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Satindra Chauhan's avatar
Dec 28, 2021others

हम भगवान के चारों ओर परिक्रमा क्यों करते हैं?

6 Answers
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@rajnipatel6804Nov 26, 2021


हमें परिक्रमा से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है धर्म शास्त्रों के अनुसार जब हम किसी मंदिर या भगवान के चारों ओर परिक्रमा करते हैं तो सकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करती हैं!

परिक्रमा शुरू करने के बीच हमें नहीं रुकना चाहिए और परिक्रमा वही खत्म करें जहां से शुरू की थी मेरा मानना कि परिक्रमा बीच में रोकने से वह पूर्ण नहीं मानी जाती है
भगवान की परिक्रमा करते समय हमें किसी से बातचीत नहीं करना चाहिए जिससे आपकी पूजा संपन्न हो!
हमें भगवान की परिक्रमा उल्टी तरफ से नहीं करना चाहिए!
इस प्रकार से देवी-देवताओं की परिक्रमा विधि सहित करने से आपके जीवन की समस्याओं का समाधान होगा!Article image

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@setukushwaha4049Nov 26, 2021

आप सभी ज़ब कभी भी मंदिर जाते है तो लेडीजो और लड़कियों को अक्सर देखते है कि वह किसी भगवान की मूर्ति के चारो ओर परिक्रमा करते हुए नज़र आती है। भगवान की मूर्ति चारो तरह परिक्रमा करने से उस व्यक्ति की बॉडी मे पॉजिटिव एनर्जी प्रवेश कर जाती है जो सिर्फ उसके बॉडी मे ही नहीं उसके साथ ही वह व्यक्ति जैसे ही अपने घर के अंदर प्रवेश करता है उसके घर मे भी पॉजिटिव एनर्जी आ जाती है जिससे उसके घर मे सुख, शांति, समृद्धि हमेशा बनी रहती है। और उनके ऊपर आने वाले हर एक संकट से उसकी रक्षा करता है भगवान का आशीर्वाद सदा उसके ऊपर बना रहता है।

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@komalsolanki9433Nov 27, 2021

हिन्दू धर्म के अनुसार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक शास्त्रो के अनुसार मंदिर या भगवान की चारो ओर परिक्रमा करने से सकारात्मक ऊर्जा शरीर में उत्पन्न होती हैं। इस ऊर्जा को जब हम घर ले जाते है तो नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। जिससे घर में सुख शांति आती हैं । परिक्रमा करने से मन को सुकून प्राप्त होता है और मन अच्छे विचारो को मन मे लाता है। Article image

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@preetipatel2612Nov 27, 2021

जब कोई व्यक्ति धर्म शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी मंदिर या भगवान की प्रतिमा के चारों तरफ परिक्रमा करता है, तो उस व्यक्ति को मन की शांति प्राप्त होती है!और उसे सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है!

किसका दार्शनिक महत्व काफी अधिक होता है : हमारे जीवन में दार्शनिक महत्व भी एक संपूर्ण ब्रह्मांड का हर एक ग्रह नक्षत्र कोई ना कोई तारे की परिक्रमा करता है। और यही परिक्रमा हमारे जीवन का सत्य कहलाता है। क्योंकि व्यक्ति का सारा जीवन एक चक्र कहलाता है! और इसी जीवन चक्र को समझने के लिए परिक्रमा जैसे चिन्ह का निर्माण किया गया है।
हमारे हिंदू धर्म में परिक्रमा को काफी अधिक महत्व दिया जाता है! जब कोई व्रत पूजा होती है, तो लोग भगवान की चारों ओर परिक्रमा करते हैं! जिससे मन की शांति और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है! भगवान की परिक्रमा करते हुए लोग मन्नते भी मांगते हैं!Article image

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@krishnapatel8792Dec 25, 2021

हिंदू धर्म में परिक्रमा का बड़ा ही महत्व है। क्योंकि परिक्रमा करने का मतलब होता है कि हमने पूरी सृष्टि का परिक्रमा कर लिया है। परिक्रमा को जीवन से जोड़ा गया है क्योंकि यह जीवन एक परिक्रमा की तरह होता है इसलिए हमें भगवान का परिक्रमा करने से यह समझा जाता है कि हमने पूरी सृष्टि का परिक्रमा कर लिया है। भगवान शिव की परिक्रमा अर्थ परिक्रमा की जाती है गणेश जी की चार परिक्रमा किए जाते हैं सूर्य देव के साथ परिक्रमा की जाती है और मां दुर्गा की एक परिक्रमा की जाती है और भगवान विष्णु के 4 परिक्रमा किए जाते हैं। जब कोई व्रत पूजा की जाती है तो लोग भगवान की परिक्रमा करते हैं जिससे हमारे घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है लोग परिक्रमा करते वक्त भगवान से मन्नते भी मांगते हैं ।Article image

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@aanchalsingh1985Dec 28, 2021

हिंदू धर्म के अनुसार शास्त्रों में धार्मिक मान्यताओं में जब कोई भी व्यक्ति मंदिर के चारों ओर भगवान या मूर्ति की परिक्रमा करता है तो इसमें सकारात्मक ऊर्जा शक्ति की प्राप्ति होती है और इसके साथ ही मंदिर या किसी शक्ति स्थान की परिक्रमा करने से मन शांत होता है और जीवन में खुशियां आती है। अक्सर हमें यह बात को भी याद रखना चाहिए कि परिक्रमा करते समय हमेशा हमें दाहिने हाथ की ओर से शुरू करना चाहिए क्योंकि जो प्रतिमाओं में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा शक्ति होती है वह उत्तर दक्षिण की ओर से प्रवाहित होती है.।Article image

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