सैनिकों को सरकार द्वारा दी जाने वाली शराब (Canteen Stores Department - CSD के माध्यम से) के पीछे कई ऐतिहासिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण हैं। यह केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि उनकी सेवा की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए एक सोची-समझी नीति का हिस्सा है।
मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ: भारतीय सैनिक अक्सर सियाचिन या हिमालय जैसे बेहद ठंडे इलाकों में तैनात होते हैं। ऐसी कड़ाके की ठंड में शरीर के तापमान को बनाए रखने और रक्त संचार को सुचारु रखने के लिए शराब का सीमित सेवन 'दवा' के रूप में सहायक माना जाता है।
- तनाव और थकान से मुक्ति: युद्ध क्षेत्र या एकांत सीमाओं पर तैनाती के दौरान सैनिक भारी मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजरते हैं। सीमित मात्रा में शराब उन्हें दिन भर की थकान के बाद मानसिक राहत देने और बेहतर नींद में मदद करती है।
- ब्रिटिश परंपरा और संस्कृति: भारतीय सेना की कई परंपराएं ब्रिटिश काल से चली आ रही हैं, जहाँ 'मेस कल्चर' में वाइन या व्हिस्की का सेवन सामाजिक मेलजोल और अनुशासन का हिस्सा माना जाता था।
- सामाजिक जुड़ाव (Social Bonding): शाम के समय मेस में साथ बैठकर ड्रिंक करना सैनिकों और अधिकारियों के बीच भाईचारे और टीम भावना (Esprit de corps) को मजबूत करता है।
महत्वपूर्ण जानकारी: यह ध्यान रखना जरूरी है कि सेना में शराब पीने की पूरी तरह छूट नहीं होती। इसके लिए सख्त कोटा निर्धारित है और ड्यूटी के दौरान नशे में पाए जाने पर बहुत कठोर दंड का प्रावधान है।