ति के जीवन में चार चरण होते हैं: ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और आखिर में संन्यास। मंडप के चार स्तंभ जीवन के इन्हीं चार चरणों का प्रतीक माने जाते हैं। साथ ही, यह पंच तत्व को भी दर्शाते हैं। शादी के मंडप में हमेशा चार खंबे रहते हैं।और मंडप का मतलब महज आम के पत्ते लगा फूस का छप्पर भर नहीं होता, इसके साथ साक्षी होते हैं हिन्दू और वे देवता जिनका आह्वान करके उन्हें बुलाया जाता है।और फिर देवता नए जीवन में प्रवेश करने वाले वर-वधू को अपना आशीर्वाद देते हैं और उनके वैवाहिक बंधन के साक्षी बनते आशीर्वाद देते हैं कि सदा सुहागन रहो जिससे उनका वैवाहिक जीवन अच्छे से व्यतीत होता है।Article image

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@krishnapatel8792Oct 28, 2023

अक्सर अपने शादियों में देखा होगा की जहां पर लड़का और लड़की की शादी होती है वहां पर चार खंबे होते हैं उसी के अंदर लड़के और लड़की का विवाह होता है तो ऐसा क्यों होता है कि चार ही खंबे होते हैं तो चलिए जानते हैं।

हिंदू धर्म में मंडप का खास महत्व है जहां तारों की छाया में दूल्हा-दुल्हन फेरे लेकर सात जन्मों के बंधन में बंध जाते हैं। यह माना जाता है कि शुभ कार्य घरों की चार दीवारी में किया जाना चाहिए। ऐसा करने से समृद्धि आती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, व्यक्ति के जीवन में चार चरण होते हैं: , ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और आखिर में संन्यास। मंडप के चार स्तंभ जीवन के इन्हीं चार चरणों का प्रतीक माने जाते हैं। साथ ही, यह पंच तत्व को भी दर्शाते हैं। इसके अलावा यह चार प्रकार के स्तंभ , वायु, पृथ्वी जल और आकाश को भी दर्शाते हैं इस प्रकार पहले से ही मंडप में चार खंबे को बनाने का रिवाज़ चला आ रहा है।

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@rameshkumar7346Mar 10, 2026

हिंदू धर्म में विवाह एक अत्यंत पवित्र संस्कार है और शादी का मंडप उस स्थान का प्रतीक है जहाँ अग्नि को साक्षी मानकर दो आत्माओं का मिलन होता है। मंडप की संरचना में चार खंभों का होना मात्र वास्तुकला नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व रखता है।

चार खंभों का मुख्य अर्थ:

  • पुरुषार्थ के चार स्तंभ: हिंदू दर्शन के अनुसार मनुष्य के जीवन के चार मुख्य आधार या 'पुरुषार्थ' होते हैं— धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। मंडप के चार खंभे इन्हीं चार उद्देश्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह इस बात का संकेत है कि गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने वाले जोड़े को इन चारों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
  • चार वेद: ये खंभे चारों वेदों— ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के भी प्रतीक माने जाते हैं। इसका अर्थ है कि विवाह का बंधन ईश्वरीय ज्ञान और मर्यादाओं के संरक्षण में संपन्न हो रहा है।
  • चार अवस्थाएँ (आश्रम): कुछ मान्यताओं के अनुसार, ये जीवन की चार अवस्थाओं— ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास को भी दर्शाते हैं, जिनमें से गृहस्थ आश्रम सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
  • दिशायें और स्थिरता: चार खंभे चारों दिशाओं से सुरक्षा और जीवन की स्थिरता का प्रतीक हैं। यह दर्शाता है कि विवाहित जोड़ा हर परिस्थिति में एक-दूसरे का आधार बनकर खड़ा रहेगा।

निष्कर्ष: मंडप के ये चार स्तंभ दूल्हा और दुल्हन को यह याद दिलाते हैं कि उनका वैवाहिक जीवन केवल प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्तव्यों, नैतिकता और आध्यात्मिक उन्नति का एक साझा मार्ग है।

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