मानव किसी भी चीज को देखने के लिए आध्यात्मिक, तार्किक या भावनात्मक आदि दृष्टिकोण का उपयोग करता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसले भावनात्मक दृष्टिकोण से लेते हैं। परंतु कभी-कभी हमारे अंदर की भावनाएं हमारे दृढ़ विश्वास को कमजोर कर देती हैं, क्योंकि अक्सर मानव भावनाओं में बहकर तर्क को अनदेखा करके निर्णय ले लेता है। और निर्णय लेने के बाद पछताता है परंतु हर बार ही ऐसा हो यह संभव नहीं है। 
कभी-कभी भावनाएं हमारे दृढ़ विश्वास को भी क्यों कमजोर कर देती हैं?
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A
@arjunkumar7099 | Posted on August 28, 2021
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