भारत में पत्नियों को सुहागन रहने से भाग्यशाली इसलिए माना जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि भाग्यशाली एवं सुहागन औरत वही उम्र भर रह पाती हैं जिन्होंने पिछले जन्म में बहुत अच्छे काम किए हैं पुण्य किया हो और किसी के साथ भी दुरा व्यवहार ना किया हो और शायद आप एक दूसरे की मदद करी हो। इसी के कारण पिछले जन्म का जो यह पुण्य किया है तो इस जन्म पर उसे हमेशा सौभाग्यवती भावा का आशीर्वाद दिया जाता है क्योंकि इस आशीर्वाद से पत्नियों का सुहागन हमेशा सदा ही भाग्यशाली रहता है और पत्नियों को ही घर की लक्ष्मी का वरदान भी मिला है कि यह सौभाग्यवती भावा भाग्यशाली एवं सुहागन हमेशा रहे.।
भारत में पत्नी को सुहागन रहने पर भाग्यशाली क्यों माना जाता है?
भारत में पत्नियों को सुहागन और सौभाग्यवती इसीलिए कहा गया है कि जो पत्नी सुहागन रहती हैं वही भाग्यशाली होती है, क्योंकि उसके अच्छे कर्म उसके भाग्य के साथ जुड़ जाते हैं और वह हमेशा खुश रहती है! शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि हमें कुछ पिछले जन्म के पुण्य हमें इस जन्म में मिल जाते हैं और हमारा जीवन खुशहाल हो जाता है! जिससेे हमें सौभाग्यशाली कहा जाता है! इसलिए हमें कभी भी किसी केेेेेेेेेेेेेेेेे साथ गलत व्यवहार नहीं करना चाहिए,और ना ही किसी व्यक्ति के बारे में गलत सोचना चाहिए! जिससे हमारा परिवार भी खुशी-खुशी रह सके!
हर घर में पत्नी को देवी लक्ष्मी के रूप में माना जाता है। क्योंकि वे घर की लक्ष्मी होती है। क्योंकि इनके बिना हमारा घर पूर्ण नहीं होता है। और पत्नी को अर्धांगिनी भी कहा जाता है क्योंकि वे पति के आधा अंग होती है। क्योंकि यह घर को अच्छे से संभालती हैं छोटे से लेकर बड़ों का आदर सम्मान और उनका ख्याल रखती है। जैसे खाना बनाना कपड़े दुल्ला झाड़ू पोछा करना आदि सभी कार्यों को यह आसानी से करती हैं। और अपने पति बच्चों का ख्याल रखती है। और शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि वही स्त्री जीवन भर सुहागन रह पाती है पिछले जन्म पर पुण्य किए हो किसी के साथ कोई दुर्व्यवहार ना किया हो इसलिए उसे सदा सुहागन का वरदान दिया जाता है और भी हमेशा सुहागन रहती है।