हिंदू धर्म के अनुसार शास्त्रों में धार्मिक मान्यताओं में जब कोई भी व्यक्ति मंदिर के चारों ओर भगवान या मूर्ति की परिक्रमा करता है तो इसमें सकारात्मक ऊर्जा शक्ति की प्राप्ति होती है और इसके साथ ही मंदिर या किसी शक्ति स्थान की परिक्रमा करने से मन शांत होता है और जीवन में खुशियां आती है। अक्सर हमें यह बात को भी याद रखना चाहिए कि परिक्रमा करते समय हमेशा हमें दाहिने हाथ की ओर से शुरू करना चाहिए क्योंकि जो प्रतिमाओं में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा शक्ति होती है वह उत्तर दक्षिण की ओर से प्रवाहित होती है.।
हम भगवान के चारों ओर परिक्रमा क्यों करते हैं?
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हिंदू धर्म में परिक्रमा का बड़ा ही महत्व है। क्योंकि परिक्रमा करने का मतलब होता है कि हमने पूरी सृष्टि का परिक्रमा कर लिया है। परिक्रमा को जीवन से जोड़ा गया है क्योंकि यह जीवन एक परिक्रमा की तरह होता है इसलिए हमें भगवान का परिक्रमा करने से यह समझा जाता है कि हमने पूरी सृष्टि का परिक्रमा कर लिया है। भगवान शिव की परिक्रमा अर्थ परिक्रमा की जाती है गणेश जी की चार परिक्रमा किए जाते हैं सूर्य देव के साथ परिक्रमा की जाती है और मां दुर्गा की एक परिक्रमा की जाती है और भगवान विष्णु के 4 परिक्रमा किए जाते हैं। जब कोई व्रत पूजा की जाती है तो लोग भगवान की परिक्रमा करते हैं जिससे हमारे घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है लोग परिक्रमा करते वक्त भगवान से मन्नते भी मांगते हैं ।
जब कोई व्यक्ति धर्म शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी मंदिर या भगवान की प्रतिमा के चारों तरफ परिक्रमा करता है, तो उस व्यक्ति को मन की शांति प्राप्त होती है!और उसे सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है!
किसका दार्शनिक महत्व काफी अधिक होता है : हमारे जीवन में दार्शनिक महत्व भी एक संपूर्ण ब्रह्मांड का हर एक ग्रह नक्षत्र कोई ना कोई तारे की परिक्रमा करता है। और यही परिक्रमा हमारे जीवन का सत्य कहलाता है। क्योंकि व्यक्ति का सारा जीवन एक चक्र कहलाता है! और इसी जीवन चक्र को समझने के लिए परिक्रमा जैसे चिन्ह का निर्माण किया गया है।
हमारे हिंदू धर्म में परिक्रमा को काफी अधिक महत्व दिया जाता है! जब कोई व्रत पूजा होती है, तो लोग भगवान की चारों ओर परिक्रमा करते हैं! जिससे मन की शांति और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है! भगवान की परिक्रमा करते हुए लोग मन्नते भी मांगते हैं!
हिन्दू धर्म के अनुसार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक शास्त्रो के अनुसार मंदिर या भगवान की चारो ओर परिक्रमा करने से सकारात्मक ऊर्जा शरीर में उत्पन्न होती हैं। इस ऊर्जा को जब हम घर ले जाते है तो नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। जिससे घर में सुख शांति आती हैं । परिक्रमा करने से मन को सुकून प्राप्त होता है और मन अच्छे विचारो को मन मे लाता है। .jpeg&w=640&q=75)
आप सभी ज़ब कभी भी मंदिर जाते है तो लेडीजो और लड़कियों को अक्सर देखते है कि वह किसी भगवान की मूर्ति के चारो ओर परिक्रमा करते हुए नज़र आती है। भगवान की मूर्ति चारो तरह परिक्रमा करने से उस व्यक्ति की बॉडी मे पॉजिटिव एनर्जी प्रवेश कर जाती है जो सिर्फ उसके बॉडी मे ही नहीं उसके साथ ही वह व्यक्ति जैसे ही अपने घर के अंदर प्रवेश करता है उसके घर मे भी पॉजिटिव एनर्जी आ जाती है जिससे उसके घर मे सुख, शांति, समृद्धि हमेशा बनी रहती है। और उनके ऊपर आने वाले हर एक संकट से उसकी रक्षा करता है भगवान का आशीर्वाद सदा उसके ऊपर बना रहता है।

हमें परिक्रमा से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है धर्म शास्त्रों के अनुसार जब हम किसी मंदिर या भगवान के चारों ओर परिक्रमा करते हैं तो सकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करती हैं!
परिक्रमा शुरू करने के बीच हमें नहीं रुकना चाहिए और परिक्रमा वही खत्म करें जहां से शुरू की थी मेरा मानना कि परिक्रमा बीच में रोकने से वह पूर्ण नहीं मानी जाती है
भगवान की परिक्रमा करते समय हमें किसी से बातचीत नहीं करना चाहिए जिससे आपकी पूजा संपन्न हो!
हमें भगवान की परिक्रमा उल्टी तरफ से नहीं करना चाहिए!
इस प्रकार से देवी-देवताओं की परिक्रमा विधि सहित करने से आपके जीवन की समस्याओं का समाधान होगा!




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